बिटक्वाईन के बारे में जानें बुनियादी बातें Basic Information of Bitcoin Cryptocurrency

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बिटक्वाईन के बारे में जानें बुनियादी बातें

Basic Information of Bitcoin Cryptocurrency

यह देखकर बहुत डर लगता है जब हमारे दोस्त और परिचित जो कि म्यूचुअल फंड (Mutual fund) में निवेश करने से तो डरते हैं, कम से कम 10 बार सोचते हैं, परंतु बिटक्वाईन (Bitcoin) में निवेश करने का निर्णय एक सेकंड में ले लेते हैं। अधिकतर लोग जो कि बिटक्वाईन (Bitcoin) में निवेश कर रहे हैं वे दरअसल क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) के बारे में कुछ जानते ही नहीं हैं, और न ही इसकी बारीकियों को समझते हैं। बिटक्वाईन के बारे में न जानते हुए भी, बिटक्वाईन में निवेश करने का निर्णय लेने के पीछे मुख्य कारक है उसके भाव बहुत तेजी से बढ़ना, लगभग हर सप्ताह ही बिटक्वाईन के भाव अपनी नई ऊँचाईयों पर पहुँच रहे हैं, हाल ही में 10,000 डॉलर से ज्यादा का एक बिटक्वाईन हो चुका है। जैसा कि हम जानते हैं कि बिटक्वाईन बनाने में एन्क्रिपशन तकनीक (Encryption Technology) का उपयोग किया जाता है। अगर आप बिटक्वाईन के बारे में प्रचलित शब्दों के बारे में जानना चाहते हैं, तो हम यहाँ अब बिटक्वाईन के तकनीकी शब्दों और बिटक्वाईन की तकनीक में क्या होता है, इसके बारे में बात करेंगे। जिससे कि आपको बिटक्वाईन के बारे बुनियादी जानकारी मिल जायेगी।

ब्लॉक Block –

एक बार बिटक्वाईन बन गया तो इसे एक पब्लिक लेजर (Public Ledger) में जोड़ दिया जाता है। रिकार्ड को समूह में करके ब्लॉक में संचय कर लिया जाता है। हर ब्लॉक का अपना टाईम स्टाम्प (Time Stamp) (बिटक्वाईन बनाने का समय) होता है और यह ब्लॉक अपने से पहले वाले ब्लॉक से श्रंखलाबद्ध होता है, यानि कि जुड़ा होता है। इन ब्लॉकों को एक साथ श्रंखला में रखा जाता है, मतलब कि ब्लॉकों की चैन बन जाती है, इसलिये ये ब्लॉकचैन (Blockchain) के नाम से प्रसिद्ध हैं। ब्लॉक को बनाने को तकनीकी तौर पर माइनिंग (Mining) कहते हैं, और माइनिंग हमेशा ही एक क्रम में की जाती है और एक बार रिकार्ड हो गया तो डाटा को किसी भी हालत में बदला नहीं जा सकता है। एक पूरे ट्रांजेक्शन को मुख्य चैन याने कि श्रंखला में पाया जा सकता है। हर ब्लॉक अपनी चैन में पहले ब्लॉक से जुड़ा होता है, और वो पहले वाला ब्लॉक उसके पहले वाले ब्लॉक से जुड़ा होता है, इस तरह से हम ब्लॉकों को देखकर सबसे पहले वाले ब्लॉक को भी देख सकते हैं, जो कि Genesis Block जेनिसिस ब्लॉक भी कहलाता है। हालांकि कुछ ब्लॉक ऐसे भी हैं जो कि मुख्य चैन का हिस्सा नहीं हैं, वे कहलाते हैं डिटैच्ड detached या ऑर्फन्ड orphaned Blocks ब्लॉक्स। यह तब होता है जब एक ही समय में एक से ज्यादा माईनर ब्लॉक (Miner block) बनाते हैं, या फिर अटैकर्स Attackers किसी ट्रांजेक्शन को वापिस (Reverse Transaction) करने का प्रयत्न करते हैं।

जब एक एक ब्लॉक को अलग अलग से एकसाथ प्रमाणित कर लिया जाता है, तो एलगोरिद्म (Algorithm) मुख्य चैन को बनाये रखने में मदद करती है और अधिक मूल्य वाला ब्लॉक अपने आप चुन लिया जाता है। वैसे सरल शब्दों में कहा जाये तो ब्लॉकचैन हमारा परंपरागत बहीखाता जैसा ही है। परंपरागत तरीके से हम बहीखाते में एक लाईन लिखते हैं और वह लाईन दरअलस एक ट्रांजेक्शन होती है। एक बार पेज भर जाता है तो अगले पेज पर जाने के लिये आपको पेज पलटना होता है, परंतु तब क्या होगा जबकि कोई बीच में से बहीखाते को पेज ही फाड़ दे? आपको कैसे पता चलेगा? एक तरीका है कि पेज नंबर से पता चले, अगर कोई पेज नंबर भी मिटा दे तब? इसलिये हमारे बहीखाते में मुनीम लोग हमेशा ही पेज का कुल शेष नीचे लिख देते थे और अगले पेज पर उसी शेष से शुरुआत करते। किसी भी समय, आपको हमेशा ही सबसे पहले पहली एन्ट्री याने कि शेष ही देखना होगा, जो कि पिछले पेज का कुल शेष होता है। इसी प्रकार ब्लॉकचैन काम करता है। ब्लॉक को हम बहीखाते का एक पेज/पृष्ठ मान सकते हैं। आप ब्लॉक को ट्रांजेक्शनों का समूह मान सकते हैं।

हैश Hash –

जब हम ब्लॉकचैन की बता करते हैं तो एक और टर्म आती है हैश (Hash)। हैश  (Hash) बिटक्वाईन की दुनिया में क्या होता है? हैश  (Hash) बिटक्वाईन माइनिंग में एक अविभाज्य तकनीक है, जिससे कि बिटक्वाईन बनते हैं। एक हैश  (Hash), हैश एलगोरिद्म से आता है, जो कि एक बहुत बड़े डाटा के फिक्सड समूह से बनता है, संक्षिप्त में एक फिक्स सैट के नंबर में लिख दिया जाता है। साधारणतया: ये नंबर हेक्साडेसिमल (Hexadecimal) में लिखे जाते हैं। आप इसको इस तरह भी देख सकते हैं कि यह एक टेक्सट या डाटा फाईल है जिसका साईज हमेशा ही अलग अलग होता है और यह हस्ताक्षर होता है। यह इस प्रकार से लिखा जाता है कि इसको कभी भी डिक्रिप्ट (Decrypt) नहीं किया जा सकता है। सरल शब्दों में कहा जाये तो बुक लेजर में ब्लॉक ट्रांजेक्शनों का समूह होता है, और यहाँ उसके पेज पर नीचे एक एन्ट्री होगी और अगले पेज पर सबसे ऊपर भी वही एन्ट्री होगी। पिछले पेज का शेष, अगले पेज की शुरुआत होती है। तकनीकी तौर पर दो तरह के हैश होते हैं – अनडाईरेक्शनल (unidirectional) और बाईडाईरेक्शनल (Bidirectional) । अनडाईरेक्शनल (unidirectional) में आप इनपुट (Input) दे सकते हैं और आऊटपुट (Output) मिलता है, परंतु इनपुट वापिस नहीं मिलता है। जब आप कोई कंटेंट लेते हैं, हैश करते हैं, तब एक स्ट्रिंग या हैश (String or Hash) मिलता है, पर इससे आपको पता नहीं चलेगा कि इनपुट क्या था। परंतु यह बात है कि अगर आप समान इनपुट वापिस से डालेंगे तो यही आऊटपुट वापिस से मिल जायेगा। हैश आऊटपुट (Hash Output) का अप्रितम सिग्नेचर प्रिंट होता है (यहाँ ब्लॉक कहलाता है)।

नोड्स (Nodes) –

बिटक्वाईन नोड्स (Bitcoin Nodes) यह निश्चित करते हैं कि ट्रांजेक्शनों को वेलिडेट और कन्फर्म कर दिया जाये, जिससे यह सुनिश्चित हो जाये कि बिटक्वाईन नेटवर्क पर दो बार खर्च न हो जाये। क्रिप्टोकरंसी का नोड पूर्ण रूप से क्लाईंट होता है जो कि क्रिप्टोकरंसी के पूरे ब्लॉकचैन को ऱखता है। यह नोड ट्रांजेक्शन्स को अपने पूरे क्रिप्टोकरंसी के नेटवर्क में ब्रॉडकॉस्ट और शेयर भी करता है। बिटक्वाईन नोड हमेशा ही अपने सारे ट्रांजेक्शनों की जाँच पड़ताल करता रहता है। नोड्स अपने बिटक्वाईन नेटवर्क में हो रहे सारे ट्रांजेक्शन्स ओर सभी नोड्स को भेजता रहता है। बिटक्वाईन में हर 10 मिनिट में नोड्स ट्रांजेक्शनों को ब्लॉक में डालते रहते हैं। ब्लॉक की एक श्रंखला ही ब्लॉकचैन कहलाती है। नोड्स एक प्रकार का तरीका है जिससे हो रहे ट्रांजेक्शनस में पारदर्शिता रहे।

अगर मेरे पास ही ब्लॉक और हैश है तो कुछ नहीं होगा, ये अन्य लोगों के पास भी होना चाहिये, यह विकेन्द्रीकरण (decentralization) कहलाता है। यहाँ पर कोई संस्था (entity) जुड़ी होनी चाहिये जो कि पूरे नेटवर्क (Network) में इसका वितरण कर दे, फैला दे। कोई भी संस्था जो कि ब्लॉकचैन से जुड़ी होती है वह नोड कहलाती है। एक नोड केवल संस्था ही है जो कि सिस्टम से जुड़ी होती है। आप कोई भी नई एन्ट्री अंधाधुँध तरीके से नहीं जोड़ सकते हैं। जो लोग इन ट्रांजेक्शन्स को ब्लॉक्स में जोड़ते हैं, वे माईनर्स (Miners) कहलता हैं।

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