Improve Trading in Share Market शेयर बाजार में ट्रेडिंग कैसे सुधारें

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(Trading in Share Market) शेयर बाजार में ट्रेडिंग मतलब कि खरीद कर बेचना या बेचकर खरीदना, फिर भले ही वह लघु अवधि, मध्यम अवधि हो या लंबी अवधि यहाँ तक कि इंट्राडे हो, बस कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिये –

  • इंतजार करें – एकदम से किसी भी ट्रेड को न करें।
  • अपनी रणनीति खुद बनायें – आँख बंद करके ट्रेड न करें।
  • केवल वही ट्रेड करें, जो आप जानते हैं – अगर आप किसी को नहीं बता सकते कि क्यों ट्रेड करना है?
  • स्टॉक के बारे में समाचार पढ़ लें, जिस पर ट्रेड करते हैं – हमेशा अपने स्टॉक के बारे में जानें, अपग्रेड, डाऊनग्रेड, लाभ इत्यादि
  • अपनी जोखिम शुरू में कम रखें और पेयर ट्रेडिंग करें
  • अपने आप को जानें – ज्यादा रकम का काम न करें।
  • साधारण तरीके से ट्रेड करें – बहुत ज्यादा न सोचें। हवाई किले न बनायें।
  • अपनी गलतियों से सीखें – गलतियाँ तो होती ही हैं, अगली बार वही गलती करने से बचें।
  • अपना अहंकार घर पर रखकर आयें – अपनी हानियों को भी सहना सीखें, यह सब तो चलता ही रहता है।
  • जितना पढ़ोगे उतना सीखोगे – आप बाजार में उपलब्ध रणनीतियों के बारे में पढ़ें, अपनी खुद की रणनीति बनायें। यादे रखें Knowledge is power.

हमेशा याद रखें –

  • 20-30 प्रतिशत फायदा किसी भी ट्रेड में बहुत अच्छा होता है।
  • अपने आपको हमेशा ही ट्रेड में न रखें – बाजार का भी ध्यान रखें। केवल इसलिये ट्रेड न करें कि आपको ट्रेड करना है।
  • ट्रेड जुआ सट्टा नहीं है – सोच समझकर ट्रेड करें, किसी जुआरी की तरह जुआ न खेलें।
  • हमेशा ही अपने ऑर्डर पर लिमिट में काम करें, हमेशा ही स्टॉप होना चाहिये, और कभी भी अपने स्टॉप का उल्लंघन न करें।
#हिन्दी_ब्लॉगिंग
https://www.youtube.com/watch?v=PW2B0F1JLhc
 

LIC Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana की प्रधानमंत्री वय वंदना योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिये

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LIC की प्रधानमंत्री वय वंदना योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिये

Pradhan Mantri Vaya Vandana Yojana

 

सेवानिवृत्ति के बाद अपने निवेश को कैसे संभालें Invest correctly after Retirement

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सेवानिवृत्ति हर एक व्यक्ति के जीवन में आने वाला एक पढ़ाव है और अपने निवेश को मैनेज करने में अधिकतर लोग बहुत ही गंभीर गलतियाँ करते हैं। (Invest correctly after Retirement)

सभी की सेवानिवृत्ति की उम्र अलग-अलग है, कहीं पर 58 है, कहीं पर 60 है, कहीं पर 62 है, तो कहीं पर 65 भी है। कुछ प्रोफेशन ऐसे हैं जिसमें सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं होती। सेवानिवृत्ति के बाद औसतन हम लोग 35 वर्ष की उम्र जीते हैं और इतने वर्षों में आप की जितनी भी बचत है, वह मुद्रास्फीति की भेंट चढ़ जाएगी। इसे दो प्रकार से देख सकते हैं पहली कि आप की बचत जो है वह सही तरीके के निवेश उत्पादों में लगी हो, जैसे कि इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में या इक्विटी में सीधा निवेश हो, और दूसरा जब आप सेवानिवृत्त होते हैं तो इस निवेश से आपके लिए नियमित आय आती रहे।

