शेयर बाजार से प्रतिवर्ष 12 से 24% तक कैसे कमायें? How to earn 12 to 24% per annum from Share Market?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

शेयर बाजार से प्रतिवर्ष 12 से 24% तक कैसे कमायें? How to earn 12 to 24% per annum from Share Market?

कई लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या शेयर बाजार से 12 से 24% तक वार्षिक कमाया जा सकता है, तो मुझे बहुत हैरानी होती है, क्योंकि ऐसे सवाल वो ही लोग पूछते हैं जो शेयर बाजार के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। मैं खुद ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जो कि हर महीने लगभग 10% की कमाई शेयर बाजार से आसानी से कर लेते हैं, हाँ बस आपको शेयर बाजार के बारे में बहुत पढ़ना पढ़ेगा, जानकारी लेनी होगी। हर व्यक्ति पैसा ज्यादा से ज्यादा बनाना चाहता है, परंतु जोखिम कोई नहीं लेना चाहता है। सोचता है कि बिना जोखिम के हर वर्ष 12 से 24% बन जाये। Continue reading…

 

सरकारी डेब्ट प्रतिभूतियाँ Debt Securities जोखिम Risk इक्विटी Equity क्या हैं?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

भारत की वित्तीय एवं निवेश उद्योग को समझें – सरकारी डेब्ट प्रतिभूतियाँ Debt Securities जोखिम Risk इक्विटी Equity क्या हैं? पहला भाग पढ़ने के लिये यहाँ क्लिक करें।

डेब्ट प्रतिभूतियाँ (Debt Securities) –

डेब्ट बाजार घरेलू और संस्थाओं दोनों के लिये है, जिनके पास ज्यादा रकम उपलब्ध है और जिनको रकम की जरूरत है। सर्टिफिकेट ऑफ पेपर (Certificate of Paper) जो कि डेब्ट प्रतिभूति कहलाती है, यह उधारी देने वाला उधारी लेने वाले को सीधे ही इश्यू करता है। Continue reading…

 

भारत की वित्तीय एवं निवेश उद्योग को समझें – मुद्रा, वित्तीय परिसंपत्तियाँ, प्रतिभूतियाँ Indian Financial and Investment Industry Money

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

Basic Concept – वित्तीय तंत्र बाजार और संस्थाओं का जाल होता है, जो कि अर्थव्यवस्था में धन को सभी विभागों तक पहुँचाते हैं। विभिन्न विभागों में धन संचार कई तरीकों से होता है जैसे मुद्रा (Money), वित्तीय पूँजी, प्रतिभूतियाँ (डेब्ट, इक्विटी)। सबसे पहले हम इन बुनियादी बातों को समझते हैं, जो कि हमें इस वित्तीय तंत्र को समझने में मदद करेगा। Continue reading…

 

5 वर्ष के पहले पीएफ निकालने पर टैक्स लगेगा क्या? Withdraw PF in 5 Years, What about Income Tax?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

5 वर्ष के पहले पीएफ निकालने पर टैक्स लगेगा क्या? Withdraw PF in 5 Years, What about Income Tax?

अगर 5 वर्ष या उससे कम समय तक आपका पीएफ जमा हुआ है, और आप पीएफ के पैसे को निकालने जा रहे हैं तो आपको उसके ऊपर टैक्स देना होगा। पीएफ को समझने के लिये पहले पीएफ में किये गये योगदान के बारे में समझ लें। पीएफ में 4 तरह के अंश होते हैं, आपका अंशदान, आपके अंशदान पर मिला ब्याज, कंपनी का अंशदान और वैसे ही कंपनी के अंशदान पर मिला ब्याज। कर्मचारी के नजरिये से देखें तो आपका पूरा हक है इन चारों अंशदानों पर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप अपनी नौकरी से कब निकल रहे हैं, मतलब कि कौन से वर्ष में निकल रहे हैं। Continue reading…

