सेवानिवृत्त होने के बाद निवेश में गलतियाँ Mistakes in Investment after Retirement

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हम हर चीज में सबसे पहले अमेरिका की तरफ देखते हैं, पर क्या आपको पता है कि अमेरिकन लोग बचत करने के मामले में बहुत पीछे हैं, वे जीवन भर कमाते हैं, पर बचत करने की आदत न होने के कारण सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें कई बार बहुत तकलीफ भी होती है, सेवानिवृत्ति का मतलब है कि सैलेरी बंद हो जाना याने कि जो पैसे हर माह मिलते हैं वे मिलना बंद हो जाना। तो इस स्थिति में क्या हो सकता है कि हम अपने खर्चे कम कर दें, अपनी लाईफ स्टाईल के स्तर को कम कर लें, बहुत सी चीजों में कटौती कर लें। सेवानिवृत्ति के बाद स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्चे भी बड़ जाते हैं और ये खर्चे बहुत ही जरूरी हैं। परंतु अमेरिका में जीवन भर नौकरी करते हुए टैक्स भरने के बाद, सेवानिवृत्ति के समय बहुत सी सुविधायें सरकार उपलब्ध करवाती है, जिसमें से एक है स्वास्थ्य के ऊपर होने वाले खर्च, पेंशन इत्यादि जिसे सोशल सिक्योरिटी भी कहते हैं।

भारत में जीवन भर नौकरी करते हुए हम तरह तरह के टैक्स भरते रहते हैं, परंतु हमारी कोई भी जिम्मेदारी सरकार नहीं उठाती है, न स्वास्थ्य की न पेंशन की। यहाँ कोई सोशल सिक्योरिटी नहीं है, यहाँ सारे खर्चे हमें अपनी जेब से करना है। जीवन भर नौकरी करते हुए हम लोग बचत करते हैं और जब सेवानिवृत्ति के करीब होते हैं या हो रहे होते हैं तो एक बात मैंने देखी है कि अपनी बचत के मामले में बहुत से मूर्खतापूर्ण निर्णय लोग लेते हैं। वरिष्ठ नागरिक जो कि सेवानिवृत्त हो रहे होते हैं वो निवेश के मामले में या तो बहुत भोले होते हैं या फिर तेज तर्रार, या तो उनको कुछ ज्यादा पता नहीं होता है या फिर वरिष्ठ नागरिक बचत और निवेश के मामले में बहुत आक्रामक होते हैं। ऐसे बहुत से लोग मिल जायेंगे जो बहुत अच्छे पढ़े लिखे हैं, परंतु अपने निवेश को संभालना नहीं जानते, यहाँ तक कि कई बार तो खुद फाईनेंस से जुड़े लोग भी ऐसे ही होते हैं, वे केवल नौकरी करते हैं परंतु सुरक्षित भविष्य की बचत को लेकर उनको कुछ पता नहीं होता है। कई बार तो सेवानिवृत्ति के बाद लोग अपनी जीवन भर की बचत जो कि उनके भविष्य के लिये जरूरी है सही तरह से निवेश करना, उस पर भी अच्छा खासा बड़ा जोखिम ले लेते हैं। कई बार तो मैंने देखा है कि किसी अपने रिश्तेदार या परिचित के कहने पर ये लोग किसी ऐसे वित्तीय उत्पाद में निवेश कर देते हैं जिसकी समझ ही उनको नहीं होती है, और कई बार वह उत्पाद उनके लिये उपयुक्त भी नहीं होता है।