बुनियादी बात यह है कि आपको अपने निवेश से होने वाली आय पर ही निर्भर रहना है। आपका निवेश आपको मुद्रास्फीति की दर से ज्यादा रिटर्न देना चाहिये। आपका जो मूलधन है वह हमेशा मुद्रास्फीति की दर के साथ बढ़ता रहना चाहिये। अगर वह मूलधन इतना ही रहता है तो आपको आने वाले वर्षों में बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा, तो इससे कैसे निपटें? एक उदाहरण देखते हैं, आप यह मान कर चलें अगर आज बैंक में फिक्स डिपॉजिट की दर 7.5% है और मुद्रास्फीति की दर अगर 5% है और आपकी डिपॉजिट 30 लाख रूपये है, तो 1 साल के बाद आपके डिपॉजिट की रकम लगभग 32 लाख 25 हजार रूपये हो जायेगी। अब आप सोच रहे होंगे कि मैं अपना खर्च इस 2.25 लाख रुपये से निकाल दूँगा। यहाँ हम बता दें कि आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि यहाँ पर मुद्रास्फीति की दर 5% है तो इस हिसाब से आपका निवेश 1 साल के बाद 30 लाख की जगह 31 लाख 50 हजार रुपये होना चाहिये, तो अब आप 2.25 लाख रुपये में से 1.5 लाख रुपये घटा देंगे तो आपके पास में बचेंगे 75 हजार रुपये, 75 हजार रुपये को आप 12 महीने में भाग कर लीजिए तो 6250 रुपये आप हर महीने खर्च कर सकते हैं। आप यह भी ध्यान रखिए कि जब आप ₹10 हजार सालाना से ज्यादा ब्याज फिक्स डिपॉजिट पर कमाते हैं तो उस पर आयकर विभाग को टीडीएस भी देना होता है। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपने निवेश को 30 लाख रूपये रखकर भविष्य के लिए अपनी आय कम करना चाहते हैं या फिर 31 लाख 50 हजार रुपये रखकर मुद्रास्फीति की दर को समायोजित कर सकते हैं।

कई बार ऐसा भी होता है जब फिक्स डिपॉजिट की दर मुद्रास्फीति की दर से कम होती है या बराबर होती है या उनके बीच का अंतर बहुत कम होता है। आने वाले समय में इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिक्स डिपॉजिट की दर मुद्रास्फीति की दर से ज्यादा होगी।

जबकि अगर आपका निवेश इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में है तो स्थिति बिल्कुल अलग ही होगी। क्योंकि वहाँ पर आपका पैसा बाजार और देश के विकास के साथ काम कर रहा है। आप वहाँ से आराम से कम से कम 4% सालाना निकाल सकते हैं और आपका पैसा वहाँ पर बढ़ता भी रहेगा। हाँ जोखिम जरूर है बाजार में, लेकिन आप अपना 50% निवेश इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में रख सकते हैं, जो कि कभी भी एक साथ ना हो। निवेश हमेशा टुकड़ों-टुकड़ों में करते रहना चाहिये, जिससे आपका निवेश बाजार के हर स्तर पर हो और आप बाजार की अस्थिरता से होने वाले नुकसानों से बच सकें। इन नुकसानों को फायदे में बदलने का नाम है – नियमित निवेश अगर आपका निवेश शेयर बाजार में सीधे भी है, तो आपको उसके अन्य फायदे भी मिलेंगे जैसे कि उनसे मिलने वाला डिविडेंड जो कि टैक्स फ्री है। अगर आपका निवेश म्युचुअल फंड और इक्विटी दोनों में है तो यहां पर आपको आयकर में भी फायदा होगा, क्योंकि इस आय पर आयकर नहीं लगेगा।

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे मुद्रास्फीति की दर भी बढ़ती जायेगी। सेवानिवृत्ति के बाद 5 से 7 वर्ष आपको थोड़ा लगेगा कि हमारा पैसा जोखिम में निवेश है, लेकिन जब आप 7 वर्ष के बाद अपने निवेश को देखेंगे तो आपको खुशी होगी क्योंकि आप सेवानिवृत्ति के बाद यानि कि बुढ़ापे में होने वाली गरीबी से बच सकेंगे।

बहुत ही कम लोगों ने इस बारे में सोचना और समझना शुरू कर दिया है, जो कि अपनी नियमित निवेश म्यूचुअल फंड और इक्विटी में कर रहे हैं और उससे होने वाले फायदे उठा रहे होंगे। जो लोग भी इक्विटी शेयर बाजार में और म्यूचल फंड में निवेश कर रहे हैं उनको लघु अवधि और मध्यम अवधि के फायदों को नजरअंदाज करना चाहिये। तभी आप लंबे समय तक निवेशित रह पायेंगे और लंबी अवधि में अच्छे लाभ कमा पायेंगे। हालांकि अभी भी 99% लोग जो सेवानिवृत्त हो चलो हैं, अपना पैसा फिक्स डिपॉजिट में ही रखना श्रेयस्कर समझते हैं। जैसे जैसे आप और बूढ़े होते जायेंगे, वैसे वैसे आपका पैसा कम होता जाएगा। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने निवेश सलाहकार से सलाह जरूर करें। निवेश सलाहकार सीएफपी CFP (Certified Financial Planner) होना चाहिये।

 

Get loan even if you have low credit score क्रेडिट स्कोर खराब हो, तो ऋण लेने के लिए क्या करें

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आपके ऋण का आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है क्योंकि आपका क्रेडिट स्कोर खराब है, तो बहुत सारे विकल्प बैंक के बाहर भी उपलब्ध हैं। Get loan even if you have low credit score.

