भारतीय बीमा बाजार में साधारण बीमा

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

1999 के भारतीय बीमा विनायामक एवं विकास कानून जो कि 10 अप्रैल 2000 से लागू हुआ, इससे भारतीय बीमा बाजार में बीमा के क्षैत्र में आमूलचूल बदलाव हुए। हालांकि भारतीय बाजार कई व्यावसायिक क्षैत्रों में निजी एवं विदेशी कंपनियों के लिये बहुत पहले 1991 में ही खोल दिये गये थे। बीमा क्षैत्र उस समय इस बदलाव से दूर ही रहे। फिर भी बीमा क्षैत्र में एक नये युग का शुरूआत तब हुई जब भाबीविवि (IRDA) ने निजी बीमा क्षैत्र की कंपनियों को वर्ष 2000 के अंत में लाईसेंस देने की प्रक्रिया शुरू की। बीमा क्षैत्र निजी कंपनियों के लिये खोलने के पहले तक भारत सरकार की दो कंपनियों का ही भारतीय बाजार पर वर्चस्व था – जीवन बीमा (भारतीय जीवन बीमा निगम LIC of India) एवं साधारण बीमा (भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India)।

भारतीय बीमा बाजार

अपने निजी क्षैत्रों के प्रवेश के बाद 16वें वर्ष में चल रहा है। निजी क्षैत्रों की बीमा कंपनियों को भारतीय बाजार में लाने का मुख्य उद्देश्य बीमा के प्रति जागरूकता, समझ और निवेश बढ़ाना था। आजकल, बीमा क्षैत्र भारत के वित्तीय बाजार में बहुत तेजी से उभर कर आया है। भारत में 53 बीमा कंपनियों में 24 जीवन बीमा व्यवसाय में और 28 साधारण बीमा व्यवसाय में हैं। एक सोल रि-इन्श्योरर जो कि सभी 53 बीमा कंपनियों के लिये है वह है भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India)। इन 53 कंपनियों में 8 सार्वजनिक क्षैत्र और बाकी की 45 कंपनियाँ निजी क्षैत्र की हैं। भारतीय बीमा बाजार के निजीकरण से बीमा उत्पादों में उत्तरोत्तर प्रगति, बीमा क्षैत्र में फैलाव और आबादी के हिसाब से बीमा का घनत्व बड़ रहा है, जिससे बीमा व्यापार की कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिल रही है।

भारतीय बीमा बाजार में साधारण बीमा क्षैत्र में माँग-आपूर्ती –

जीवन बीमा के अलावा कुछ और बीमित करना साधारण बीमा कहलाता है, साधारण बीमा इस प्रकार से होते हैं –

संपत्ति बीमा – इस बीमा में संपत्ति को कोई भी नुक्सान किसी अप्रत्याशित घटना से हो, बीमित होता है, जैसे कि आग लगना, भूकंप, बाढ़ इत्यादि।

परिवहन बीमा – इस बीमा में सामान का बीमा जो समुद्री, हवा या सड़क मार्ग से परिवहन हो रहा हो, बीमित होता है।

वाहन बीमा – इस बीमा में वाहन को नुक्सान या क्षति की दशा में और साथ ही अन्य पक्ष को नुक्सान की देयता होती है जो कि वाहन के उपयोग से किसी भी समय आ सकती है।

उत्तरदायित्व बीमा – इस बीमा को कंपनियों द्वारा करवाया जाता है, जो कि खासकर कंपनी के व्यापार से संबंधित होता है साथ ही इसी बीमा में कानूनी दायित्व, काम करने वाले मजदूरों का बीमा भी होता है।

साधारण बीमा

साधारण बीमा

दुर्घटना एवं स्वास्थ्य बीमा – स्वास्थ्य बीमा व्यक्तियों द्वारा अपने लिये या परिवार के लिये लिया जाता है, जिससे बीमार होने के दशा में होने वाले खर्च के जोखिम को उठाता है। कंपनियाँ भी अपने कर्मचारियों के लिये स्वास्थ्य बीमा लेती हैं। दुर्घटना बीमा में व्यक्ति को दुर्घटना होने की दशा में हर अंग का बीमा होता है और दुर्घटना से हुई मृत्यु का बीमा भी इस बीमा में होता है।