 

उम्र के साथ निवेश के तरीके भी बदलिये Change Investment Types with your Age

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

आपकी उम्र के साथ ही आपके निवेश करने के तरीके भी बदलने चाहिये।

Change Investment Types with your Age

बदलाव ही जीवन है, क्योंकि आपकी उम्र, आपका निवेश, आपकी कमाई सब कुछ बदलता है।

20 वर्ष में –

निवेश – इक्विटी म्यूचुअल फंड्स एवं टैक्स सेविंग इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ELSS), सस्ते जीवन बीमा (Life Insurance) और स्वास्थ्य बीमा प्लॉन (Mediclaim) खरीदें।

क्यों – बहुत कम जिम्मेदारियाँ और देनदारियाँ, कम उम्र होने के कारण बीमाओं की प्रीमियम भी काफी कम होगी।

30 वर्ष में –

निवेश – इक्विटी स्कीम और साथ ही थोड़े से डेब्ट फंड में निवेश, टैक्स ELSS के साथ बचायें।

क्यों – आप अपने लिये और अपने परिवार के लिये लंबी अवधि के लिये सोचें, डेब्ट निवेश कम जोखिम का होता है।

40 वर्ष में –

निवेश – इक्विटी म्यूचुअल फंड, बैलेन्सड फंड, टैक्स ELSS एवं रिटायरमेंट प्लॉन।

क्यों – परिवार की बहुत सारी जिम्मेदारियाँ आपके कंधे पर होती हैं।

50 वर्ष में –

निवेश – सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लॉन के द्वारा इक्विटी से डेब्ट फंड में निवेश ले जाना।

क्यों – सेवानिवृत्ति होने के करीब होने से डेब्ट फंड में निवेश ले जाना चाहिये, जहाँ बहुत ज्यादा जोखिम नहीं होता है।

60 वर्ष में –

निवेश – सिस्टमेटिक विद्ड्रॉल प्लॉन आपके निवेशों से। Monthly Income Plans (MIP) and Senior Citizen Saving Schemes.

क्यों – आपको कम जोखिम वाले प्लॉन में निवेश करना चाहिये, जिसमें नियमित आय होती रहे।

https://www.youtube.com/watch?v=ov3C6l2iM78

 

सावधि जमा के 5 नियम आप शायद न जानते हों 5 Rules of Fixed Deposit, you may not know

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

हम लोग अपनी जमा अधिकतर Fixed Deposit में ही रखते हैं, परंतु हम बहुत से नियमों के बारे में नहीं जानते हैं, आईये हम आपको बताते हैं 5 नियम जो कि आपकी सावधि जमा पर लागू होते हैं –

सावधि जमा पर बीमा (Insurance on Deposits)

  • DICGC ( Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation)
  • बीमा की प्रीमियम बैंक द्वारा ही दी जाती है।
  • बैंक के कंगाल होने की स्थिती में अधिकतम 1 लाख रूपया हर जमाकर्ता को मिल सकता है, मूलधन और ब्याज दोनों मिलाकर।

ऋण / ओवरड्रॉफ्ट – (Loan / Overdraft)

  • सावधि जमा के विरूद्ध आप ऋण या ओवरड्रॉफ्ट ले सकते हैं।
  • 90% तक की रकम का ऋण या ओवरड्रॉफ्ट लिया जा सकता है।
  • अधिकतर बैंकें सावधि जमा से 1% ब्याज ज्यादा लेती हैं।

टीडीएस – (TDS  – Tax deducted at source)

  • बैंक से सावधि जमा पर मिलने वाला ब्याज पर आयकर लगता है।
  • ब्याज की आय को आपकी आय में जोड़कर उस टैक्स स्लैब से कर देना होता है।
  • बैंक दिये गये ब्याज का टीडीएस 10% काटती है, अगर ब्याज की रकम एक वर्ष में 10,000 रूपयों से ज्यादा होती है।
  • अगर आप आयकर स्लैब में नहीं आते हैं तो आप 15H/ 15G फॉर्म बैंक को भरकर दे सकते हैं, जिससे टीडीएस नहीं कटेगा।