आपका क्रेडिट स्कोर बहुत महत्वपूर्ण है और आपको ऋण मिलेगा या नहीं मिलेगा उस में यह अहम भूमिका निभाता है। साधारणतया खराब क्रेडिट स्कोर ही ऋण अस्वीकार होने की परिस्थिति को उत्पन्न करता है। खास करके अगर आपने बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया है।

आपके पास और कौन से विकल्प उपलब्ध हैं अगर आपकी जरूरत थोड़े दिनों के लिए आप टाल सकते हैं, तो भी आप अपना क्रेडिट स्कोर अच्छा करने के लिए कुछ काम कर सकते हैं। नहीं तो बैंक के बाहर बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं और उन्हें तलाशना चाहिए लेकिन ध्यान रखिए बैंक के बाहर जितने भी विकल्प हैं, वह सब नियमित बैंकों Bank से बहुत महँगे हैं और उन्हें तभी उपयोग करना चाहिए जब बहुत ही ज्यादा मजबूरी हो।

क्रेडिट स्कोर अच्छा करना

Low Credit Score

Low Credit Score

सबसे पहले आपको यह जानना चाहिए कि अगर आपका ऋण बैंक ने अस्वीकार कर दिया है क्योंकि आपका क्रेडिट स्कोर खराब है, तो आपको अन्य बैंकों में आवेदन देना बंद कर देना चाहिये। इसका कारण यह है कि जितना ज्यादा आवेदन आप बैंकों में देंगे, उतना ज्यादा बैंकों से ऋण के लिए अस्वीकार किया जाना आपका क्रेडिट स्कोर और खराब कर देता है। क्योंकि हर बार जब भी बैंक आपको ऋण देने के लिए क्रेडिट स्कोर चेक करता है, तो आपकी क्रेडिट रेटिंग अपने आप कम हो जाती है। जो भी बैंक आपके क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं उसकी एंट्री सिबिल रिपोर्ट में दर्ज हो जाती है।

अगर आप अपना ऋण 6 महीने से 1 साल के लिए लेना टाल दें तो आप इस समय का उपयोग अपने क्रेडिट स्कोर को अच्छा करने में उपयोग कर सकते हैं। क्रेडिट स्कोर ठीक करने का काम आप अपने नियमित किश्तों को चुकाकर, जो कि आपके अभी के चल रहे लोग की हो सकती हैं और आपके ऊपर कोई देनदारी ना हो या फिर आपके बहुत सारे लोग हैं तो आप उनको बंद करके केवल एक ऋण कर लें या फिर आप अपने दोस्तों या परिवार से थोड़ा बहुत उधार लेकर अपने जो चल रहे ऋण हैं उनको बंद कर दें।

अगर आपके पास में बहुत सारे क्रेडिट कार्ड हैं तो आप अपने क्रेडिट कार्ड सरेंडर कर दें। आप अपनी क्रेडिट लिमिट का 30 से 40% से ज्यादा का उपयोग ना करें। आप अपने क्रेडिट कार्ड का बिल पूरा और समय से भर दें। कोई भी भुगतान आधा अधूरा न करें। अगर तब भी आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा नहीं हो जाता है तो भी जो अनुशासन आप दिखायेंगे, इससे नये ऋण के मिलने की संभावना ज्यादा है। क्योंकि बहुत सारी बैंकिंग कंपनियाँ आपके कम क्रेडिट स्कोर को नजरअंदाज करके केवल इसलिए भी ऋण दे सकते हैं कि आपने नियमित किश्तें भरी हैं, जो कि पिछले 12 महीने उससे अधिक अवधि की होना चाहिये।

NBFC के पास जाइए

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अगर आपको एकदम से पैसे की जरूरत है और आपका क्रेडिट स्कोर खराब है तो बैंक से ऋण मिलने की उम्मीद नहीं करना चाहिए लेकिन कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थान एनबीएफसी NBFC यहाँ पर आपकी मदद कर सकते हैं। ध्यान रखिये एनबीएफसी NBFC आपको कम क्रेडिट स्कोर होने की वजह से कुछ अलग तरीके से इसका फायदा उठायेगी, जैसे कि अधिक ब्याज दर आपके ऋण देना।

अगर आपका क्रेडिट स्कोर बहुत अच्छा है तो एनबीएफसी NBFC उनको 11 से 17 प्रतिशत तक ब्याज दर लगाता है। लेकिन जिनका क्रेडिट स्कोर बहुत कम है उनका ब्याज दर ही 18 प्रतिशत से शुरू होता है, जो कि 28 या 30% तक जा सकता है। यहाँ तक कि कुछ एनबीएफसी NBFC फिक्स इंटरेस्ट रेट भी देते हैं फिर भले ही आपका क्रेडिट स्कोर कुछ भी हो। दूसरी बात आपका क्रेडिट स्कोर कम है तो आपको एक को एप्लिकेंट भी चाहिए या फिर आपको कुछ कोलेटरल सुरक्षा के रुप में देना होगा। साथ ही अन्य शुल्क भी देना होंगे, जो कि प्रोसेसिंग फीस या कुछ और भी हो सकते हैं और यह सब फीस बैंकों से ज्यादा होंगे।