साधारण बीमा का आर्थिक रूप से अगर ब्यौरा देखा जाये तो हमारे सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.7 प्रतिशत है। बीमा बाजार में अभी विकास की बहुत संभावनाये हैं, क्योंकि साधारण बीमा हमारे आबादी के घनत्व के हिसाब से बहुत कम लोगों द्वारा लिया जाता है। साधारण बीमा का बीमाशुल्क पिछले 13 वर्षों में 13.8 प्रतिशत तक बड़ा है। 13 वर्ष पहले 436 लाख पॉलिसी बिकी थीं वहीं अब इनकी संख्या 1260 लाख पॉलिसी हैं। पॉलिसी की बिक्री का औसत हर वर्ष 9.2 प्रतिशत बढ़ोत्तरी लिये रहा है। एक रपट के मुताबिक कुल बीमा में वाहन बीमा का हिस्सा 39.41 प्रतिशत और स्वास्थ्य बीमा का हिस्सा 27.75 प्रतिशत रहा है।

साधारण बीमा में सार्वजनिक क्षैत्रों की कंपनियों ने 57.2 प्रतिशत की हिस्सेदारी की है, जिसमें केवल न्यू इंडिया बीमा कंपनी का 19 प्रतिशत हिस्सा है।

भारत में साधारण बीमा क्षैत्र में बदलाव

1973 – साधारण बीमा व्यापार को 1 जनवरी 1973 को राष्ट्रीयकृत किया गया। लगभग 107 कंपनियों को 4 बड़ी कंपनयों में विलय कर दिया गया जो कि नेशनल इन्शोयरेंस कंपनी, न्यू इंडिया इन्श्योरेन्स कंपनी, ओरियेंटल इन्श्योरेन्स और यूनाईटेड इन्श्योरेन्स कंपनी हैं, भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India वर्ष 1971 में गठित किया गया था और अपने बीमा व्यवसाय की शुरूआत उपरोक्त चार सहायक कंपनियों के साथ 1 जनवरी 1973 से की।

2000 – दिसंबर 2000 में भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India की सहायक कंपनियों का पुनर्गठन किया गया और सबको स्वतंत्र कंपनियाँ बना दिया गया। भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India को राष्ट्रीय रिइन्श्योरर में बदल दिया गया। भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India अपनी सहायक कंपनियों के प्रति पर्यवक्षकीय कार्य से भी मुक्त हुआ।

2002 – संसद ने जुलाई 2002 में बिल पास कर भारतीय साधारण बीमा निगम General Insurance Corporation of India की चारों सहायक कंपनियों का स्वामित्व अधिकार भारत सरकार को दे दिया।

2005 – संसद में बिल पास किया गया, जिसके तहत 49 प्रतिशत विदेशी निवेशक निवेश कर सकें और 26 प्रतिशत के निवेश होने पर विदेशी निवेशक प्रमोशन बोर्ड सम्मति लेना होती है।

2012 – IRDA ने साधारण बीमा करने वाली कंपिनयों को IPO शेयर इश्यू करने के लिये कुछ नये नियम लागू किये, जहाँ बीमा करने वाली कंपनी की वित्तीय स्थिति, उनका वित्तीय ढाँचा और नियामकों के रिकार्ड कुछ चुने हुए मापदंडों के तहत देखे जायेंगे।

2016 – 49 प्रतिशत तक के विदेशी निवेश को सीधे छूट दे दी गई।

वर्ष 2000, जबसे साधारण बीमा व्यापार आया है, तब से इस व्यापार ने परिचालन संबंधित संतोषजनक एवं ठोस बदलाव देखे हैं। इसके लिये नियामक के नये नियमों में जो बदलाव किया गये हैं, भी एक महत्वपूर्ण कारण है। वर्ष 2015 में बीमा बिल को पास किया गया था जिससे विदेशी निवेशक बीमा क्षैत्र में 26 की बजाय 49 प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं, इससे देश के निजी बीमा क्षैत्र में क्रांति ही आ गई है। इस बीमा बिल से सार्वजनिक क्षैत्र की चारों कंपनियों को बाजार से पूँजी उगाहने की अनुमति भी मिल गई है। इससे सरकारी हिस्सा 100 प्रतिशत से 51 प्रतिशत तक हो जायेगा। अभी बीमा कंपनियों में सरकारी हिस्सा 100 प्रतिशत है। बीमा कंपनियाँ 49 प्रतिशत हिस्सा बेचकर अपने व्यापार को बड़ा सकती हैं और बाजार की प्रतिस्पर्धा में खड़ी रह सकती हैं। 2016-17 के बजट में सार्वजनिक क्षैत्र की बीमा कंपनियाँ बाजार में लिस्ट होकर पैसा उगाह सकती हैं। भविष्य में सार्वजिनक कंपनियों में जब जनता की होल्डिंग भी होगी तो अधिक पारदर्शिता और उत्तरादायित्व सरकार पर होगा।

