भारत में बैंकिंग और बैंकों के प्रकार

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    ब्रिटिश राज में भारत में आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत हुई। १९ वीं शताब्दी के आरंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ३ बैंकों की शुरुआत की – बैंक ओफ़ बंगाल १८०९ में, बैंक ओफ़ बोम्बे १८४० में और बैंक ओफ़ मद्रास १८४३ में। लेकिन बाद में इन तीनों बैंको का विलय एक नये बैंक इंपीरियल बैंक में कर दिया गया जिसे सन १९५५ में स्टेट बैंक ओफ़ इंडिया में विलय कर दिया गया। इलाहबाद बैंक भारत का पहला खुद का बैंक था। रिजर्व बैंक ओफ़ इंडिया सन १९३५ में स्थापित किया गया था और फ़िर बाद में पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ओफ़ इंडिया, केनरा बैंक और इंडियन बैंक स्थापित हुए।

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सन १९६९ में १४ बड़े बैंकों को राष्ट्रीयकृत बैंकों का दर्जा दिया गया। सन १९८० में फ़िर ६ बड़े निजी बैंकों का अधिगृहण भारत सरकार ने किया।
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भारत की वाणिज्यिक बैंकिंग इन श्रेणियों में रख सकते हैं।

१. केंन्द्रीय बैंक –

रिजर्व बैंक ओफ़ इंडिया भारत की केंन्द्रीय बैंक है जो कि भारत सरकार के अधीन है। इसे केन्द्रीय मंडल के द्वारा शासित किया जाता है, जिसे एक गवर्नर नियंत्रित करता है जिसे केन्द्र सरकार नियुक्त करती है। यह देश के भीतर की सभी बैंकों को संचालन के लिए दिशा निर्देश जारी करती है।
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२.सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंक –

– भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों को स्टेट बैंक समूह बुलाया जाता है।
– 20 राष्ट्रीयकृत बैंक
– क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक जो कि मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा प्रायोजित हैं\
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३. निजी क्षेत्र के बैंक

– पुरानीपीढ़ीकेनिजीबैंक
– नईपीढ़ीकेनिजीबैंक
– भारतमेंसक्रियविदेशीबैंक
– अनुसूचितसहकारीबैंक
– गैरअनुसूचितबैंक
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४. सहकारी क्षेत्र –

सहकारी क्षेत्र की बैंकें ग्रामीण लोगों के लिए बहुत अधिक उपयोगी है. इस सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित कर सकत हैं –
1. राज्यसहकारीबैंक
2. केन्द्रीयसहकारीबैंक
3. प्राथमिककृषिऋणसोसायटी
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५. विकास बैंकें / वित्तीय संस्थाऐं

* आईएफसीआई
* आईडीबीआई
* आईसीआईसीआई
* IIBI
* SCICI लिमिटेड
* नाबार्ड
*-निर्यातआयातबैंकऑफइंडिया
* राष्ट्रीयआवासबैंक
* लघुउद्योगविकासबैंकऑफइंडिया
* पूर्वोत्तरविकासवित्तनिगम
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