पियर टू पियर लैंडिंग P2P Lending

p2p lending

दूसरा विकल्प है पीयर टू पीयर लेंडिंग P2P Lending तो यहाँ पर एक थर्ड पार्टी व्यक्तिगत रूप से ऋण प्रदान करती है। एक ब्रोकर के साथ आपको करना क्या होगा कि आपको P2P Lending के प्लेटफार्म पर रजिस्टर करना होगा। जिसकी फीस ₹500 से ₹1500 तक होगी और उसमें आपको अपनी सारी जानकारी दर्ज करवाना होगी, जैसे कि आपका नाम, पता आय की जानकारी, टैक्स के स्टेटमेंट इत्यादि जिसे केवाईसी प्रोसेस भी कहा जाता है। उसके बाद में यह प्लेटफार्म आपको ऋण देने वाले से मिलवा देगा और ब्याज दर 12% से 30% तक हो सकती है जिसकी समय सीमा 3 महीने से 36 महीने तक होती है। ऋण की प्रोसेसिंग फीस ब्याज के दर पर निर्भर करती है जो आपको ऋण पर मिला है। अगर ब्याज दर कम है तो प्रोसेसिंग फीस कम होगी और अगर ब्याज दर ज्यादा है तो प्रोसेसिंग फीस ज्यादा होगी। एनीटाईमलोन, लैंडबॉक्स, लेनदेन क्लब, पीयरलेंड यह कुछ P2P Lending के प्लेटफार्म बाजार में उपलब्ध है।

पी टू पी P2P Lending से एनबीएफसीअच्छा है –
NBFC से ऋण लेना P2P Lending से ऋण लेने से ज्यादा अच्छा है, क्योंकि एनबीएफसी NBFC भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेगुलेट किया जाता है जबकि P2P Lending नहीं, दूसरी बात अगर आप एनबीएफसी से लिये गये ऋण की नियमित किश्त चुकाते हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है। जबकि P2P Lending से ऐसा नहीं होता है, हो सकता है थोड़े दिनों में भारतीय रिजर्व बैंक P2P Lending के लिए भी कुछ नियम लेकर आ जायें और इसे भी रेगुलेट करने लगें P2P Lending में सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई समस्या आ जाये तो वहाँ पर समस्या सुलझाने के लिए कोई कानूनी रास्ता नहीं है।

 

शेयर बाजार क्या है ? शेयर बाजार कैसे काम करता है?

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शेयर बाजार क्या है?

शेयर बाजार का मतलब जहाँ शेयर खरीदे बेचे जाते हैं या फिर नई पुरानी कंपनियों के शेयर इशू किए जाते हैं।

स्टॉक मार्केट शेयर मार्केट (Share Market) के जैसा ही होता है। स्टॉक मार्केट जो है वह अन्य वित्तीय उत्पादों जैसे कि बांड, म्यूच्यूअल फंड्स, डेरीवेटिव, साथ ही कंपनियों के शेयर खरीदने बेचने की सुविधा देते हैं और शेयर बाजार केवल शेयर खरीदने या बेचने की सुविधा देते हैं।

तो महत्वपूर्ण है स्टॉक एक्सचेंज, स्टॉक एक्सचेंज एक बुनियादी सुविधा देते हैं कंपनियों को अपने शेयर इश्यु करने के लिए या अन्य वित्तीय उत्पादों को बाजार में उपलब्ध करवाने के लिए। साथ ही आप इन स्टॉक एक्सचेंज में शेयर एवं वित्तीय उत्पादों को खरीद व बेच सकते हैं। कोई भी स्टॉक केवल तभी खरीदा या बेचा जा सकता है जब वह उस एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होगा। तो यह कहना भी सही है कि यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ पर स्टॉक खरीदने वाले और बेचने वाले मिलकर काम करते हैं।

भारत के प्रीमियर स्टॉक एक्सचेंज मुंबई स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई हैं। स्टॉक मार्केट में दो चीजें होती हैं, पहला होता है प्राइमरी मार्केट, प्राइमरी मार्केट मतलब जहाँ पर आप आईपीओ यानी कि इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग से शेयरों में पैसा लगाते हैं। दूसरा होता है सेकेंडरी मार्केट जब आईपीओ के बाद में शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हो जाते हैं, तब उसको स्टॉक एक्सचेंज में खरीदा बेचा जा सकता है उसे हम ट्रेडिंग कहते हैं।

प्राइमरी मार्केट –  इस मार्केट में कंपनी अपने आपको सूचीबद्ध करवा कर अपने कुछ शेयर बाजार में लाती है और उनसे पैसे उठाती है। इसको स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करना भी कहते हैं। कोई भी कंपनी प्राइमरी मार्केट से अपना कैपिटल रेज raise करती है। अगर कोई कंपनी पहली बार अपनी कंपनी के शेयर बेच रही है तो उसे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग याने की आईपीओ कहा जाता है, आईपीओ के बाद कंपनी पब्लिक हो जाती है।

