मुद्रास्फीति – सही पूर्वानुमान लगाना Inflation – the right Assumption

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हाल ही में मुद्रास्फीति (Inflation) की दर अगर देख रहे होंगे तो कम हुई है, जिसके बहुत से कारण हैं, पर यह आपके फाइनेंशियल प्लॉन याने कि वित्तीय आयोजना में भी नजर आनी चाहिये।

क्या आपको पता है कि एक जादुई करामात वाली चीज आपके फाइनेंशियल प्लॉनिंग में हमेशा ही रहती है और जो आपकी प्लॉनिंग याने कि योजना में जमीन आसमान का अंतर ला सकती है? जी हाँ वह है मुद्रास्फीति।

हम एक साधारण से सेवानिवृत्ति योजना की बात करते हैं कि रमेश जिसकी उम्र अभी 30 वर्ष है और 60 वर्ष में सेवानिवृत्त होना चाहता है। उनके अभी के मासिक खर्च लगभग 50,000 रूपये हैं और रमेश अपने इसी रहन सहन को सेवानिवृत्ति के बाद भी रखना चाहता है।

मुद्रास्फीति

मुद्रास्फीति

8% के मुद्रस्फीति दर से, रमेश को अपने मासिक खर्च के लिये 5.46 लाख रूपये सेवानिवृत्ति के बाद चाहिये होंगे। हम यहाँ 85 वर्ष की उम्र तक जीवित रहने का मान कर चल रहे हैं और सेवानिवृत्ति के बाद के रिटर्न 4% मानकर चल रहे हैं, रमेश ने अपनी सेवानिवृत्ति के लिये कुल 10.35 करोड़ रूपये जमा करने की योजना बनाई है और बचत करना शुरू कर दी है।

अगर हम मुद्रास्फीति की दर 6% कर देंगे तो सेवानिवृत्ति के बाद की रमेश को अपने मासिक खर्च के लिये केवल 3.01 लाख रूपये चाहिये होंगे, और साथ ही सेवानिवृत्ति के लिये केवल 7.1 करोड़ रूपये चाहिये होंगे (अगर हम यह मानकर चल रहे हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद केवल 2% ही रिटर्न मिलेंगे)।

यहाँ तक कि, मुद्रास्फीति की दर केवल कुल रकम जमा करने सेवानिवृत्ति के बाद पर ही असर नहीं डालती है, बल्कि जो आय और खर्च के अनुमान रमेश ने अपनी फाइनेंशियल प्लॉनिंग करते वक्त लगाये थे, उस पर भी असर डालती है।

रमेश के इस योजना में जो हमने मुद्रास्फीति का प्रभाव दर्शाया है उससे आपको अपने फाइनेंशियल प्लॉन में बहुत कुछ सोचकर, समझकर बदलाव करने की जरूरत है। क्योंकि इससे केवल आपकी सेवानिवृत्ति के लिये जमा रकम पर ही असर नहीं पड़ रहा है, बल्कि आय, खर्च और ब्याज दर के बारे में जो आपने सोचा है उस पर भी फर्क पड़ेगा।

आजकल भारत में अधिकतर ऑनलाईन कैलकुलेटर और सलाहकार 8% मुद्रास्फीति की दर से गणना करते हैं, ये 8% मुद्रास्फीति दर आती कहाँ से है? क्या आपने कभी यह सोचा है?

वर्तमान में, भारत में New consumer price Index (Combined, 2011-12 base year) से रिटेल याने कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर का अनुमान निकाला जाता है, परंतु इस इंडेक्स को केवल 5 वर्ष ही हुए हैं, तो अधिकतर फाइनेंशियल प्लॉनर पुराने CPI पर भरोसा करते हैं, क्योंकि वह बहुत पुराना है।

अगर हम CPI-IW का पिछले दस वर्षों का याने कि मई 2007 से मई 2017 तक का औसत मासिक मुद्रास्फीति की दर निकालेंगे तो वह लगभग 8% होती है। इसी कारण से अधिकतम फाइनेंशियल प्लॉनर अपने फाइनेंशियल प्लॉन में मुद्रास्फीति के लिये 8% की दर का उपयोग करते हैं। लेकिन अगर बारीकी से देखा जाये तो पता चलता है कि CPI की मुद्रास्फीति की दर 5 वर्ष पहले 9-10% थी वह अब गिरकर 2017 के प्रथम 6 महीने में 2% गिर चुकी है। भारत में 9-10% की मुद्रास्फीति की दर मानना ठीक नहीं है, यह हमारे वित्तीय स्वास्थ्य के लिये ठीक नहीं होगा और हम भविष्य के लिये ढंग से योजना नहीं बना पायेंगे।

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