भारत सरकार ने दो नई बीमा योजनाएँ बाजार में उतारी हैं जिनकी 2015-16 यूनियन बजट में घोषणा की गई थी। पहली है प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY), जो कि निजी दुर्घटना बीमा योजना है। यह योजना सभी सार्वजनिक क्षैत्र की बीमा कंपनियों द्वारा दी जा रही है, और कोई बीमा कंपनी अगर इस योजना को लागू करना चाहती है तो वे बैंक के साथ समझौता करके योजना को बाजार में उतार सकते हैं। दूसरी बीमा योजना है प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY), यह एक सरकारी जीवन बीमा योजना है। दोनों योजनाएँ जनता को कम से कम दाम में बुनियादी बीमा सुविधाएँ देती हैं और बहुत ही आसानी से इन योजनाओं को विभिन्न सरकारी संस्थाओं और निजी क्षैत्र की संस्थाओं से लिया जा सकता है।

IRDA ने 12 जुलाई 2016 को स्वास्थ्य बीमा नियम 2016 पेश किया और यह नियम स्वास्थ्य बीमा नियम 2013 को बदल देगा। स्वास्थ्य बीमा नियम 2016 में नई अवधारणा को पायलट प्रोडक्ट को पेश किया गया है। जिसमें उत्पाद को बनाते समय उन सभी प्रकार के जोखिमों को भी बाजार में उतारा जायेगा, जो बाजार में अभी तक उपलब्ध ही नहीं हैं। पायलट प्रोडक्ट जो कि साधारण बीमा और स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा बाजार में उतारे जाने हैं, उनकी समयावधि एक वर्ष से अधिकतम पाँच वर्ष तक की होगी। सामूहिक रूप में ऋण से संबंद्ध स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को भी लाया जायेगा और इन नये नियमों में समयावधी बढ़ाकर अधिकतम पाँच वर्ष कर दी गई है। यह योजना साधारण एवं स्वास्थ्य बीमा कंपनियों द्वारा बाजार में लाई जायेगी। अभी तक जीवन बीमा कंपनियाँ बैंकों से गृह ऋण लेने पर जीवन बीमा दे ही रही थीं, अगर ऋणी की मृत्यु ऋण चुकाने के पहले हो जाती है तो जीवन बीमा बैंक को ऋण की रकम चुका देते हैं। इसी तरह से स्वास्थ्य संबंधी बीमा योजनाएँ कार्य करेंगी अगर ऋणी बीमार पड़ जाता है और ऋण नहीं चुका पा रहा है तो स्वास्थ्य बीमा कंपनियाँ बैंक को ऋण का पैसा देंगी।

नियामक के ढ़ाँचे में सुधार से स्वास्थ्य बीमा उत्पादों को बीमा कंपनियों द्वारा और ज्यादा जबाबदेह बनाया जाये और उत्पाद प्रबंधन समिती सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बीमा बाजार में उतारें उससे पहले देख लें कि उत्पाद नियामक और कानूनों के मानदंडों पर खरे उतर रहे हों। इन सबके होने से नये तरह के उत्पादों की खोज होगी और नये इन्नोवेटिव उत्पाद बाजार में आयेंगे।

जुलाई 2016 में जनरल इंश्योरेन्स काऊन्सिल ऑफ इंडिया नें जितने भी क्लेम धोखाधड़ी से हुए हैं उनका एक डाटाबैंक बनाने की पहल की है। साथ ही कंपनियों के आपसी भुगतान को जो कि रूके हुए हैं उनके लिये क्लियरिंग हाऊस बनाने की पहल की है, एवं सभी कंपनियों की कमर्शियल बीमा पॉलिसी की पॉलिसी वर्डिंग को एक मानकीकरण पर लाया जायेगा। काऊँसिल ने सॉफ्टवेयर बनाने के लिये बाजार से कंपनियों को आऊटसोर्स किया है जो कि सभी कंपनियों की पॉलिसी वर्डिंग को डिजिटाईज करने की प्रक्रिया में सहयोग करेगी। IRDA ने जून 2016 में दो कमेटियों का गठन किया जिनका मूल कार्य था ई-कॉमर्स को प्रमोट करना, जिससे बीमा का व्यापार और पहुँच को ओर बढ़ाया जा सके और इसमें फाईनेंशियल इन्कलूसन को भी लाया जा सके। इसमें कुछ महत्वपूर्ण बातों को शामिल किया गया है –