सेकेंडरी मार्केट – एक बार शेयर आईपीओ से लिस्ट हो जाता है यानी कि प्राइमरी मार्केट से कैपिटल रेज raise हो जाती है तो उन शेयरों को सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड किया जा सकता है, जिससे कि निवेशक अपने निवेश को बाहर निकाल सकें और अपने शेयरों को बेच सकें। वैसे ही नए निवेशक जो उस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उनके शेयर खरीद सकें। सेकेंडरी मार्केट के ट्रांजैक्शंस ट्रेड कहलाते हैं। मतलब कि जब एक निवेशक खरीदता है तब कोई दूसरा निवेशक बेचता है, तो जिस भी भाव पर दोनों सहमत होते हैंं बेचने के लिए उसे मार्केट प्राइज कहा जाता है। साधारणतया निवेशक ऐसे ट्रांजैक्शन किसी मध्यस्थ के द्वारा करते हैं जो कि ब्रोकर कहलाते हैं जो की बीच की सारी प्रक्रिया का ध्यान रखते हैं।

शेयर कैसे खरीदें?

सबसे पहले आपको एक ट्रेडिंग अकाउँट और एक डीमेट अकाउँट खोलना होता है, यह ट्रेडिंग और डीमेट अकाउँट आपके सेविंग अकाउँट से लिंक होता है, जिससे कि पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा सरल हो सके।

लगभग सारी कंपनियाँ या बैंकें अपने-अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ग्राहक के लिए उपलब्ध करवाते हैं। जिससे ग्राहक शेयरों को बेच सकें या खरीद सकें। इस में पहली सुविधा होती है ऑनलाइन ट्रेडिंग, तो ऑनलाइन ट्रेडिंग में आप खुद यानी कि निवेशक अपने निवेश के निर्णय लेते हैं। यहाँ पर आप जब भी शेयर खरीदते और बेचते हैं तो मार्केट की स्टेटिस्टिक्स देख सकते हैं कि कितने रुपए में शेयर बिक रहा है या खरीदा जा रहा है।

ऑनलाइन ट्रेडिंग करने के लिए आप अपने ट्रेडिंग अकाउँट के यूजर ID पासवर्ड सिक्योरिटी की Password Security Key और एक्सेस कोड Access Code का उपयोग करके लॉगिन कर सकते हैं और उसके बाद आपको ट्रेडिंग का एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध होता है। साथ ही बैकऑफिस से आप अपने लेजर को देख सकते हैं, जिसमें आपने कितने रुपए के शेयर खरीदे हैं यानी कि उसे होल्डिंग कहा जाता है, जो आपके पास में होल्डिंग होती है  कि कितने कंपनियों के शेयर आपके पास हैं, कितने रुपए में आपने खरीदे हैं, आज की उसकी कितनी बाजार की कीमत Market Value है, तो आज की मार्केट प्राइज के हिसाब से उसकी वैल्यू वहाँ पर अपडेट होती है तो आप वहां पर अपने शेयरों की वैल्यू देख सकते हैं और यह सब रियल टाइम होता है।

जब आप शेयर खरीदते हैं, बेचते हैं तो आपका ब्रोकर आपको बिल देता है जिसे की कॉन्ट्रैक्ट कहा जाता है जिसके अंदर शेयर के भाव के अलावा ब्रोकरेज सर्विस टैक्स और अन्य प्रकार के टैक्सों की गणना के बाद कुल रकम लिखी होती है।

डीलर असिस्टेट ट्रेडिंग – अगर आपको किसी शेयर को खरीदने के लिए कुछ सलाह चाहिए तो आप डीलर असिस्टेट ट्रेडिंग का उपयोग कर सकते हैं जहाँ पर डीलर आपको उस कंपनी के बारे में ज्यादा जानकारी देते हैं और आप अपनी गोपनीय जानकारी को सत्यापित करके उनके साथ में फोन पर ही शेयर की ट्रेडिंग कर सकते हैं मतलब खरीदना या बेचना कर सकते हैं।

फोन करके ट्रेड करना अगर आपके पास में लैपटॉप या कंप्यूटर पर इंटरनेट का एक्सेस नहीं है तो आप फोन करके भी शेयरों का खरीदना या बेचना कर सकते हैं।

लाइट सॉफ्टवेयर बहुत ही कम MB के होते हैं और इनको चलाने के लिए बहुत अधिक इंटरनेट की रफ्तार नहीं चाहिए होती है यह सुविधा लगभग हर एक कंपनी दे रही है।

 

शेयर बाजार की आधारभूत जानकारी Basic Information of Share Market

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हम निवेश क्यों करते हैं ?

हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे भविष्य के लिए हमारे पास आवश्यक रकम उपलब्ध रहे। केवल कमाने से और उसमें से बचत करना ही काफी नहीं होता है। मुद्रास्फीति के कारण समय के साथ-साथ मुद्रा का अवमूल्यन होता है, जिससे हमें हमारी बचत को बचाना होता है। मुद्रास्फीति से होने वाले घाटे को हम निवेश करके, उससे और ज्यादा रकम कमाने की चेष्टा करते हैं। यही निवेश का आधारभूत सिद्धांत है और शेयर बाजार निवेश करने की एक बेहतरीन जगह है। Continue reading…

 

निवेश और पैसे के विषय में १० सबसे बड़ी मिथक

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बात चाहे शेयर बाज़ार में निवेश की हो या फिर पैसो के प्रबंधन की, बाज़ार में आपको काफी सारी अफ़वाए और मिथक सुनने को मिलेंगी | यह मिथक हम इतनी बार सून चुके है और आदि हो चुके है की मानो यह सब सच है|

इनमे से कुछ मिथक खतरनाक है और उन्हें समझना काफी अनिवार्य है ताकि अगली बार हम यह गलती न दोहराये-

चलिए पैसो और निवेश के १० मिथको को विस्तार से समझते है-

१. इस बार बाजार थोड़ा अलग है

यह एक बहुत ही आम बयान है जो लोग अक्सर बोलना शुरू करते है जैसे ही बाजार अपने ऊपरी स्तर से फिसलना शुरू कर देता है| शायद यही बयान काफी प्रचलित थी २००८ शेयर बाजार क्रैश के वक़्त, क्यों?

२. मै तब तक नहीं बेचूंगा जब तक अपनी पूंजी ना वसूल लू

अगर आप इस बात से सहमत है तो इससे यह पता चलता है की आपका अहंकार आपको नेतृतव कर रहा है| इससे बेहतर शांति बनाये रखे और उचित विश्लेषण के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचे|

३. इस बार यह एक टर्नअराउंड कहानी है, मै अपनी पूरी पूंजी निवेश करूँगा

जब भी आप टर्नअराउंड जैसी कोई शब्द सुने, कृपया सतर्क हो जाये क्योकि स्टॉकब्रोकर जैसे लोगो की यह प्रवृत्ति होती है की वे कुछ ऐसी मनगढंत कहानी बना कर अपने शेयर्स को आप पर थोप दे| इस कारणवश थोड़ा सतर्क रहे और कोई भी ऐसी निवेश करने से पहले भली भाति उसका विश्लेषण करे|

४. यह शेयर लगभग ९० प्रतिशत गिर चुकी है, तो यह और कितना गिर सकती है

यह एक बहुत बड़ी गलती है जो लगभग हर लोग करते है| मान लीजिये एक कंपनी जिसकी कीमत २०० रुपये थी कुछ महीनो पहले परन्तु आज इसकी कीमत केवल १० रुपये है|

Crisis of share market

आपने १०० शेयर्स ख़रीदे इस कंपनी के १० रुपये के भाव में| यह शेयर क्योकि अपने ऊपरी भाव से ९० प्रतिशत गिर चूकी है तो आपके हिसाब से अधिकतम जोखिम केवल १० रुपये ही है।

मान लीजिये महीने भर में शेयर गिरकर २ रुपये में आ गया तो उस परिस्थिति में आपकी ८० प्रतिशत पूंजी साफ़ हो चुकी है| इसलिए कंपनी के फंडामेंटल को समझना काफी जरुरी है न की शेयर कितनी गिर चुकी है।

बाज़ार को समझने के लिए उसके जीवन चक्र (लाइफ साइकिल) को समझना काफी आवशयक है ।

५. शेयर बाजार में पैसे बनाने के लिए अकल्मन्द होना काफी आवशयक है

ज्यादातर लोगो का यह मानना है की एक शेयर को समझने के लिए काफी विश्लेषण और गणना की जरुरत है। परन्तु यह देखा गया है की उच्च शिक्षित फंड प्रबंधक काफी बार बाज़ार जितना रिटर्न देने में शक्षम नई होते|

यह भी पढ़े: कामियाब निवेशकों के १० महत्त्वपूर्ण गुण

वही दूसरी तरफ आम निवेशक अपनी कॉमन सेंस और सामान्य निगरानी से बाज़ार से बेहतर रिटर्न कमाने में सक्षम होते है।

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६. कुछ लोग समझते है की वे काफी युवा है अभी निवेश के लिए

कुछ लोग निवेश नहीं करते क्योकि उन्हें लगता है की वह काफी युवा है अभी निवेश करने के लिए। परन्तु जब वो सोचते है निवेश का तब तक बहुत देर हो चुकी होती है

प्रसिद्ध निवेशक वारेन बुफेट ने ११ वर्ष के उम्र में पहली निवेश की थी और उन्हें लगता था की उन्होंने निवेश करने में काफी देर कर दी।

