NPS सेवानिवृत्ति को सुखी और सुरक्षित बनाये।

Facebooktwittergoogle_plusredditpinterestlinkedinmail

NPS सेवानिवृत्ति को सुखी और सुरक्षित बनाये।

जैसे जैसे हम सेवानिवृत्ति की और बढ़ते जाते हैं, उसके साथ ही हम एक अच्छीखासी रकम बनाते जाते हैं, जिससे कि हम वृद्धावस्था को सुखी और सुरक्षित रख सकें। जब आप वृद्धावस्था में पहुँच जायेंगे तब आपके पास ऐसी वित्तीय सुरक्षा होनी चाहिये जिससे कि आप अपना बुढ़ापा अच्छे से काट सकें, क्योंकि तब आपकी नियमित आय आना बंद हो जायेगी, इसके लिये आपको बहुत सोच विचार करके चलना चाहिये। जिससे आप अपना बुढ़ापा स्वतंत्र रूप से अपनी शर्तों पर बिता सकें। जब हम जवान होते हैं तो हम अपने वर्तमान जीवन के लिये तो खर्चे निकालते ही हैं और साथ ही भविष्य के लिये पैसे जोड़ते हैं। अपने जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार, हम विभिन्न उत्पादों में निवेश करते रहते हैं। हम कोशिश करते हैं कि हमें नियमित आमदनी होती रहे, जिससे हम वर्तमान के खर्चों को तो वहन कर ही पायें और भविष्य याने कि अपने बुढ़ापे को आराम से काटने के लिये भी अच्छा खासा पैसा बचा पायें। परंतु हमें यहाँ ध्यान रखना चाहिये कि आमदनी का वही हिस्सा हमारे पास रहने वाला है जो कि हमने जवानी के दिनों से अपने बुढ़ापे के लिये बचाया है।

इसी समय, यह प्रश्न हर किसी के दिमाग में घूमता रहता है कि कैसे हम इतनी रकम जुटायें जिससे हम सेवानिवृत्ति के बाद आराम से अपना जीवन यापन कर सकें। इस समस्या का समाधान बहुत आसान और भरोसेमंद राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली है जो कि NPS के छोटे नाम से भी प्रसिद्ध है।

NPS क्या है?

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली भारत सरकार द्वारा सभी नागरिकों को सेवानिवृत्ति के बाद आय प्रदान करने के उद्देश्‍य से आरंभ की गई है। जिसमें कि अंशराशि को एसेट्स के मिश्रण में निवेश किया जाता है और सेवानिवृत्ति की राशि उन एसेट्स के लाभ पर निर्भर करती है। यह योजना 18 से 60 वर्ष के उम्र के भारतीय नागरिकों के लिये स्वैच्छिक आधार पर उपलब्ध है।

NPS में राशि पर लाभ सीधे बाजार से संबंध रखता है। निवेशकों के निवेश को अच्छे रिटर्न मिले, इसके लिये एक समर्पित फंड मैनेजर NPS के निवेश को देखता है।

NPS का फायदा यह है कि यह कर्मचारियों को निवेश के बहुत से विकल्प देता है और कर्मचारी जो भी विकल्प उनको अच्छा लगता है, चुन सकते हैं। NPS का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पारदर्शी है और कम लागत वाला वित्तीय विकल्प है। जहाँ कि सेवानिवृत्ति की सहयोग राशि पेंशन फंड स्कीम में निवेश की जाती है और कर्मचारी अपने निवेश को दैनिक स्तर पर अपने खाते में लाभ-हानि देख सकते हैं।

NPS के वर्गीकरण:

NPS दो वर्गों में उपलब्ध है –

श्रैणी 1 (Tier 1) – श्रैणी 1 बुनियादी सेवानिवृत्ति पेंशन खाते हैं जो कि सभी नागरिकों के लिये उपलब्ध हैं। इसमें सेवानिवृत्ति के पहले अपने सेवानिवृत्ति पेंशन खाते की रकम को निकालना संभव नहीं है, इसमें कम से कम सेवानिवृत्ति के लिये सहयोग राशि मासिक 500 रूपये और एक वर्ष की 6,000 रूपये है।

