HIV+ के लिये बीमा कंपनियाँ मना नहीं कर सकतीं।​ Insurance Companies can’t deny cover for HIV+ patients.​

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भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने HIV+ बीमारी के लिये बीमा कंपनियों को कहा है कि वे इसका इलाज अपनी बीमा पॉलिसी से हटा नहीं सकते हैं, जब तक कि उनके एक्चुयरी की ओर से न कहा जाये। नियामक ने कहा है कि HIV+ और AIDS के लिये बीमा कंपनियाँ कवरेज में पक्षपात न करें।​

प्रिवेंशन एंड कंट्रोल एक्ट २०१७ के तहत बीमा कंपनियाँ अब HIV+ और AIDS के लिये पक्षपात नहीं कर सकतीं, जो कि १० सितंबर से लागू हो गया है। परंतु लगभग सारी बीमा कंपनियाँ इस पर कुछ भी बोलने से बच रही हैं और अपने अभी के उत्पादों में HIV+ और AIDS के लिये कवरेज नहीं दे रही हैं, साथ ही नये उत्पाद बाजार में लाने के लिये अभी तैयार नहीं हैं।​

कारण – ​

HIV+ और AIDS का इलाज बहुत महँगा है। अगर किसी को HIV+ और AIDS है तो उनका शरीर बहुत कमजोर हो जाता है और उनका इलाज का खर्च सामान्य इलाज की तुलना में कई गुना अधिक होता है, इन बीमारियों के टेस्ट भी बहुत महँगे होते हैं और साथ ही अगर अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है तो ज्यादा लंबे समय तक अस्पताल में रहना होता है, जो कि सामान्य बीमारियों की दशा में नहीं होता है। केवल इसलिये कोई भी बीमा कंपनी HIV+ और AIDS को अपनी पॉलिसी के कवरेज में नहीं जोड़ती हैं।​

​बीमा कंपनियों की अपनी समस्याएँ है कि उनके पास HIV+ और AIDS बीमारियों से संबंधित पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं है और वे लोग कैसे HIV+ और AIDS को अपनी बीमा पॉलिसी में कवरेज दें, निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, कुछ बीमा कंपनियाँ HIV+ और AIDS की प्राथमिक अवस्था को अपनी बीमा पॉलिसी में कवर करने की योजना बना रही हैं, पर उसमें भी बहुत से नियम होंगे।​

स्टार हेल्थ बीमा कंपनी ने HIV+ के लिये भारत में पहली बीमा योजना लाई है, यह बीमा योजना समूह बीमा में है। योजना का नाम है स्टॉर नेटप्लस इंश्योरेंस प्लॉन, जो कि HIV+ के मरीजों को भी इलाज के लिये कवर करते हैं।

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