७. मुझे शेयर्स पसंद नहीं है…… मै बांड की सुरक्षा के साथ ही ठीक हूँ

ज्यादातर निवेशक जोखिम लेने से घबराते है और वे बांड्स की सुरक्षा के साथ ही खुश होते है। परन्तु यदि आप लम्बी अवधी में देखे तो आप नुकसान में ही रहेंगे।

चलिए इसे एक उदहारण से समझते है-

मान लीजिये बांड से आपको ८-९ प्रतिशत का रिटर्न मिलता है सालाना और दूसरी तरफ महंगाई १० प्रतिशत से बढ़ रही है। तो आप समझ ही सकते है की आपकी पूरी कमाई महंगाई खा रही है। यदि आपको महंगाई से पार पाना है तो काम से काम १० प्रतिशत कामना ही पड़ेगा। शेयर बाजार को एकदम शुरुवात से सिखने के लिए, यहाँ क्लिक करे

. आईपीओ अर्थात तेजी से बनाया हुआ पैसा

कुछ लोगो को लगता है की वे आईपीओ में निवेश कर काफी तेजी से पैसे बन सकते है। परन्तु अनुसंधान यह कहता है की लगभग ९० प्रतिशत आईपीओ में लोगो ने अपने पैसे खोए है।

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इसके अलावा उस कंपनी पर अनुसंधान करना काफी जरूरी है जिसकी कोई अतीत ऐतिहासिक डेटा नहीं है, इसलिए यह एक ख़राब आईडिया है।  जरा एक बार डीएलएफ और रिलायंस पावर के आईपीओ के बारे में सोचे, आपको स्वयं ही उत्तर मिल जाएगा।

. ९९ प्रतिशत लोग एनुअल रिपोर्ट नहीं पढ़ते, तो मै क्यों पढू

एनुअल रिपोर्ट पढ़ने से हमे विभिन्न कंपनी के बारीकी की जानकारी मिलती है की कौन सी कंपनी अच्छी है निवेश के हिसाब से। इसलिए अपना गृहकार्य भालि भाती करे यदि पैसे बनाने हो। इसलिए दुसरो पर निर्भर न हो और पूरी अनुसंधान कर सही फैसला ले।

१०. यह शेयर मल्टीबैगर है इसलिए पैसे उधार लेकर और ख़रीदा जाये

यह एक बहुत ही आम शब्द है जो शेयर ब्रोकर्स और बड़े बड़े फण्ड हाउसेस प्रयोक करते है ताकि वे लोग को अपनी शेयर्स ऊपर से ऊपर स्तर पर बेच सके। कृपया सतर्कता बरते जब भी आप ऐसा कुछ सुने और निवेश करने से पहले अच्छी तरह उसका अनुसंधान करे।

निष्कर्ष

खुद को जरा भी कम न समझे क्योंकि एक कामियाब निवेशक बनने के लिए थोड़ी सी समझदारी और अच्छी निरिक्षण की जरुरत है न की बहुत ज्यादा दिमाग की। ध्यान रखे की आप स्वयं ही सक्षम है अपने पैसे के प्रबंधन करने के लिए।

This article is written by Mr Ankit Jaiswal  – Knowledge Associate – Elearnmarkets.com.  A commerce graduate from St. Xavier’s college, Kolkata . He strongly believes in the following saying by Warren Buffett-“Look at market fluctuations as your friend rather than your enemy; profit from folly rather than participate in it”

 

cheque returned unpaid चेक किन कारणों से बैंक वापिस याने कि रिटर्न कर देता है जिसे कहा जाता है

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चेक किन कारणों से बैंक वापिस याने कि रिटर्न कर देता है जिसे कहा जाता है cheque returned unpaid

किसी भी चेक को जो कि आपके द्वारा जारी किया गया है उसे निम्नलिखित कारणों से बैंक रिटर्न कर सकता है –

  1. अगर आपके खाते में चेक को क्लियर करने जितने रूपये ही नहीं हैं।
  2. चेक पर हस्ताक्षर नहीं हैं।
  3. बैंक के रिकार्ड में जो हस्ताक्षर हैं, उनसे आपके द्वारा किये गये हस्ताक्षर नहीं मिलते हैं।
  4. भविष्य की दिनांक का चेक काट दिया है और जमा कर दिया है।
  5. स्टेल चेक – याने कि जिसे इश्यु किये हुए 6 महीने से ज्यादा हो गया है।
  6. चेक में लिखी रकम अंकों और शब्दों में अलग अलग है।
  7. चेक पर कोई भी काटा पीटी (ध्यान रखें कि चेक पर कोई भी काटा पीटी मान्य नहीं है)
  8. जिस चेक को आपने जारी किया और बाद में किसी कारणवश आपने उस चेक के लिये स्टॉप पैमेन्ट का इन्सट्रक्शन जारी किया है।
  9. खाता बंद हो चुका है या खाते में कोई ब्लॉक है याने कि सरकार द्वारा खाते में से निकासी पर रोक है।

जो भी चेक अनादरित हो जाते हैं उन्हें वापिस जमा करने वाले को दि दिया जाता है।

चेक अनादरित होने पर चेक जमा करने वाले व्यक्ति पर और जिसने चेक जमा किया है, दोनों के ही खाते में बैंक चेक रिटर्न के शुल्क लेती है।

 

What is Bad Bank ? बैड बैंक क्या होते हैं ?