श्रैणी 2 (Tier 2) – श्रैणी 2 खाते PPS (Prospective Payment System) के नाम से जाने जाते हैं, जिसमें किसी विशिष्ट कार्य के लिये कुछ रकम सेवानिवृत्ति के पहले भी निकाली जा सकती है। इनमें से मुख्य अपवाद स्वास्थ्य है। श्रैणी 2 के खाते कम से कम 1000 रूपये की रकम से खोले जा सकते हैं और उसके बाद के लेनदेन पर 250 रूपयों का शुल्क लगता है।

विनियोजन में प्राथमिकता:

NPS की एक और जबरदस्त विशेषता है कि निवेशक NPS में पसंद का चुनाव कर सकता है जो कि ऑटो च्वाईस और एक्टिव च्वाईस कहलाती हैं।

ऑटो च्वाईस में उन एसेट्स को आवंटित किया जाता है, पूर्वनिश्चित सूत्र या तरीके से जो कि निवेशक की उम्र के हिसाब से तय होता है। विनियोजन तीन प्रकार की एसेट में किया जाता है, जो कि ईक्विटी(E), कॉर्पोरेट बांड्स(C) और सरकारी प्रतिभूतियाँ(G) हैं।

एक्टिव च्वाईस में विनियोजन की पसंद निवेशक को मिल जाती है। फिर भी निवेशक अधिकतम 50 प्रतिशत रकम को ही इक्विटी में रख सकते हैं और सरकारी क्षैत्रों में यह 15 प्रतिशत और बढ़ा दी गई है।

NPS आयकर के फायदे और जवाबदारी –

NPS अभी Exempt Except Tax (EET) के तहत है। इस स्कीम में निवेशक को आयकर एक्ट 1961 में उपलब्ध फायदे मिलते हैं। अभी तक तो किसी एक राशि तक NPS में योगदान करने वालों को आयकर में छूट प्राप्त होगी, किंतु अगर एक साथ बड़ी रकम निकाली जाती है याने कि परिपक्वता की अवधि पूर्ण होने पर तो NPS पर टैक्स(EET) लगेगा। आयकर निर्धारण वर्ष 2015-2016 से NPS में योगदान की गई राशि पर अधिकतम पचास हजार रूपयों की छूट मिलेगी। यह अभी 1.5 लाख रूपयों की छूट के बाद सेक्श्न 80 CCE आयकर धारा 1961 के अतर्गत मिलेगी। यह केवल NPS में निवेश करने पर ही मिलेगी, और किसी प्रकार के निवेश पर यह छूट मान्य नहीं है। तो अब आप आयकर में 2 लाख रूपयों तक के कर की छूट का लाभ उठा सकते हैं, इस आयकर की छूट का लाभ केवल श्रैणी 1 में निवेश करने वाले निवेशक ही ले सकेंगे।

रकम निकालना –

60 वर्ष की उम्र में पहुँचने के बाद निवेशक NPS से बाहर निकल सकते हैं। लेकिन यहाँ 40 प्रतिशत पेंशन राशि से निवेशक को सेवानिवृत्ति (Annuity) की किसी योजना में निवेश करना होगा, जिससे उसे हर माह कुछ रकम मिलती रहे। अगर निवेशक 60 वर्ष की उम्र से पहले अपनी रकम निकालता है तो उसे 80 प्रतिशत पेंशन राशि को सेवानिवृत्ति (Annuity) की किसी योजना में निवेश करना होगा। यह प्रतिबंध केवल श्रैणी 1 के निवेशकों के लिये हैं, हालांकि श्रैणी 2 के खाते के लिये NPS में पहले यह जरूरी है।

जिस रकम से आपने सेवानिवृत्ति की योजना खरीदी है उस पर आयकर की छूट मिलेगी, याने कि कोई आयकर देय नहीं होगा। याने कि अगर कोई निवेशक अपनी पूरी रकम से सेवानिवृत्ति योजना खरीदता है तो उसे बिल्कुल भी आयकर देना नहीं होगा, केवल पेंशन की आय पर आयकर देना होगा जो कि किसी भी अन्य पेंशन की तरह ही होगा।

One thought on “NPS सेवानिवृत्ति को सुखी और सुरक्षित बनाये।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *