कठिन वित्तीय निर्णय कैसे लें?

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हम सभी अपने वित्त याने पैसे के बारे में खुद ही निर्णय लेते हैं, जो कि हमारे भविष्य के लिये बेहद ही जरूरी और महत्वपूर्ण होते हैं। इतने सारे लोगों से बात करने का बाद यह समझ आता है कि बहुत से लोग तो अपने वित्त संबंधी निर्णय लेने के लिये तैयार ही नहीं हैं। इस वित्तीय दुनिया में बहुत से खिलाड़ी हैं जो अपने उत्पाद और सर्विसेस के साथ बाजार में खड़े हैं, और आम निवेशक या आम जनता इन उत्पादों के बारे में, उनके बीच क्या अंतर हैं, इन सबके बारे में कुछ जानती ही नहीं है।

उदाहरण के लिये डेबिट कार्ड को ही ले लीजिये, जो साधारणतया: किसी भी बचत खाते के साथ एक स्टेंडर्ड फीचर के रूप में आता है, परंतु हरेक बैंक अपने डेबिट कार्ड के साथ कुछ नई चीज बताकर ग्राहक को लुभाने की कोशिश करते हैं, जबकि डेबिट कार्ड का मुख्य काम वही रहेगा, उनका साईज भी वही रहेगा। परंतु सभी बैंकें अपना डेबिट कार्ड सबसे अच्छा बताने की कोशिश करती हैं।

जब बैंक में बचत खाता खुलवाने की बात आती है तो अधिकतर लोग अपनी सुविधा देखते हैं कि घर के पास बैंक है या फिर कोई पहचान वाला उस बैंक में है, या फिर कई बार नियोक्ता जिस बैंक में खाता खुलवा देते हैं, उसी में खाता खुल जाता है। परंतु जैसे ही हमें कुछ महत्वपूर्ण वित्तीय निर्णय लेने होते हैं तब सब गड़बड़ा जाता है, फिर भले ही वह ऋण संबंधित हो या भविष्य की बचत के संबंध में हो। अगर आप ईपीएफ या एनपीएस में निवेश कर रहे हैं, तो उसके पीछे यह कारण है कि आपके नियोक्ता ने आपको इस निवेश के लिये मजबूर किया है, यह निवेश आपने अपनी मर्जी से खुद नहीं किया है, निर्णय आपका नहीं है। अगर 22 साल के लड़के पर अपने सेवानिवृत्ति की बचत के निर्णय के लिये कहा जाये तो उस लड़के को लगेगा कि मैं कौन सा अभी सेवानिवृत्त हो रहा हूँ, जो अभी से इसके लिये बचत करनी है, या फिर टैक्स में बचत के लिये भी निर्णय नहीं ले पाते हैं। जब तक कि हमें इस प्रकार के निवेशों में निवेश करने के लिये बाध्य न किया जाये।

कभी कभी तो टेलीकालर्स को सुनकर आनंदित होता हूँ, जब वे किसी बीमा पॉलिसी, टैक्स बचत के उत्पाद, ऋण, म्यूचुअल फंड, बचत स्कीम या रियल इस्टेट प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हैं। सोचिये जिस व्यक्ति को निवेश के बारे में कुछ भी पता न हो, किसी से फिक्सड इनकम या इक्विटी उत्पाद के बीच में या वैल्यू या ग्रोथ के बार एसेट एलोकेशन के बारे में बात करते हैं, तो उनके लिये जो कुछ भी नहीं जानते हैं, 2-3 मिनिट में निर्णय लेना बहुत ही आसान होगा क्या? या फिर कोई ईमेल जिसका सब्जेक्ट लाईन या उसकी बॉडी का विजुअल किसी तरह से आपको आकर्षित कर लेता है। परंतु 2-3 मिनिट में वित्तीय निर्णय लेना बेहद ही मुश्किल है।

हमें हमारे वित्तीय निर्णय लेते समय अपने ऊपर नियंत्रण रखना चाहिये। कितना पैसा कहाँ निवेश करना है, ज्यादा निवेश करना है या कम निवेश करना है, कितनी जोखिम वाले उत्पाद में निवेश करना है। वित्तीय उत्पाद बहुत ही सरल होने चाहिये जिससे कि हर कोई इनको समझ सके। परंतु अधिकतर यही देखा जाता है कि वित्तीय उत्पादों को समझना बहुत कठिन हो जाता है। जटिल वित्तीय उत्पादों को सरल तरीके से निवेशकों को समझाना भी एक बहुत चुनौती भरा कार्य है।  वित्तीय उत्पादों में और उनकी सर्विस देने वाली कंपनियों में, नियामक और अन्य लोग जो भी दस्तावेज देते हैं वे समझना बहुत जटिल होते हैं। यही वह जगह है जहाँ हम पर्सनल फाईनेंस के क्षैत्र में सरल भाषा में लोगों को जानकारी देने की कोशिश कर रहे हैं। जटिल भाषा को सरल तरीके से समझाना है। आप हमारे ब्लॉग वित्तगुरू पर पढ़ते रहें और फाईनेंशियल बकवास यूट्यूब चैनल देखते रहें, हम आपके द्वारा लेने वाले वित्तीय निर्णयों को अच्छी तरह से लेने में मदद करेंगे।

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