बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना जोखिम में Investment percentage in Fixed and Risky return Instruments

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बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना जोखिम में Investment percentage in Fixed and Risky return Instruments

सभी लोग बचत करते हैं, परंतु सभी को संशय रहता है कि बचत का कितना प्रतिशत फिक्स रिटर्न में और कितना प्रतिशत जोखिम वाले बाजार में लगाना चाहिये। इसे हम कहते हैं एसेट एलोकेशन और सभी के लिये एसेट एलोकेशन अलग अलग होती है, एसेट एलोकेशन निर्भर करता है कि आप किस उम्र से बचत शुरू कर रहे हैं, आपके निवेश करने के लक्ष्य क्या हैं, आप कितना जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं, आप कितनी बचत कर सकते हैं, ऐसे बहुत सी बातें हैं जो एसेट एलोकेशन के लिये जरूरी हैं।

एसेट एलोकेशन में मुख्य रूप से 4 चीजें होती हैं –

  1. इक्विटी, म्यूचुयल फंड
  2. फिक्स डिपॉजिट
  3. सोना, चाँदी (बहुमूल्य धातु)
  4. घर, दुकान

यहाँ यह जानना जरूरी है कि अगर निवेश अपने बचत के शुरूआती दिनों से ही कर रहे हैं, याने कि नौकरी लगने के तुरंत बाद ही तो आपका अधिकतम निवेश इक्विटी में होना चाहिये, याने कि 90 प्रतिशत तक और केवल 10 प्रतिशत फिक्स डिपॉजिट या बहुमूल्य धातु में होना चाहिये। निवेश में अनुशासन रहना चाहिये याने कि ऐसा न हो कि जिस महीने आपकी इच्छा हुई, उस महीने निवेश किया और बाकी के महीनों में आपका पैसा आपके बचत खाते में ही पड़ा रहे।

लक्ष्य – निवेश के प्रकार लक्ष्य पर पूर्णतया निर्भर करते हैं, इसलिये सबसे पहले अपने लक्ष्यों को निर्धारित करें, भले ही आप अपने लक्ष्यों को साफ साफ नहीं जानते हों कि कितनी रकम उस समय चाहिये, परंतु लक्ष्यों को ध्यान में रखकर निवेश की रणनीति बनाना हमेशा ही उचित है।

निवेश की गणना की शुरूआत के लिये साधारणतया हम औसतन उम्र 100 वर्ष मानते हैं और 35 वर्ष तक की उम्र तक निवेश का लगभग 90 प्रतिशत भाग इक्विटी में होना चाहिये क्योंकि इस उम्र तक निवेशक जोखिम ले सकता है, और 35 वर्ष के बाद धीरे धीरे अपने निवेश को इक्विटी से घटाकर अन्य एसेट क्लॉस में लगाना चाहिये, याने कि फिक्स डिपॉजिट या डेब्ट म्यूचुयल फंड जहाँ कि बहुत ज्यादा जोखिम नहीं होता है।

35 वर्ष तक की उम्र तक 90 प्रतिशत जोखिम वाले उत्पादों में निवेश करना चाहिये और उसके बाद 100 में से अपनी उम्र घटाकर उतने प्रतिशत का निवेश इक्विटी में करना चाहिये और बाकी का निवेश बिना जोखिम वाले वित्तीय उत्पादों में करना चाहिये। जब आप अपनी सेवानिवृत्ति के करीब हों तो अपने निवेश का 70 प्रतिशत तक बिना जोखिम वाले उत्पादों में निवेश करें और 30 प्रतिशत तक का निवेश जोखिम वाले उत्पादों में करें।

निवेश किसी भी प्रकार का हो, आप निवेश में नियमित रहें, चाहे आप म्यूचुयल फंड खरीद रहे हों या फिर इक्विटी या फिर फिक्स डिपॉजिट। निवेश के लिये अगर आपको लगता है कि आप हर माह ध्यान नहीं रख पायेंगे तो अपने हर निवेश को बैंक के खाते से शेड्यूल कर दें, जैसे कि एस.आई.पी. या रिकरिंग डिपॉजिट। हाँ अगर शेयर बाजार याने कि इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं तो आपको खुद ही ध्यान रखकर अपने विश्लेषण किये गये शेयरों में निवेश करना चाहिये। जब भी आप निवेश को शेड्यूल करते हैं तो उन दिनाँकों को ध्यान रखें कि आपके बैंक खाते में रकम जरूर हो, नहीं तो आपके लिये उस माह का निवेश कम हो जायेगा।

वर्ष में कम से कम 3 माह में एक बार अपने निवेश को जरूर ध्यान से देख लेना चाहिये, और अगर लंबे समय से कोई वित्तीय उत्पाद अच्छा नहीं कर रहा है, तो आप अपने निवेश को वहाँ से निकालकर किसी और उत्पाद या स्कीम में लगायें।

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