cheque returned unpaid चेक किन कारणों से बैंक वापिस याने कि रिटर्न कर देता है जिसे कहा जाता है

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चेक किन कारणों से बैंक वापिस याने कि रिटर्न कर देता है जिसे कहा जाता है cheque returned unpaid

किसी भी चेक को जो कि आपके द्वारा जारी किया गया है उसे निम्नलिखित कारणों से बैंक रिटर्न कर सकता है –

  1. अगर आपके खाते में चेक को क्लियर करने जितने रूपये ही नहीं हैं।
  2. चेक पर हस्ताक्षर नहीं हैं।
  3. बैंक के रिकार्ड में जो हस्ताक्षर हैं, उनसे आपके द्वारा किये गये हस्ताक्षर नहीं मिलते हैं।
  4. भविष्य की दिनांक का चेक काट दिया है और जमा कर दिया है।
  5. स्टेल चेक – याने कि जिसे इश्यु किये हुए 6 महीने से ज्यादा हो गया है।
  6. चेक में लिखी रकम अंकों और शब्दों में अलग अलग है।
  7. चेक पर कोई भी काटा पीटी (ध्यान रखें कि चेक पर कोई भी काटा पीटी मान्य नहीं है)
  8. जिस चेक को आपने जारी किया और बाद में किसी कारणवश आपने उस चेक के लिये स्टॉप पैमेन्ट का इन्सट्रक्शन जारी किया है।
  9. खाता बंद हो चुका है या खाते में कोई ब्लॉक है याने कि सरकार द्वारा खाते में से निकासी पर रोक है।

जो भी चेक अनादरित हो जाते हैं उन्हें वापिस जमा करने वाले को दि दिया जाता है।

चेक अनादरित होने पर चेक जमा करने वाले व्यक्ति पर और जिसने चेक जमा किया है, दोनों के ही खाते में बैंक चेक रिटर्न के शुल्क लेती है।

 

What is Bad Bank ? बैड बैंक क्या होते हैं ?

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बैड बैंक याने कि खराब लोन वाले बैंक ऐसे विशेष बैंक होते हैं जिसमें सारे खराब लोन याने कि जो लोन एन.पी.ए. हो चुके हैं, या बहुत ज्यादा जोखिम वाले बैंक हैं। सारे बैंकों में से ज्यादा जोखिम वाले लोन या एन.पी.ए. वाले खराब लोन को एक नया बैंक बनाकर उनमें ये सारे लोन खाते ट्रांसफर कर दिये जायेगें। जिससे जो अभी के बैंक हैं उन पर इन खराब लोन के कारण जो उनकी एसेट क्वालिटी खराब हो रही है, उनको फायदा होगा, अभी तकलीफ यह है कि ये बैंकें और ज्यादा लोन नहीं दे सकती हैं। उसमें ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो शायद अपना सपना साकार करने के लिये सही तरीके से व्यापार करना चाह रहे हैं परंतु दूसरे लोगों के खराब लोन के कारण उनको लोन नहीं मिल पा रहा है।

बैड बैंक से फायदा यह होगी कि यह पूरे बैंकिंग सिस्टम को बचा लेगा, और खराब लोन, खराब लोगों और जोखिम वाले व्यापारों को चिन्हित कर लिया जायेगा। जिससे सही लोगों को लोन दिया जा सकेगा और उनके जोखिम का सही तरीके से विश्लेषण कर लिया जायेगा। अभी इन बैड बैंकों पर भारत में बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिससे सरकारी सार्वजनिक बैंकें और बड़े निजी बैंकों के बड़े जोखिम वाले लोन एवं एन.पी.ए. लोन को ट्रांसफर कर दिया जाये और इन बैंकों को क्लीन बैंक करके फिर से बाजार में चलाया जाये, इससे होगा यह कि बैंक की एसेट क्वालिटी सुधर जायेगी और ये बैंक अपने बिजनेस को सही तरीके से आगे बढ़ा पायेंगे।

बहुत ज्यादा जोखिम वाले लोन खातों और एन.पी.ए. के कारण से बैंक अपने नियमित ऑपरेशन सही तरीके से नहीं कर पा रहे हैं, एक बार इस तरह के खातों को चिन्हित कर लिया जायेगा और बैड बैंको में इस तरह के खातों को ट्राँसफर करने के बाद ये बैंक अपने नियमित खाताधारियों पर ज्यादा ध्यान दे पायेंगे। साथ ही नये व्यापारियों को भी मौके मिलेंगे, पुराने लोन वालों के कारण नये व्यापारियों को अपना व्यापार करने में बहुत तकलीफ होती है और बैंक उन्हें लोन देने से कतराते हैं।

बैड बैंक से भारत की बैंकिंग व्यवस्था पर अच्छा असर होने की उम्मीद है, अगर चिन्हित किये गये खाते और लोगों पर सख्त कार्यवाही की जाती है, इससे भारत के बैंकिंग क्षैत्र से जोखिम और बिना जोखिम वाले दोनों ही जगहों में नये उद्योगों को नये मौके मिलेंगे और भारत विकास के नये सौपानों को पायेगा।

 

 

सेवानिवृत्त होने के बाद निवेश में गलतियाँ Mistakes in Investment after Retirement

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हम हर चीज में सबसे पहले अमेरिका की तरफ देखते हैं, पर क्या आपको पता है कि अमेरिकन लोग बचत करने के मामले में बहुत पीछे हैं, वे जीवन भर कमाते हैं, पर बचत करने की आदत न होने के कारण सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें कई बार बहुत तकलीफ भी होती है, सेवानिवृत्ति का मतलब है कि सैलेरी बंद हो जाना याने कि जो पैसे हर माह मिलते हैं वे मिलना बंद हो जाना। तो इस स्थिति में क्या हो सकता है कि हम अपने खर्चे कम कर दें, अपनी लाईफ स्टाईल के स्तर को कम कर लें, बहुत सी चीजों में कटौती कर लें। सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्चे भी बड़ जाते हैं और ये खर्चे बहुत ही जरूरी हैं। परंतु अमेरिका में जीवन भर नौकरी करते हुए टैक्स भरने के बाद, सेवानिवृत्ति के समय बहुत सी सुविधायें सरकार उपलब्ध करवाती है, जिसमें से एक है स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्च, पेंशन इत्यादि जिसे सोशल सिक्योरिटी भी कहते हैं। Continue reading…

 

शेयर बाजार में कब क्यों कहाँ और कैसे निवेश करना चाहिये?

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शेयर बाजार को सीखने के लिये निवेश करने के लिये क्या आना चाहिये ?

यह प्रश्न लगभग सभी के जहन में आता है कि शेयर बाजार को कैसे सीखें और कब क्यों कहाँ और कैसे निवेश करना चाहिये?, सब केवल यही समझते हैं कि यह केवल चार्टर्ड एकाऊँटेंट या फिर वही व्यक्ति समझ सकते हैं जो फाइनेंस के बारे में जानते हैं। मेरे अनुसार तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, और मैंने कई लोगों को देखा है जिनकी फाइनेंस के बारे में जानकारी शून्य है और वे बहुत अच्छा खासा शेयर बाजार में निवेश करके बढ़िया पैसा बना रहे हैं।

सबसे पहली बात कि कॉमनसेंस होना चाहिये –

मतलब कि बाजार गिर रहा है या बढ़ रहा है, तो आपको समझ में आना चाहिये अगर बाजार गिर रहा है तो आपको अभी खरीदने से बचना चाहिये, जब अच्छे भाव आ जायें याने कि भाव कम हो जायें किसी भी शेयर के जो आप खरीदना चाहते हैं तो उनको खरीद लें। वैसे ही जब बाजार चढ़ रहा है तो आपको बहुत से शेयर खरीदने से बचना चाहिये क्योंकि थोड़े से भी करेक्शन में शेयर अच्छे खासे टूट सकते हैं, तो आपको अपने टार्गेट के अनुसार शेयर बेच देना चाहिये। Continue reading…

 

म्यूच्यूअल फंड्स पर कैपिटल गेन्स टैक्सेस का प्रभाव

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यूनियन बजट, २०१७ में वित्त मंत्री ने लांग टर्म कैपिटल एसेट के इंडेक्सेशन लाभ के आधार अवधि अर्थात बेस पीरियड को 1 अप्रैल, १९८१ से बढ़ाकर 1 अप्रैल, २००१ कर दिया है जिसके प्रभाव की चर्चा हम आगे इस लेख में करेंगे | इसके अलावा म्यूचुअल फंड योजना के विलयन अर्थात मर्जर को कर मुक्त घोषित कर दिया गया है | इसका मतलब यह है कि पहले दो म्यूच्यूअल फंड्स के योजना, जो की एक ही म्यूच्यूअल फंड योजना के अंदर आते थे, उसके मर्जर/ विलयन को मोचन अर्थात रिडेम्पशन कहा जाता था और इस वजह से म्यूच्यूअल फण्ड निवेशक को अपने पुराने म्यूच्यूअल फण्ड योजना के गेन्स पर कर देना पड़ता था | पर अब वित्त मंत्री ने यह साफ कर दिया है कि इस मर्जर को रिडेम्पशन नहीं कहा जायेगा और किसी प्रकार का कर इस तरह के प्रक्रिया पर नहीं लगेगा | Continue reading…

 

बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना जोखिम में Investment percentage in Fixed and Risky return Instruments

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बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना जोखिम में Investment percentage in Fixed and Risky return Instruments

सभी लोग बचत करते हैं, परंतु सभी को संशय रहता है कि बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना प्रतिशत जोखिम वाले बाजार में लगाना चाहिये। इसे हम कहते हैं एसेट एलोकेशन और सभी के लिये एसेट एलोकेशन अलग अलग होती है, एसेट एलोकेशन निर्भर करता है कि आप किस उम्र से बचत शुरू कर रहे हैं, आपके निवेश करने के लक्ष्य क्या हैं, आप कितना जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं, आप कितनी बचत कर सकते हैं, ऐसे बहुत सी बातें हैं जो एसेट एलोकेशन के लिये जरूरी हैं। Continue reading…

 

अगर 5 लाख रूपये की ब्याज से आय है तो 15H फॉर्म भर सकते हैं ?

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अगर 5 लाख रूपये की ब्याज से आय है तो 15H फॉर्म भर सकते हैं ?

आज ही एक बंदे से मिला तो बातों ही बातों में उसने पूछा कि उसके पिताजी को बैंक के फिक्सड डिपॉजिट के ब्याज से आय लगभग 5 लाख रूपये होती है और वे आयकर की धारा 80 C के तहत 1.50 लाख रूपये निवेश भी करते हैं। पर अभी बैंक फिक्सड डिपॉजिट पर टीडीएस काटता है, और फिर से उनको आयकर भरते समय आयकर विभाग से रिफंड क्लैम करना पड़ता है। Continue reading…

 

ग्यारंटीड लाभ वाले म्यूचयल फंड या यूलिप ज्यादा रिटर्न क्यों नहीं देते ?

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ग्यारंटीड लाभ वाले म्यूचयल फंड या यूलिप ज्यादा रिटर्न क्यों नहीं देते ?

बहुत से म्यूचुयल फंड, यूलिप या किसी और स्कीम में हम लोग सुनते हैं कि आपका पैसा शेयर बाजार में लगायेंगे और आपको अच्छे रिटर्न की ग्यारंटी भी देते हैं। निवेशक भी लालच में आकर इस प्रकार के फंड, यूलिप या स्कीम में पैसा लगा देता है। क्या कभी निवेशक निवेश करने के पहले कभी इस तरह के ग्यारंटीड लाभ वाले म्यूचुयल फंड, यूलिप या स्कीम का कभी कोई अध्ययन करते हैं। जबाब है नहीं, क्योंकि निवेशक को पता ही नहीं होता है कि अध्ययन क्या करना चाहिये। न कभी निवेशक बेचने वालों से सवाल पूछता है कि कैसे वे ग्यारंटीड लाभ देने की बात कर रहे हैं जबकि शेयर बाजार में इतने उतार चढ़ाव होते हैं, जिसमें हर निवेश और निवेशक को जोखिम होता है। Continue reading…

 

बीच में ही अपनी जीवन बीमा पॉलिसी को बंद करना चाहते हैं ?

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बीच में ही अपनी जीवन बीमा पॉलिसी को बंद करना चाहते हैं, तो आपके लिये जानना जरूरी है कि आपको आयकर भरना होगा। वैसे जीवन बीमा पॉलिसी के सरेंडर के समय भुगतान की रकम पर कर के लिये अलग से कुछ बताया नहीं गया है। एक आयकर में बचत के लिये इस बात का जान लेना यहाँ जरूरी है कि जितनी आप वार्षिक प्रीमियम भर रहे हैं उसका कम से कम दस गुना रकम आपको बीमित होना चाहिये। Continue reading…

 

अभी तक शेयर बाजार या म्यूचुयल फंड में निवेश नहीं किया है, तो करिये, देखिये कैसे ?

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अभी तक शेयर बाजार या म्यूचुयल फंड में निवेश नहीं किया है, पर अब मियादी जमा से अपना निवेश निकालकर अब शेयर बाजार या म्यूचुयल फंड में लगाना चाहते हैं, तो आपको बहुत सावधानी की जरूरत तो नहीं परंतु आपको अपना दिल कड़ा करने की जरूर जरूरत है। क्योंकि मियादी जमा याने कि फिक्सड डिपॉजिट में हमेशा ही आपको पता होता है कि कितने वर्षों के बाद आपको कितनी रकम मिलने वाली होती है। पर इक्विटि याने के शेयर बाजार और म्यूचुयल फंड में ऐसा नहीं है, यहाँ हो सकता है कि एक ही वर्ष में आपका निवेश दोगुना हो जाये या फिर आपका निवेश आधा हो जाये। Continue reading…