सेवानिवृत्ति के समय के दौरान या उसके पहले ही आप ऐसे कई लोगों को अपने आसपास मँडराते देखेंगें जो कि वित्तीय उत्पाद बेचते हैं, और इससे उनको या तो कमीशन मिलता है या फिर उनकी नौकरी का टार्गेट पूरा हो रहा होता है, तो उनके जाल में तो कतई नहीं फँसना चाहिये। ये लोग हमारे ही बहुत करीबी होते हैं, जैसे कि बहुत ही करीबी रिश्तेदार चाचा, ताऊ, भाई, बहन, बुआ, फूफा, मौसा, मौसी, जीजा या फिर कोई बहुत करीबी दोस्त के बच्चे या उनके रिश्तेदार, आपके पड़ौसी, तो उनके जाल में मत फँसिये। जब भी निवेश करना है अपने आप निवेश उत्पाद को समझिये और निवेश करिये। भले 2 महीने बाद निवेश करें।

ऐसे लोग आपको कैसे जाल में फँसाते हैं – किसी अनजानी कंपनी में फिक्सड डिपॉजिट करवा देंगे, जिसके बारे में आपने पहले कभी सुना भी नहीं होगा, किसी ऐसे व्यापार में पैसा लगवा देंगे जहाँ उनको फायदा हो रहा होगा, किसी व्यापार का सदस्य बनाने की कोशिश करेंगे। किसी न किसी स्कीम को आपको किसी भी तरह से समझाने की कोशिश करेंगे। ये वित्तीय उत्पाद बेचने वाले लोग बहुत शातिर होते हैं, उनको पता होता है कि सेवानिवृत्त लोगों को अधिकतर निवेश कहाँ करना है, कैसे करना है, पता नहीं होता है और इसीलिये उनका निशाना ये लोग होते हैं, कई बार तो अंजाने में ही ऐसे लोग हमें मिलने लगते हैं, जैसे कि कहीं बैंक में या कहीं दुकान पर और फिर वे आपके घर एक दो बार मिलने आयेंगे और आप पर किसी न किसी उत्पाद को खरीदने का दबाब बनाने लगते हैं। इन वित्तीय उत्पाद बेचने वालों को पता है कि कैसे बुढ्ढ़े लोगों को मीठी बातें करके फुसलाया जाता है और अगर ये लोग उनको झाँसे में आ भी गये और नुक्सान भी हो गया तो ये कहीँ लड़ाई करने नहीं जायेंगे, न ही किसी को बतायेंगे। क्योंकि हमारे यहाँ गंदी आदत है कि हम अपने निवेश के बारे में किसी के साथ बात ही नहीं करते हैं, हम अपने आप को बहुत ज्यादा होशियार समझते हैं और दूसरे को हमेशा बेबकूफ समझते हैं। पर ऐसा हमेशा नहीं होता है, जब हम आपस में अपने निवेश के बारे में बात करेंगे तभी हमें इन उत्पादों की कमियों या गलतियों का पता चलेगा। आपको फिक्स डिपॉजिट करना है तो बैंक में करिये, किसी जानी मानी कंपनी में करिये जिसका बाजार में अच्छा नाम है और कई वर्षों से बाजार में टिकी हुई है, थोड़ा बहुत ज्यादा ब्याज पाने के चक्कर में अपनी जीवनभर की पूँजी को दाँव पर लगाना अक्लमंदी का काम नहीं है।

सेवानिवृत्त होने के बाद हमें होने वाले नुक्सान के कुछ कारण हैं –

अपने निवेश के बारे में बहुत ज्यादा गोपनीयता रखना – सेवानिवृत्त लोग कभी भी किसी को भी यह बताना नहीं चाहते कि उनके पास कितना पैसा है, उन्होंने कहाँ निवेश करा है या कैसे भविष्य में निवेश करने वाले हैं। उनको लगता है कि गोपनीयता बहुत ही ज्यादा जरूरी है। मैंने ऐसे कई लोगों को करीब से देखा है जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई किसी के कहने पर कहीं लगा दी और नुक्सान भी हो गया, परंतु किसी से भी इस बारे में बात नहीं की, केवल अपने आप अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं। और इस तरह के लोगों को वित्तीय उत्पाद बेचने वाले लोग सबसे पहले अपना निशाना बनाते हैं।

