आयकर में छूट पाने के लिये सही जगह निवेश करें

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

आयकर में छूट पाने के लिये हम जीवन भर निवेश के बारे में योजना बना सकते हैं, पर अगर एक बार आप तैयार हो जायें तो योजना की मनोस्थिती से बाहर आकर निवेश करना शुरू करें। हमेशा योजना की मनोस्थिती में रहना भी ठीक नहीं, कभी न कभी तो योजना पर अमल करना भी जरूरी है, तो जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी निवेश पर अमल करना शुरू करें। हम सभी लोग बहुत मेहनत करके जीवन जीने के लिये पैसा कमाते हैं, पर फिर भी हम ज्यादा आयकर देते हैं। यह हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है कि हम आयकर बचाने के लिये भी अपनी बुद्धिमानी का प्रयोग करें और थोड़ा समय निवेश के लिये भी दें, जिससे हम अपने सपने साकार कर सकें।

हर वर्ष आखिरी समय में हम आयकर बचाने के लिये निवेश के बारे में सोचते हैं और हर वर्ष हम आयकर बचाने के लिये निवेश करते हैं न कि योजना बनाकर निवेश करते हैं, जो कि हमारे हर उद्देश्य को मात देता है और हम थोड़ा सा समय देकर शायद इसी पैसे से अपना कोई लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। आयकर में छुट पाने के लिये निवेश की योजना बनाते समय बहुत सी चीजों का ध्यान रखना पड़ता है जैसे कि उम्र, वित्तीय लक्ष्य, जोखिम लेने की क्षमता और निवेश की अवधि। इसीलिये हम सभी को आयकर में छूट पाने के लिये निवेश की योजना और उस पर अमल वर्ष के शुरू में ही कर देना चाहिये, हाँ थोड़ा समय आपको अपने निवेश के लिये तो देना ही पड़ेगा।

आयकर में छूट

आयकर में छूट

आयकर में छूट पाने के लिये कुछ महत्वपूर्ण चीजें जिन पर निवेश करने के पहले आपको विचार करना चाहिये –

  1. आखिरी समय के निवेश की जल्दबाजी से बचें – इसका सबसे मुख्य कारण है कि हम लापरवाही से सोचते हैं कि अभी तो निवेश के लिये बहुत समय है फिर कर देंगे, और बाद में होता क्या है कि या तो हम आयकर में छूट पाने के लिये निवेश को करना ही भूल जाते हैं या फिर किसी भी गलत जगह केवल आयकर की छूट पाने के लिये निवेश कर देते हैं।
  2. बीमा योजना की खरीदारी – आयकर में छूट पाने के लिये धारा 80 सी के अंतर्गत निवेश करना मतलब कि यूलिप खरीद लो और 80 सी के निवेश के सिरदर्द से छुटकारा पाओ, यही हम हर वर्ष करते हैं और इस प्रकार से हमारे पास 4-5 यूलिप हो जाते हैं, जो कि अलग योजनाओं में हो सकती हैं और उनके नियम व शर्तें भी अलग हो सकती हैं। ज्यादा बीमा पॉलिसी होने के कारण फिर हम हर वर्ष उनकी किश्त भरना भी भूल जाते हैं और जिससे बीमा होने का मतलब भी खत्म हो जाता है। केवल एक टर्म बीमा लेकर जो कि हमारी वार्षिक आमदनी का 12-15 गुना हो, वह लेना चाहिये जो कि सस्ता भी होगा और बीमा का मतलब भी पूर्ण करेगा।
  3. लंबे समय के लिये निवेश करें – हम लोग अपने निवेश करते समय निवेश को बढ़ने के समय नहीं देते हैं हम जैसे ही निवेश करते हैं वैसे ही उम्मीद करने लगते हैं कि निवेश को पंख लग जायें और वो दोगुना या चारगुना हो जाये, फिर भले ही हम किसी भी उम्र के हों, हमारी कितनी ही आमदनी हो या फिर कितनी हो जोखिम लेने की क्षमता हो। अगर भविष्य में भी आप अपने रहन सहन को आप वैसा ही बनाये रखना चाहते हैं जैसा कि अभी है तो आयकर में छूट पाने के लिये करने वाले निवेश में आपको इक्विटी याने कि शेयर बाजार में निवेश करना ही चाहिये, आप शेयर बाजार में निवेश न करने की भूल नहीं करें। अगर आदर्श संयोजन निवेश में नहीं किया जायेगा तो आयकर में छूट पाने के लिये करने वाले निवेश में आपको उतना रिटर्न नहीं मिलेगा, जितना कि आपने सोचा है।
  4. आयकर से बचाने वाले निवेशों को समझिये – आयकर में छूट पाने के लिये निवेश न 80 सी से शुरू होता है और न ही खत्म होता है। आयकर नियमों में आप अपने और अपने अभिभावकों (वरिष्ठ नागरिक) के लिये स्वास्थ्य बीमा की किश्त, इलाज में खर्च, आश्रित विकलांग का बीमा, किसी विशिष्ट योजना के लिये दान, उच्च शिक्षा के लिये ऋण आदि से भी बचत कर सकते हैं। गृह ऋण लेना, राजीव गाँधी इक्विटी बचत योजना में भी निवेश करके आयकर कटने से बचाया जा सकता है।
  5. अपनी तन्खवाह का पुर्नगठन करना – अगर आपको तन्खवाह मिलती है तो वहाँ आप देखेंगे कि बहुत सारे भत्तों का आपने उपयोग ही नहीं किया है, जिससे कि आपकी आयकर योग्य रकम कम हो जायेगी। ये भत्ते होते हैं, मकान किराया भत्ता, परिवहन भत्ता, स्वास्थ्य भत्ता, फूड कूपन्स, पत्र पत्रिकाओं के लिये भत्ता, फोन बिल, वर्दी के लिये भत्ता, वाहन के लिये ईंधन और ठीक करवाने का भत्ता। आप निश्चित कर लें कि सारे बिल समय पर अदा कर दें और अपने आयकर में जाने वाले कर को बचा सकें।
  6. कर संबंधी निवेशों का समय पर ब्यौरा देना – हर महीने हमारा नियोक्ता थोड़ा बहुत टीडीएस या कर काट कर सरकार को जमा करवा देता है, जो कि वर्ष भर के प्रोजेक्शन से निकाली जाती है। अगर हम कर संबंधी निवेशों का सही समय पर ब्यौरा नहीं देते हैं तो यह भी हो सकता है कि हमारे नियोक्ता ने ज्यादा आयकर काटकर जमा करवा दिया फिर आयकर विभाग हमें वह कर वापिस लौटायेगा।

हमारे ऊपर कर का ज्यादा भार न रहे और हम समय से कर की योजना बना पायें, इसके लिये जरूरी है कि हम निवेश की शुरूआत जल्दी करें, जिससे हम अच्छे से निवेश कर पायें और ज्यादा फायदा उठा पायें।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *