शेयर बाजार और जुआँ खेलना क्या एक जैसा है?

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मैंने लोगों को यह बहुत कहते सुना है कि शेयर बाजार में निवेश करना कैसिनों में जुआँ खेलने जैसा ही है। लोगों को लगता है कि दोनों में ही अनिश्चितता रहती है और परिस्थितियों का पता नहीं रहता है। कहते हैं कि “कभी भी पता नहीं रहता कि कब क्या हो जाये?”। जबकि वास्तविकता में जोखिम और अनिश्चितता दोनों ही अलग अलग बात हैं। वैसे ही निवेश और जुआँ, और इसके लिये हमें अंतर पता होना महत्वपूर्ण है।

कैसिनों में जुआँ खेलते हुए या लॉटरी खेलते हुए, जोखिम की शायद गणना की जा सकती है। जुआरी या लॉटरी खेलने वाले जीतने की संभावना का अनुमान नहीं लगा सकता है, परंतु जीतना हमेशा ही संभव नहीं है और हमेशा ही यह जुआँघर संचालक या लॉटरी चलाने वाले के पक्ष में रहता है, उसे भी अपने व्यवसाय से कमाना है, अपने खर्चों को निकालना है और लाभ भी कमाना है। जबकि कुछ जुआरी और लॉटरी खेलने वाले बहुत आशावादी होते हैं और अपने जीतने की संभावना पर बहुत ज्यादा विश्वस्त होते हैं, और इसी कारण से अन्य लोग ओर ज्यादा जोखिम से अपना पैसा गँवाने के लिये खेलने लगते हैं।

जबकि वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार में निवेश करते समय, हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिये कि व्यापार और अर्थव्यवस्था परिवर्तनशील होते हैं। जोखिम की गणना किसी गणित के सूत्र को लगाकर नहीं की जा सकती है, जैसे कि कैसिनो या लॉटरी में जीतने या हारने की संभावना की गणना की जा सकती है। परंतु फिर भी, लोग तमाम मुश्किलों को समझते हुए भी कठिन सूत्र बनाते हैं जो कि शेयर बाजार में निवेश के जोखिम की गणना करता है, क्योंकि हमारा दिमाग अनिश्चितता से नहीं लड़ सकता है। हम हमेशा ही किसी भी चीज के लिये निश्चित होना चाहते हैं, यह मानवीय स्वाभाव है और इससे हमारी अर्थनीति की समझ तय होती है।

इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है, सोचिये कि आप एक ऐसे पक्षी हैं जो कि मांसाहारी व्यक्तियों द्वारा खा लिया जाता है, इस दुनिया के आपके पहले दिन ही, एक आदमी आपकी और आता है, आप डर जाते हैं कि अब तो यह पक्का आपको मारकर खा जायेगा, परंतु वह आदमी आपके पास आता है और वह भला आदमी निकलता है और खाना खाने को देता है। अगले दिन, फिर आप देखते हैं कि फिर एक आदमी आपके पास आ रहा है, आपको डर लगता है, परंतु वह भी भला आदमी निकालता है और खाना खाने को देता है। तो पहले दिन के बाद आदमी द्वारा खाना देने की संभावना अगले दिन के लिये दो तिहाई हो जाती है। और अगर फिर से खाना मिलता है, तो संभावना बढ़कर तीन चौथाई हो जाती है, और वैसे ही संभावना बढ़ती जाती है। सौवें दिन, आदमी के खाना देने और न मारने की संभावना 99/100 हो जाती है। तब आपको लगने लगता है कि हाँ अब आदमी आ रहा है तो खाना मिलना तय है, परंतु धोखा हो जाता है और आप धन्यवाद ज्ञापित करते हैं और मारे जाते हैं। तो गलती से यह समझ बैठते हैं कि जोखिम की गणना उस पक्षी की जान के जोखिम जैसी है, परंतु यह भूल जाते हैं कि यह मारा जाना एक अनजाना जोखिम था।

जैसे, शोयर बाजार का हर जोखिम आप समझ नहीं सकते हैं, इसलिये इसकी गणना भी नहीं की जा सकती है। मैं आपको डराना तो बिल्कुल भी नहीं चाहता हूँ परंतु हर निवेश का यही यथार्थ है – शेयर बाजार, रियल इस्टेट, सोना इत्यादि। अमेरिका में सब-प्राईम संकट के पहले ऋण लेकर घर बनाने पर बहुत विश्वास था, क्योंकि घरों के लिये जोखिम की गणना ऐतिहासिक डाटा से की जा रही थी।

जबकि वहीं शेयर बाजार, रियल इस्टेट या सोने में निवेश पर भी अनिश्चितता है परंतु उतनी जोखिम वाली नहीं, जितनी कि जुआँ या लॉटरी में होती है। वह भी इसलिये कि जोखिम की सही ढ़ंग से गणना नहीं की गई थी, क्योंकि वहाँ बहुत सारे कारक थे, जो कि निवेश किये हुए धन को सीधे प्रभावित करते हैं, जैसे कि हमारे देश की अर्थव्यवस्था, दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था और अर्थनीति, बाजार में धन की तरलता की मात्रा, विश्व में धन की तरलता की मात्रा, और भी बहुत से कारक होते हैं।

हालांकि, निवेश में इतनी ज्यादा अनिश्चितता होने के बावजूद, जोखिम को सावधानी से कम किया जा सकता है। जैसे कि – हमें निवेश बहुत ज्यादा महँगे दाम पर नहीं करना चाहिये, इससे जुड़े जोखिम भी बहुत ज्यादा होंगे, क्योंकि इससे लाभ कमाने में ज्यादा समय लगेगा। इससे जोखिम और भी बढ़ जायेगा क्योंकि निवेश किये गये उत्पाद की कीमत कम भी हो सकती है और जितना आपने पैसा निवेश किया था, उससे कम कीमत हो जाये, जिसके लिये बहुत सी परिस्थितयाँ जिम्मेदार होती हैं।

जब भी शेयर बाजार में निवेश किया जाता है तो हमेशा ही उस शेयर को खरीदना चाहिये जहाँ आपके निवेश की सुरक्षा के लिये गुँजाइश हो। सबसे पहले तो आप जिस कंपनी का शेयर खरीदना चाहते हैं, उस कंपनी के व्यापार की वास्तविक कीमत को निकालें, और फिर बाजार में उस कंपनी के शेयर के कीमत से उसकी तुलना करें, और तभी खरीदें जबकि वह अपनी सही कीमत से 20% कम हो। तो यहाँ 20% व्यवसाय में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता और बाहरी कारकों से आपकी सुरक्षा की गुँजाइश है।

इसका मतलब यह भी है कि आपको अपने निवेशित धन के लिये, किसी भी व्यापार या कंपनी के सही मूल्यांकन तक पहुँचने के लिये आपको प्रयास भी करने होंगे। नहीं तो, यह जानने का और कोई तरीका नहीं कि आपका निवेश सही कीमत पर किया गया है या कि ज्यादा कीमत पर किया गया है। यह सब करने से आप अपने निवेश का जोखिम कम करते हैं, क्योंकि अनिश्चितता हमेशा ही बनी रहती है।

यह जानना जरूरी है कि कैसिनों में जुआँ खेलना और शेयर बाजार में निवेश करना एक ही जैसी चीज नहीं है। शेयर बाजार में अपना पैसा गँवाने का जोखिम कम और सही तरीके से निवेश करने पर लाभ की गुँजाइश हमेशा ही होती है। जोखिम को हमेशा ही सही तरह की कोशिशों से कम किया जा सकता है।

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