वित्तीय उत्पादों को न समझना –

अधिकतर तो हम वित्तीय उत्पादों को लेते समय दूसरों पर विश्वास करके हम बिल्कुल अंधे की तरह व्यवहार करना पड़ेगा। यहाँ तक कि अगर किसी कंपनी के बारे में निवेश के बारे में बताया जाता है तो कंपनी का बारे में जानना भी उचित नहीं समझते हैं, बस अंधे होकर निवेश कर देते हैं। केवल ज्यादा ब्याज के चक्कर में पड़कर सेवानिवृत्त लोग अपनी जीवन भर की कमाई को दाँव पर लगा देते हैं।

टीडीएस बचाने के चक्कर में –

टीडीएस बचाने के चक्कर में बहुत से लोग पता नहीं क्या क्या जुगाड़ करते देखे जा सकते हैं, ये लोग 50,000 रूपयों से ज्यादा ब्याज एक बैंक या कंपनी में न हो, इस चक्कर में कई जगह फिक्स डिपॉजिट खुलवाते रहते हैं। पर सँभल कर रहिये यह अब तकनीक का युग है, आपके पैन कार्ड से जितनी भी जगह आपने निवेश किया है, सभी जगह से ब्याज आपके पैन कार्ड से पता चल जाते हैं। अपनी पुरानी मानसिकता को छोड़िये के कई जगह फिक्स डिपॉजिट खुलवा ली और आप आयकर विभाग की पकड़ में नहीं आयेंगे।

खातों में केवल अपने अकेले नाम का होना –

यह एक ऐसी गलती है जो लगभग हर सेवानिवृत्त व्यक्ति करता है, वे अपने निवेश अकेले अपने नाम पर ही रखते हैं। निवेश में दूसरा नाम जरूर जुड़वायें, भले ही कितनी भी उम्र हो, भगवान तो कभी भी अपने घर बुला सकते हैं। यहाँ तक कि कई वरिष्ठ नागरिक तो नामांकन भी नहीं करके रखते हैं।

शेयर बाजार का डर –

एक आम राय मैंने हमेशा वरिष्ठ नागरिकों में देखी है कि शेयर बाजार तो सट्टा है, और इसमें पैसे लगाना याने कि डुबाना ही है। वो तो यहाँ तक कि इक्विटी वाले म्यूचुअल फंड में भी निवेश करने से कतराते हैं। यहाँ तक कि वे ये भी देखते हैं कि अभी तो सेवानिवृत्ति के बाद केवल 60 वर्ष के ही हुए हैं और अभी तो आगे पूरा भविष्य उनके लिये है, फिर भी वे आँखें मूँदकर रहते हैं। उनको केवल दोस्तों की बताई पोंजी स्कीम, चिट फंड या फिर सुरक्षित फिक्स डिपॉजिट ही अच्छी लगती है। वे न तो किसी दोस्त से इक्विटी समझने की कोशिश करते हैं और न ही किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लेते हैं। सेवानिवृत्त लोग मुद्रास्फीति से लड़ने वाले एक महत्वपूर्ण निवेश उत्पाद में निवेश ही नहीं करते हैं। कुछ सेवानिवृत्त लोग अपने बैंकों के अधिकारियों पर विश्वास करके बहुत सी यूलिप स्कीम खरीद कर अपना नुक्सान कर लेते हैं। जब तक उनकी आँख खुलती है तब तक तो बहुत नुक्सान हो गया होता है, और वे इस बुरे अनुभव से यह सीखते हैं कि इक्विटी में निवेश नहीं करना चाहिये, वे यह नहीं समझते कि उन्होंने यूलिप में निवेश करके गलत वित्तीय उत्पाद में फँसे।

आईपीओ की यादें –

अधिकतर सेवानिवृत्त लोगों के पास आईपीओ के पुराने अनुभव हैं, वे आजकल के बाजार को समझ ही नहीं पाते कि क्यों इतने प्रीमियम पर शेयर मिल रहा है, उनको लगता है कि प्रीमियम मतलब कि सीधे हमारे जेब पर डकैती है, अधिकतर सेवानिवृत्त लोग तो समझना ही नहीं चाहते और न ही सीखना चाहते हैं जबकि उनके पास सेवानिवृत्ति के बाद बहुत समय होता है।

