शेयर बाजार की आधारभूत जानकारी Basic Information of Share Market

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हम निवेश क्यों करते हैं ?

हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे भविष्य के लिए हमारे पास आवश्यक रकम उपलब्ध रहे। केवल कमाने से और उसमें से बचत करना ही काफी नहीं होता है। मुद्रास्फीति के कारण समय के साथ-साथ मुद्रा का अवमूल्यन होता है, जिससे हमें हमारी बचत को बचाना होता है। मुद्रास्फीति से होने वाले घाटे को हम निवेश करके, उससे और ज्यादा रकम कमाने की चेष्टा करते हैं। यही निवेश का आधारभूत सिद्धांत है और शेयर बाजार निवेश करने की एक बेहतरीन जगह है।

शेयर बाजार का इतिहास –

शेयर बाजार का इतिहास शुरू होता है सन 1800 से, वर्ष 1854 में दलाल स्ट्रीट ने अपनी ट्रेड करने की जगह निश्चित करी। सन 1875 में मुंबई स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई ने “द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर एसोसिएशन” की स्थापना करी। सन 1956 में बीएसई भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज बना जो कि सिक्योरिटी कॉन्ट्रेक्ट एक्ट के अंतर्गत था। सन 1993 में एनएसई याने की नेशनल स्टॉक एक्सचेंज भी स्टॉक एक्सचेंज जैसा काम करने लगा। वर्ष 2000 में एनएसई ने इंटरनेट ट्रेडिंग करने की शुरुआत करी। वर्ष 2000 में ही एनएसई ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग यानी कि इंडेक्स फ्यूचर की शुरुआत करी। वर्ष 2001 में बीएसई ने भी डेरीवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत करी।

dalal streetपहले शेयर ब्रोकर बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठे होकर स्टॉक्स की ट्रेड करते थे। जैसे-जैसे शेयर ब्रोकरों की संख्या बढ़ने लगी तो जगह कम पड़ने लगी, उन्हें बार-बार अपनी जगह बदलनी पड़ती। आखिरकार वर्ष 1854 में सारे शेयर ब्रोकर दलाल स्ट्रीट पर चले गए। जहाँ पर आज एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है, जिसे हम मुंबई स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के नाम से जानते हैं। एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज होने के साथ-साथ बीएसई भारत का पहला स्टॉक एक्सचेंज है और यह भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण दायित्व निभाता आ रहा है। आज भी बीएसई सेंसेक्स भारतीय अर्थव्यवस्था और भारत की वित्तीय स्थिति को नापने का जरिया है।

वर्ष 1993 में एनएसई याने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की गई। अपने शुरुआत के वर्षों में ही दोनों एक्सचेंज ऑटोमेटेड ट्रेडिंग इनवायरमेंट में चले गए जिससे शेयर ब्रोकर और निवेशक दोनों को बहुत फायदा हुआ।

भारत में शेयर बाजार के मजबूत इतिहास से हमें पता चलता है कि शेयर बाजार में निवेश जोखिमपूर्ण तो है ही परंतु यह भूलभुलैया जैसा भी है, लेकिन जब एक बार आप शेयर बाजार में निवेश करने की शुरुआत कर देते हैं तो आपके निवेश करने की जानकारी अपने आप बढ़ती जाती है। शेयर बाजार के बाहर से निवेश करना और निवेश के बारे में समझना जितना कठिन लगता है, वह धीरे-धीरे उतना ही सरल लगने लगता है।
हम अगली पोस्ट में बात करेंगे –

शेयर बाजार क्या है ? शेयर बाजार कैसे काम करता है?
प्राइमरी और सेकेंडरी मार्केट क्या होते हैं?
शेयर कैसे खरीदे जाएं?
ट्रेडिंग अकाउंट क्या होता है?
ऑनलाइन ट्रेडिंग कैसे की जाती है?
कौन-कौन से वित्तीय उत्पाद शेयर मार्केट में ट्रेड किए जाते हैं?
और सेबी यानी की सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया क्या करता है?

 

 

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