सेवानिवृत्ति के बाद अपने निवेश को कैसे संभालें Invest correctly after Retirement

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सेवानिवृत्ति हर एक व्यक्ति के जीवन में आने वाला एक पढ़ाव है और अपने निवेश को मैनेज करने में अधिकतर लोग बहुत ही गंभीर गलतियाँ करते हैं। (Invest correctly after Retirement)

सभी की सेवानिवृत्ति की उम्र अलग-अलग है, कहीं पर 58 है, कहीं पर 60 है, कहीं पर 62 है, तो कहीं पर 65 भी है। कुछ प्रोफेशन ऐसे हैं जिसमें सेवानिवृत्ति की कोई उम्र नहीं होती। सेवानिवृत्ति के बाद औसतन हम लोग 35 वर्ष की उम्र जीते हैं और इतने वर्षों में आप की जितनी भी बचत है, वह मुद्रास्फीति की भेंट चढ़ जाएगी। इसे दो प्रकार से देख सकते हैं पहली कि आप की बचत जो है वह सही तरीके के निवेश उत्पादों में लगी हो, जैसे कि इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में या इक्विटी में सीधा निवेश हो, और दूसरा जब आप सेवानिवृत्त होते हैं तो इस निवेश से आपके लिए नियमित आय आती रहे।

बुनियादी बात यह है कि आपको अपने निवेश से होने वाली आय पर ही निर्भर रहना है। आपका निवेश आपको मुद्रास्फीति की दर से ज्यादा रिटर्न देना चाहिये। आपका जो मूलधन है वह हमेशा मुद्रास्फीति की दर के साथ बढ़ता रहना चाहिये। अगर वह मूलधन इतना ही रहता है तो आपको आने वाले वर्षों में बहुत बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा, तो इससे कैसे निपटें? एक उदाहरण देखते हैं, आप यह मान कर चलें अगर आज बैंक में फिक्स डिपॉजिट की दर 7.5% है और मुद्रास्फीति की दर अगर 5% है और आपकी डिपॉजिट 30 लाख रूपये है, तो 1 साल के बाद आपके डिपॉजिट की रकम लगभग 32 लाख 25 हजार रूपये हो जायेगी। अब आप सोच रहे होंगे कि मैं अपना खर्च इस 2.25 लाख रुपये से निकाल दूँगा। यहाँ हम बता दें कि आप गलत सोच रहे हैं क्योंकि यहाँ पर मुद्रास्फीति की दर 5% है तो इस हिसाब से आपका निवेश 1 साल के बाद 30 लाख की जगह 31 लाख 50 हजार रुपये होना चाहिये, तो अब आप 2.25 लाख रुपये में से 1.5 लाख रुपये घटा देंगे तो आपके पास में बचेंगे 75 हजार रुपये, 75 हजार रुपये को आप 12 महीने में भाग कर लीजिए तो 6250 रुपये आप हर महीने खर्च कर सकते हैं। आप यह भी ध्यान रखिए कि जब आप ₹10 हजार सालाना से ज्यादा ब्याज फिक्स डिपॉजिट पर कमाते हैं तो उस पर आयकर विभाग को टीडीएस भी देना होता है। अब यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप अपने निवेश को 30 लाख रूपये रखकर भविष्य के लिए अपनी आय कम करना चाहते हैं या फिर 31 लाख 50 हजार रुपये रखकर मुद्रास्फीति की दर को समायोजित कर सकते हैं।

कई बार ऐसा भी होता है जब फिक्स डिपॉजिट की दर मुद्रास्फीति की दर से कम होती है या बराबर होती है या उनके बीच का अंतर बहुत कम होता है। आने वाले समय में इसकी कोई गारंटी नहीं है कि फिक्स डिपॉजिट की दर मुद्रास्फीति की दर से ज्यादा होगी।

जबकि अगर आपका निवेश इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में है तो स्थिति बिल्कुल अलग ही होगी। क्योंकि वहाँ पर आपका पैसा बाजार और देश के विकास के साथ काम कर रहा है। आप वहाँ से आराम से कम से कम 4% सालाना निकाल सकते हैं और आपका पैसा वहाँ पर बढ़ता भी रहेगा। हाँ जोखिम जरूर है बाजार में, लेकिन आप अपना 50% निवेश इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में रख सकते हैं, जो कि कभी भी एक साथ ना हो। निवेश हमेशा टुकड़ों-टुकड़ों में करते रहना चाहिये, जिससे आपका निवेश बाजार के हर स्तर पर हो और आप बाजार की अस्थिरता से होने वाले नुकसानों से बच सकें। इन नुकसानों को फायदे में बदलने का नाम है – नियमित निवेश अगर आपका निवेश शेयर बाजार में सीधे भी है, तो आपको उसके अन्य फायदे भी मिलेंगे जैसे कि उनसे मिलने वाला डिविडेंड जो कि टैक्स फ्री है। अगर आपका निवेश म्युचुअल फंड और इक्विटी दोनों में है तो यहां पर आपको आयकर में भी फायदा होगा, क्योंकि इस आय पर आयकर नहीं लगेगा।

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाएगी वैसे-वैसे मुद्रास्फीति की दर भी बढ़ती जायेगी। सेवानिवृत्ति के बाद 5 से 7 वर्ष आपको थोड़ा लगेगा कि हमारा पैसा जोखिम में निवेश है, लेकिन जब आप 7 वर्ष के बाद अपने निवेश को देखेंगे तो आपको खुशी होगी क्योंकि आप सेवानिवृत्ति के बाद यानि कि बुढ़ापे में होने वाली गरीबी से बच सकेंगे।

बहुत ही कम लोगों ने इस बारे में सोचना और समझना शुरू कर दिया है, जो कि अपनी नियमित निवेश म्यूचुअल फंड और इक्विटी में कर रहे हैं और उससे होने वाले फायदे उठा रहे होंगे। जो लोग भी इक्विटी शेयर बाजार में और म्यूचल फंड में निवेश कर रहे हैं उनको लघु अवधि और मध्यम अवधि के फायदों को नजरअंदाज करना चाहिये। तभी आप लंबे समय तक निवेशित रह पायेंगे और लंबी अवधि में अच्छे लाभ कमा पायेंगे। हालांकि अभी भी 99% लोग जो सेवानिवृत्त हो चलो हैं, अपना पैसा फिक्स डिपॉजिट में ही रखना श्रेयस्कर समझते हैं। जैसे जैसे आप और बूढ़े होते जायेंगे, वैसे वैसे आपका पैसा कम होता जाएगा। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने निवेश सलाहकार से सलाह जरूर करें। निवेश सलाहकार सीएफपी CFP (Certified Financial Planner) होना चाहिये।

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