आवर्ती जमा खाता – ( Recurring Deposit)

  • 2015 से सरकार ने आवर्ती जमा खाते पर मिलने वाले ब्याज को भी आय की श्रेणी में रखा है और ब्याज पर टीडीएस लगेगा।

सार ब्याज की आय को जोड़ना – (Clubbing of Interest income)

  • सारे सावधि जमा, आवर्ती जमा जो कि एक ही बैंक की कई शाखाओं में हैं तो सबका ब्याज आय के स्रोत के रूप में जोड़ लिया जाता है और उस पर टीडीएस काटा जाता है।

 

 

DPD (Days Past Dues) क्या है और इसका सिबिल स्कोर और रिपोर्ट पर क्या असर है?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

DPD (Days Past Dues) का मतलब कि आपने ऋण की किश्त कितनी देरी से भरी है, यह बहुत आम बात है, परंतु जिसने ऋण लिया है उसके लिये बहुत मुश्किल भी है। Continue reading…

 

अगर SIP की कुछ किश्तें न भर पायें तो क्या करें? What if you miss SIP installments?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

SIP में निवेश करना याने कि लंबी अवधि के लिये अपने निवेश के लिये प्रतिबद्धता है। आप अपने म्यूचुअल फंड हाऊस को हर महीने या त्रैमासिक, किसी एक दिन पर बैंक से सीधे पैसे लेने की मंजूरी दे देते हैं, जिसे कि ऑटो डेबिट सुविधा भी कहा जाता है। पहले यह एक फॉर्म पर देना होता था, पर आजकल ऑनलाईन SIP लेने पर बैंक के नेटबैंकिंग में लॉगिन करके आपसे यह सारा काम ऑनलाईन ही करवा लिया जाता है। पर क्या कभी आपने यह सोचा है कि अगर किसी एक महीने या उससे ज्यादा आपके SIP में बैंक से पैसा नहीं गया तो क्या होगा? मतलब कि आपके बैंक खाते में पैसा नहीं है और SIP में पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ फिर क्या होगा? अगर SIP की कुछ किश्तें न भर पायें तो क्या करें? What if you miss SIP installments? Continue reading…

 

आप किस प्रकार के निवेशक हैं? Which type of Investor you are?

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

बाजार में कैसे निवेश करें आजकल सभी लोगों का यही प्रश्न होता है। मजे की बात है कि सभी लोग इस प्रश्न का उत्तर अपने अपने हिसाब से देते हैं, इसका कारण है कि सबका अपना अलग अनुभव होता है। जितने पुराने निवेशक (Investor) हैं उनमें दो ही प्रकार के निवेशक हैं – Continue reading…

 

5 गोपनीय बातें जो किसी को नहीं बताना चाहिये Don’t share these 5 Secrets with anyone

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

5 गोपनीय बातें जो किसी को नहीं बताना चाहिये Don’t share these 5 Secrets with anyone

हमें हमेशा ही सलाह दी जाती है कि हर चीज को मिल बाँटकर उपयोग करना चाहिये और इससे प्यार बढ़ता है, इस तरह की बातें लगभग हर समय आती हैं जब भी हम अपने बच्चों या परिवार के साथ समय बिताते हैं। फिर भले वह भोजन के लिये हो या खिलौने या मिठाई किसी भी बात के लिये हो, परंतु इन सबमें मिल बाँटकर उपयोग करने से वाकई प्यार बढ़ता है। परंतु जब बात आती है वित्तीय जानकारी की तो जहाँ तक हो सके इन वित्तीय जानकारी को अपनी पत्नी क्या अपने बच्चों को भी नहीं बताना चाहिये। Continue reading…