कोई अग्रिम योजना न बनाकर रखना –

सेवानिवृत्ति के बारे में कोई भी योजना बनाकर नहीं रखता है, जब तक कि सेवानिवृत्त न हो जायें। न कोई सेवानिवृत्ति के पहले यह सोचना भी चाहता है कि अब हर महीने उसे एक नियमित आय जो कि बरसों से मिल रही थी, मिलना बंद होने वाली है। वही लोग अधिकतर नहीं सोचते जिन्होंने अच्छा पैसा जोड़ लिया है या फिर अच्छी पेंशन मिलने वाली हो या फिर उनका ध्यान उनके बच्चे रखने वाले हों। ध्यान रखिये कि यह सुनने में कठिन जरूर लगता है, परंतु सच है यह है कि हमें अपनी सेवानिवृत्ति के बारे में सारी गणनायें पहले ही कर लेनी चाहिये। बच्चों पर भी ज्यादा निर्भर होना ठीक नहीं क्योंकि आजकल के महँगाई के युग में उन्हें भी अपने बच्चों और अन्य जरूरतों को पूरा करना होता है। निर्भरता कम से कम हो यह ध्यान रखें।

पत्नी हमेशा ही आश्रित रहती है –

जब भी घर में निवेश करने के लिये बात होती है अधिकतर पत्नी से इस बारे में कोई बात नहीं की जाती है या बताना उचित भी नहीं समझा जाता है। खुद को आदर्श गृहणी बनाते हुए कभी भी निवेश के बारे में यह तक जानने की जहमत नहीं उठाती हैं कि कौन सी बैंक, कंपनी या शेयर में निवेश किया है, कहाँ पर खाते खुलवाये हुए हैं। यहाँ तक कि अगर गृहणी भी कमाती है तो भी वे केवल कमाने तक ही सीमित रहती हैं, वे ये भी नहीं समझना चाहती हैं कि उनका पैसा कहाँ निवेश हो रहा है, उनका सारा पैसे याने कि निवेश का ध्यान अधिकतर पति या बच्चे ही रखते हैं। मेरी सारे लोगों से और खासकर सेवानिवृत्त लोगों से निवेदन है कि अपनी पत्नी को अपने निवेश से संबंधित बातें धीरे धीरे रोज समझाइये, क्योंकि नहीं तो आपको जाने के बाद आपकी पत्नी किसी न किसी की दया पर निर्भर होगी। केवल पैसा कमाकर निवेश करके सुरक्षित करने से ही काम नहीं चलेगा, उनको इस बारे में बताना भी होगा और सिखाना भी होगा।

ध्यान रखिये कि रोज ही वित्तीय लेखों को जरूरी पढ़िये और बाजार के बारे में सीखिये, क्योंकि सेवानिवृत्त लोगों का सबसे बड़ा दुश्मन मुद्रास्फीति है। वित्तीय जानकारी होने पर आप अपने सीमित निवेश से ज्यादा अच्छी तरह से सँभाल पायेंगे। ध्यान रखिये कि अपने निवेश का ध्यान केवल और केवल आपको ही रखना है, आप बीमा बेचने वाले और दूसरे वित्तीय उत्पाद बेचने वालों के लिये शिकार हैं, उनसे बचकर रहना है। वे लोग अपने टार्गेट पूरा करने के चक्कर में या फिर ज्यादा कमीशन बनाने के चक्कर में आपके सारे निवेश को गलत वित्तीय उत्पादों में लगवा सकते हैं। हमेशा ही पढ़िये और समय लीजिये किसी भी वित्तीय उत्पाद को समझने के लिये व किसी पर भी विश्वास न करें, केवल खुद पढ़ें और समझकर निवेश करें।

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