5 चीजें जो आपके रेंट एग्रीमेंट में जरूर होनी चाहिये

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बहुत सारे लोग अपना गृहनगर छोड़कर दूसरे शहरों में पढ़ने, काम करने, व्यापार करने या फिर अच्छी जीवनशैली के लिये जाते हैं। नये शहर में जाकर उनके लिये सबसे पहला काम होता है कि रहने की जगह ढ़ूँढ़ना। क्योंकि यह नामुमकिन होता है कि वे नये शहर में जाने से पहले अपना घर खरीद लें, अगर बड़े शहरों में जा रहे हैं तो आजकल सभी लोग फ्लेट ही किराये पर लेना चाहते हैं, परंतु किराये पर घर लेने से पहले अच्छा यह है कि क्या नियम और कानून याने कि टर्मेस एँड कंडीशन्स हैं, जान लेना चाहिये।

रेंट एग्रीमेंट आपके और मकानमालिक के बीच एक कानूनी दस्तावेज है, इसलिये जब भी रेंट एग्रीमेंट करें, अपनी आँख और कान खुले रखें, कोई नियम या कानून समझ नहीं आ रहा है तो मकानमालिक से समझने की कोशिश करें और तब भी संशय हो तो किसी वकील की मदद से समझने की कोशिश कर सकते हैं। यहाँ हम उन जरूरी ५ क्लॉज के बारे में बात कर रहे हैं, जो कि आपको रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) में ध्यान से देखना चाहिये और ये क्लॉज आपके रेंट एग्रीमेंट में जरूर होने चाहिये

. किराये की राशि, जमानत राशि या अन्य भुगतान

रेंट एग्रीमेंट में साफ साफ किराये की राशि लिखी हो व रेंट एग्रीमेंट खत्म होने तक हर महीने की किस तारीख को किराया देना है और किस तारीख तक ही किराया दे सकते हैं, और अगर कोई लेट फीस है तो वह भी एग्रीमेंट में लिखी होनी चाहिये।

अधिकतर २ महीने के किराये के बराबर राशि की जमानत राशि ली जाती है, परंतु मुँबई और बैंगलोर जैसे शहरों में मकानमालिक १० महीने के किराये के बराबर की जमानत राशि लेते हैं, इस बारें में अभी तक सरकार का कोई कानून या नियम नहीं आया है। जमानत राशि रेंट एग्रीमेंट में लिखी हो और रेंट एग्रीमेंट में यह भी साफ लिखा हो कि यह राशि कब लौटा दी जायेगी।

बिजली, पानी, गैस के बिल अगर किराये के अतिरिक्त है तो यह भी रेंट एग्रीमेंट में साफ साफ लिखा होना चाहिये, अगर बिजली का कनेक्शन अलग है या सबमीटर है तो बिजली की कीमत कैसे निकाली जायेगी।

. एग्रीमेंट का समय और नवीनीकरण की शर्तें

साधारणतया: रेंट एग्रीमेंट ११ महीने के होते हैं, पर यह ज्यादा समय के भी हो सकते हैं, परंतु सुनिश्चित कर लें कि एग्रीमेंट की समय सीमा साफ साफ लिखी हो

साथ ही लॉक इन पीरियड, जिसमें कि न तो किरायेदार घर छोड़ सकता है और न ही मकानमालिक घर से जाने को कह सकता है, सुनिश्चित कर लें कि यह भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा हो व यह भी लिखा हो कि अगर लॉकइन अवधि के दौरान अगर किसी के भई द्वारा एग्रीमेंट खत्म करना हुआ तो इसके लिये क्या क्या करना होगा। साधारणतया: अगर किरायेदार ल़ॉकइन अवधि के दौरान घर छोड़ता है तो मकानमालिक के द्वारा उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है और अगर मकानमालिक लॉकइन अवधि के दौरान घर छोड़ने को कहता है तो मकानमालिक को किरायेदार को जमानत राशि के बराबर की राशि, जमानत राशि सहित देना होता है।

ध्यान रखिये कि लॉकइन अवधि नोटिस अवधि से अलग होती है, नोटिस अवधि समान्यत: एक या दो महीने होती है, अगर यह अवधि दो महीने की है तो आपको घर खाली करने के पहले मकानमालिक को दो महीने के नोटिस देना होगा। ध्यान रखें कि नोटिस अवधि लॉकइन अवधि में वैध नहीं है।

कब और कैसे रेंट एग्रीमेंट का नवीनीकरण होगा, नवीनीकरण होगा या नहीं, कितना किराया बढ़ेगा, किराये का आपसी सहमति से कम किया जा सकता है या नहीं इत्यादि भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा होना चाहिये। जैसे कि मुँबई में ब्रोकर ही रेंट एग्रीमेंट करवाते हैं और वे नवीनीकरण पर कितना ब्रोकरेज लेंगे, ब्रोकरेज कौन देगा, यह सब बातें भी रेंट एग्रीमेंट में ब्रोकर लिख देते हैं, तो इन शर्तों को ध्यान से पढ़ लें।

३. फिटिंग और समान की सूचि

रेंट एग्रीमेंट में आप जिस फ्लेट को किराये पर ले रहे हैं, उसका नंबर भी होना चाहिये, कौन से फ्लोर पर है यह भी लिखा हो। घर का एरिया कितना है, कितने कमरे हैं, बाथरूम, लिविंग एरिया, किचन इत्यादि। अगर आपने फर्निश्ड घर लिया है तो उसके समान की सूचि जैसे कि सोफा, बिस्तर, कुर्सियाँ, अलमारियाँ, मेज, पंखे, बल्ब, गीजर, ट्यूबलाईट, एयर कंडीशनर इत्यादि। हो सके तो फोटो खींचकर मकानमालिक और ब्रोकर के साथ शेयर कर दें, जिससे जब आप मकान खाली करें तो मकानमालिक की आपत्तियों का निराकरण किया जा सके।

४. रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन

हमें रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन करना चाहिये। अगर रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं है तो कोर्ट के द्वारा एग्रीमेंट को प्राथमिक दस्तावेज नहीं माना जायेगा और जो भी डिस्प्युट है उसको साबित करने के लिये आपको अपने सबूत देने होंगे।

रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर करने के लिये आपको स्टॉम्प डयूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देय होते हैं। ये शुल्क किरायेदार और मकानमालिक दोनों आधा आधा वहन करते हैं, और यह भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा होता है। साथ में यह भी लिखा होना चाहिये कि लीगल फीस कौन देगा, ब्रोकरेज कौन देगा, इत्यादि।

५. प्रतिबंध

बहुत सारे मकानमालिक किरायेदार को जानवर पालने की इजाजत नहीं देते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट के पहले ही मकानमालिक से यह पूछ लेना चाहिये, और भी ऐसी बहुत सारी बातें हो कि माँसांहार नहीं करना चाहिये, शराब का सेवन नहीं करना चाहिये, सोसायटी में उपलब्ध अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं या नहीं, पार्किंग उपलब्ध है या नहीं, बगीचे और छत का उपयोग कर सकते हैं या नहीं।

रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) की ओरिजनल प्रति मकानमालिक रखते हैं, पर ध्यान रखें कि एक प्रति आपके पास भी हो।

 

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