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बैड बैंक याने कि खराब लोन वाले बैंक ऐसे विशेष बैंक होते हैं जिसमें सारे खराब लोन याने कि जो लोन एन.पी.ए. हो चुके हैं, या बहुत ज्यादा जोखिम वाले बैंक हैं। सारे बैंकों में से ज्यादा जोखिम वाले लोन या एन.पी.ए. वाले खराब लोन को एक नया बैंक बनाकर उनमें ये सारे लोन खाते ट्रांसफर कर दिये जायेगें। जिससे जो अभी के बैंक हैं उन पर इन खराब लोन के कारण जो उनकी एसेट क्वालिटी खराब हो रही है, उनको फायदा होगा, अभी तकलीफ यह है कि ये बैंकें और ज्यादा लोन नहीं दे सकती हैं। उसमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो शायद अपना सपना साकार करने के लिये सही तरीके से व्यापार करना चाह रहे हैं परंतु दूसरे लोगों के खराब लोन के कारण उनको लोन नहीं मिल पा रहा है।

बैड बैंक से फायदा यह होगी कि यह पूरे बैंकिंग सिस्टम को बचा लेगा, और खराब लोन, खराब लोगों और जोखिम वाले व्यापारों को चिन्हित कर लिया जायेगा। जिससे सही लोगों को लोन दिया जा सकेगा और उनके जोखिम का सही तरीके से विश्लेषण कर लिया जायेगा। अभी इन बैड बैंकों पर भारत में बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे सरकारी सार्वजनिक बैंकें और बड़े निजी बैंकों के बड़े जोखिम वाले लोन एवं एन.पी.ए. लोन को ट्रांसफर कर दिया जाये और इन बैंकों को क्लीन बैंक करके फिर से बाजार में चलाया जाये, इससे होगा यह कि बैंक की एसेट क्वालिटी सुधर जायेगी और ये बैंक अपने बिजनेस को सही तरीके से आगे बढ़ा पायेंगे।

बहुत ज्यादा जोखिम वाले लोन खातों और एन.पी.ए. के कारण से बैंक अपने नियमित ऑपरेशन सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं, एक बार इस तरह के खातों को चिन्हित कर लिया जायेगा और बैड बैंको में इस तरह के खातों को ट्राँसफर करने के बाद ये बैंक अपने नियमित खाताधारियों पर ज्यादा ध्यान दे पायेंगे। साथ ही नये व्यापारियों को भी मौके मिलेंगे, पुराने लोन वालों के कारण नये व्यापारियों को अपना व्यापार करने में बहुत तकलीफ होती है और बैंक उन्हें लोन देने से कतराते हैं।

बैड बैंक से भारत की बैंकिंग व्यवस्था पर अच्छा असर होने की उम्मीद है, अगर चिन्हित किये गये खाते और लोगों पर सख्त कार्यवाही की जाती है, इससे भारत के बैंकिंग क्षैत्र से जोखिम और बिना जोखिम वाले दोनों ही जगहों में नये उद्योगों को नये मौके मिलेंगे और भारत विकास के नये सौपानों को पायेगा।

 

 

सेवानिवृत्त होने के बाद निवेश में गलतियाँ Mistakes in Investment after Retirement

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हम हर चीज में सबसे पहले अमेरिका की तरफ देखते हैं, पर क्या आपको पता है कि अमेरिकन लोग बचत करने के मामले में बहुत पीछे हैं, वे जीवन भर कमाते हैं, पर बचत करने की आदत न होने के कारण सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें कई बार बहुत तकलीफ भी होती है, सेवानिवृत्ति का मतलब है कि सैलेरी बंद हो जाना याने कि जो पैसे हर माह मिलते हैं वे मिलना बंद हो जाना। तो इस स्थिति में क्या हो सकता है कि हम अपने खर्चे कम कर दें, अपनी लाईफ स्टाईल के स्तर को कम कर लें, बहुत सी चीजों में कटौती कर लें। सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्चे भी बड़ जाते हैं और ये खर्चे बहुत ही जरूरी हैं। परंतु अमेरिका में जीवन भर नौकरी करते हुए टैक्स भरने के बाद, सेवानिवृत्ति के समय बहुत सी सुविधायें सरकार उपलब्ध करवाती है, जिसमें से एक है स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्च, पेंशन इत्यादि जिसे सोशल सिक्योरिटी भी कहते हैं। Continue reading…