बीमा का खुद का एक सेल्फ नेटवर्क प्लेटफॉर्म जो कि तकनीक रूप से उन्नत हो।

बीमा का सेल्फ नेटवर्क प्लेटफॉर्म बीमा कंपनियों की ई-कॉमर्स गतिविधियों पर नजर रखेगी, जैसे कि बीमा बेचना और बीमा उत्पादों पर दी जाने वाली सेवायें।

साधारण बीमा क्षैत्र में भविष्य का बीमा बाजार –

भविष्य में जैसे जैसे गाड़ियों में नयी डिवाइस आ रही हैं जो कि गाड़ियों पर नजर रखेंगी कि किस तरस से चलाया जा रहा है मतलब कि ड्राईविंग पैटर्न और गाड़ी की स्थिती कैसी है। इसे टैलीमैटिक्स कहा जाता है। टैलीमैटिक्स से कार के चलाने को समझा जाता है, किस रफ्तार से कार चलाई जाती है कितनी देर में दूरियाँ तय की जाती है, कितने दिनों में कितने किमी कार चलाई जा रही है। इन सब डाटा के ऊपर बीमा कंपनियाँ बीमित कार और व्यक्ति की जोखिम देखकर बीमा का प्रीमियम निर्धारित करेंगी। ड्राईविंग पैटर्न पर को भी ऑनलाईन देखा जा सकेगा जो कि कार मालिक और कार ड्राईवर दोनों ही देख सकेंगे, बीमा कंपनियाँ इस पर भी अपना जोखिम निर्धारित कर सकेंगी।

आगे आने वाले वर्षों में बीमा कंपनियाँ नये प्रकार के उत्पाद बाजार में उतारेंगी, जिसमें कुछ अनूठी चीजें भी दिखाई देंगी। जैसे कि न्यू इंडिया एश्योरेन्स कंपनी ने अभी एक बीमा बाजार में उतारा है ग्रामीण बीमा पैकेज जिसमें किसान के घर, चल एवं अचल संपत्ति, मवेशी आदि को बीमा में लाया गया है। वहीं यूनाईटेड इन्श्योरेन्स कंपनी ने वर्कमैन मेडिकेयर पॉलिसी लाई है जिसमें नौकरी के दौरान दुर्घटना होने से अस्पतान में भर्ती और इलाज का खर्चा कवर किया गया है। सारी बीमा कंपनियाँ इसी तरह के कम प्रीमियम वाले नये बीमा उत्पाद बाजार में उतार रहे हैं, जिससे ज्यादा से ज्याद भारत की जनता बीमा का लाभ उठा सके। बीमा कंपनियाँ अपना सारा कार्य डिजिटल कर रही हैं जिससे बीमा कंपनी की लागत कम हो जायेगी और इससे 15-20 प्रतिशत तक जीवन बीमा में और 20-30 प्रतिशत तक साधारण बीमा में कीमत कम होने के आसार हैं।

भारत में बीमा रिनीवल की संख्या बढ़ रही है, नये बीमा बाजार में लगभग रोज ही आ रहे हैं और भारतीय जनता बीमा का लाभ उठा रहा है। हमारी सार्वाधिक संख्या गाँव और कस्बों में है, हमारे यहाँ केवल मानवीय जीवन ही महत्वपूर्ण नहीं वरन हमसे जुड़े और जीवन जैसे कि पशु पक्षी भी हमारे लिये बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो कि हमारी संवेदनाओं को छू जाते हैं। भारत का बीमा बाजार तेजी से बढ़ रहा है और भारत के बीमा बाजार में अपार संभावनाओं के कारण ही विश्व की सारी बीमा कंपनियाँ भारतीय बाजार की और नजर गड़ाये बैठी हैं।

One thought on “भारतीय बीमा बाजार में साधारण बीमा

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *