शेयर जल्दबाजी में खरीदो और फिर बाद में पछतावा करो Share – Buy in Hurry and later regret

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जल्दबाजी में खरीदो और फिर बाद में पछतावा करो Share – Buy in Hurry and later regret

तेज बाजार याने कि बुल मार्केट में कंपनी की क्वालिटी याने की गुणवत्ता का कोई फर्क नहीं पड़ता हैं। अधिकतर बुल मार्केट में कम समय में जितनी बुरी कंपनी की क्वालिटी उतने ही अच्छे लाभ मिलते हैं। जब यह चक्र खत्म होता है तब ये सब खराब क्वालिटी वाले शेयरों की सबसे ज्यादा पिटाई होती है और कोई इनको हाथ नहीं लगाता है। ये शेयर 90 प्रतिशत तक टूट जाते हैं और लंबी मंदी में चले जाते हैं। जब अगला बुल रन शुरू होता है और जब बाजार सारे स्टॉक के साथ दौड़ चुका होता है तब अचानक से कई लोग इन खराब शेयरों में काम करने लग जाते हैं और इस प्रकार से यह चक्र चलता ही रहता है, खत्म नहीं होता है।

जैसे कि वर्ष 1990 में मार्केट लॉट्स में ट्रेडिंग की जाती थी, मतलब कि आपको 50 या 100 के लॉट में शेयर खरीदना होते थे। अच्छी क्वालिटी के शेयर तो दौड़ चुके होते थे, तो आप खुद ही सोचिये कि अगर 100 शेयर आज के भाव पर खरीदना हो तो कितने लोग खरीद पायेंगे, जैसे कि Eicher या MRF। बहुत ही कम लोग इन कंपनियों के 100 शेयर खरीद पाने की सामर्थ्य रखते हैं। और जब तक बाजार अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुका होता था और जो लोग बाद में इस बाजार में फायदा उठाने की मानसिकता से आते थे कि 10,000 रूपये लगायेंगे और यहीं लाखों रूपये हो जायेंगे। तो ये लोग ब्रोकर को पूछते थे कुछ सस्ता वाला शेयर बताओ। सस्ता शेयर वेल्यूएशन से नहीं बल्कि बाजार के भाव से, अगर आपके पास 10,000 रूपये हैं और कम से कम 100 शेयर खरीदने हैं तो आप वही शेयर खरीद सकते थे जो कि 100 रूपये या उससे कम की कीमत के थे।

MRF Eicher

बहुत से लोग इसमें अच्छा खासी कमाई कर लेते थे, और बहुत से लोग इन शेयरों को बरसों तक अपने पास रख लेते थे। जो लोग शेयर बाजार से कमाई नहीं कर पाते हैं वे इस शेयर बाजार के, शेयर बाजार के निवेशकों के, कंपनियों से कट्टर दुश्मनी रखने लगते हैं।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कितनी ही बार और कई बार यह लिख चुके होते हैं कि जब भी शेयर खरीदो तो क्वालिटी देखकर खरीदो। सभी लोग पढ़ते हैं, सुनते हैं, समझ जाने का संकेत भी देते हैं, परंतु कुछ ही समय के बाद उनके पास SMS अलर्ट पर ध्यान देते हैं जो कि उनके मोबाईल फोन पर आया होता है और गलत खरीददारी की ओर बढ़ चुके होते हैं। हमारी प्रकृति ही ढुलमुल होती है और हम इस अनिर्णय की स्थिती में रहते हैं और हम सभी लोग प्रलोभन या लालच में फंस ही जाते हैं। हममें से अधिकतम लोग इस लालच का प्रबंधन उसमें फंसकर ही करते हैं।

जब भी निवेश करते हैं तो दो बातें निवेश करते समय ध्यान रखनी चाहिये –

  1. अपनी मूल पूँजी को बचाना चाहिये और
  2. मुद्रास्फीति से बचना
Ice Cream

Ice Cream

हम यह मान लेते हैं कि मेरे पास आज 100 रूपये हैं और मेरे पास एक अच्छी आईसक्रीम पसंद कर खरीद कर खाने के लिये विकल्प है, जिससे मैं अच्छा से अच्छा स्वाद ले सकूँ और अपनी स्वाद ग्रंथियों को तृप्त कर सकूँ।  अगर मैं अपनी बचत ऐसे ही करते रहूँगा तो बाद में भी मैं एक से ज्यादा अच्छी आईसक्रीम का स्वाद ले सकूँगा। अगर मैं अपने स्वभाव के अनुरूप एक आइसक्रीम खरीद लेता हूँ तो मेरे पास बिल्कुल नगदी नहीं बचेगी।  मैं मुद्रास्फीति को बस सँभाल ही रहा होता हूँ। इसी प्रकार से अगर हम शेयर को समझें तो हम अपनी खरीदने की क्षमता को बढ़ाने के लिये बचत करते हैं और अपनी खरीदने की क्षमता को बढ़ाते हैं।

इस संकटकाल की स्थिती में सजग निवेशक ऐसा दिखता है जैसे कि कोई अपना सर दीवार में मार रहा हो। निवेशक और एनालिस्ट हमेशा ही उत्साह में रहते हैं और एक बेहतर भविष्य की कल्पना करते हैं। व हर उस कंपनी जिसमें वे निवेश करते हैं हमेशा ही वह विश्व पर राज करने वाली होती है। हम रिसर्च एनालिस्ट की बात कर रहे हैं जो कि अपना निवेश करने या करवाने के पहले वे अपना सारा होमवर्क कर चुके होते हैं, तो इसका मतलब यह है कि उसमें कोई समस्या नहीं होने वाली है? हमें समझना चाहिये कि इसमें भी जो वे भविष्य के बारे में सोचते हैं उसमें 50% संभावना होती है कि वे सब सही होंगी। अगर वे गलत हुए तो उसका परिणाम यह होगा कि कंपनी की वेल्यू में जबरदस्त घाटा होगा। ऊपर की ओर जाने वाले शेयर, हमेशा ही स्वर्णिम अक्षरों से लिखे जाते हैं, और उनमें नीचे जाने का जोखिम बहुत ही कम होता है।

50 50 %

50 50 %

एक और सबसे बड़ी समस्या है कि हम लोगों की आदत होती है कि कम समय में शेयर के प्रदर्शन से हम कंपनी की क्वालिटी को आँकते हैं। हम हमेशा ही 10 ऐसे शेयर देखते हैं जो कि अपने उच्चतम स्तर पर होते हैं और हम केवल देखते हैं कुछ करते नहीं हैं। इस तरह की चिंता से हम हमेशा ही खराब निर्णय लेते हैं। हम अच्छे शेयरों से निकलकर, उस समय के अच्छे चल रहे शेयरों में घुस जाते हैं। हम उस समय अपने निवेश करने के निर्णय के पीछे के विश्लेषण को भूल जाते हैं। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में हम लंबे समय के निवेश याने कि शेयरों से अपना ध्यान हटा लेते हैं। हमारे लिये कम समय में याने कि शार्ट टर्म के घाटे बहुत ही दुख दर्द भरे होते हैं और इस दुख दर्द की भरपाई शार्ट टर्म में होने वाले लाभ से नहीं होती है। फिर भी निवेशक शार्ट टर्म के लालच के चक्कर में फंसकर रोज के होने वाले लाभ में पड़ ही जाता है। और जब बाजार से घाटा होने लगता है तो दुख दर्द और भी ज्यादा होता है।

top 10 shares

Top 10 shares

जब आप लंबी अवधि के लिये बाजार में निवेश करते हैं तो 10 से 15% के औसत से वार्षिक लाभ होने की संभावना होती है और जबकि हम हर बार जब भी ट्रेड करते हैं तो सोचते हैं कि 100% का लाभ होगा, हमें हमारा दिमाग सही मायने में ठीक कर लेना चाहिये।

मेरे खुद के निजी अनुभव से, मैं यह बता सकता हूँ कि जिन शेयरों को मैंने लंबी अवधि के लिये अपने पास रखा, उनसे मुझे बहुत ही अच्छा औसत वार्षिक लाभ मिला। हाँ उन शेयरों में कई बार ऊँची उठा पटक हुई होती है परंतु मैं उससे कभी भी घबराया नहीं, और न ही मैंने उस उठा पटक पर ध्यान दिया। मैंने जब भी किसी शेयर को बेचा है तो इसका मतलब हमेशा यही रहा है कि अब मैं उस शेयर को वापिस से खरीदने में दिलचस्पी नहीं रखता हूँ। उन शेयरों को बेचने का कोई मतलब ही नहीं है जो कंपनियाँ बहुत ही अच्छा कर रही हैं और मुझे पैसो की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है? ऐसे बहुत से लोग हैं जो शेयर के उच्चतम स्तरों पर कुछ कुछ मात्रा में शेयर बेचते रहते हैं, वे चाहते हैं उनके पास जो रखे हुए शेयर हैं वे फ्री हो जायें। जैसे कि अगर मैं xyz कंपनी के 1000 शेयर 20 रूपये प्रति शेयर खरीदता हूँ और एक साल के बाद उन शेयरों का भाव 40 रूपये हो जाता है तो मैं अपने आधे शेयर याने कि 500 रूपये बेच दूँगा। जिससे मेरे पास के 500 बचे हुए शेयर की कीमत जीरो हो गई याने कि वे फ्री के हो गये। यह तरीका भी काम कर सकता है, अगर आप अपने निकाले हुए पैसे को अच्छी कंपनी के शेयर खरीदने में निवेश कर रहे हैं। नहीं तो, हमने लाभ लेकर उन आधे पैसे के निवेश का अपने मिश्रधन का नुक्सान कर लिया है।

हमें हमारे शेयर के निवेशों को दो दुश्मनों से बचाना होता है, पहला बाहर के सलाह देने वाले याने कि ब्रोकर, टीवी चैनल, एनालिस्ट इत्यादि। दूसरे सबसे बड़े दुश्मन अपने निवेश के हम खुद होते हैं। हमारी मनोदशा ऐसी हो जाती है कि हम उसी मनोवृत्ति को शिकार होकर बाहर बाजार में जो भी बातचीत, शोरगुल, खबरें हो रही होती हैं वो हमारे दिमाग को परेशान करने लगती हैं।

Profitable shares

Profitable shares

निस्संदेह, एक ही बात बहुत महत्वपूर्ण है लंबी अवधि के लिये निवेश वाले शेयरों में, वह है भाग्य। मैंने अगर 20 वर्ष पहले 12 शेयर खरीदे थे तो उसमें से केवल 3 या 4 शेयर लंबी अवधि में बहुत ही चमत्कारपूर्ण परिणाम दिये होंगे, अन्य 3-4 शेयरों ने केवल बाजार के औसत लाभ दिये होंगे व अन्य 3-4 शेयरों ने बहुत ही मामूली लाभ दिये होंगे। यह भी एक कारण है कि मैं अपने निवेश विविध प्रकार से करता हूँ। वह इसलिये क्योंकि मैं भविष्य के मुनाफे वाले खिलाड़ियों पर दाँव लगाता हूँ। मैं बहुत से पूर्वानुमान लगाता हूँ, परंतु सारे के सारे पूर्वानुमान सही नहीं हो सकते हैं। फिर भी, मैं बहुत से शेयर 5-6 वर्ष अपने पास रखता हूँ, कि कंपनी (जिसका शेयर आशा के अनुरूप काम नहीं कर रहा है या खराब कर रहा है) शायद मेरी उम्मीद के मुताबिक अच्छा करेगी। कुछ समय, हम लोग अपने दृढ़ विश्वास के कारण बहुत सी कंपनियों के शेयर अपने पास रखते हैं। बिना जोखिम के, कभी भी कोई सफलता नहीं मिलती है। सन 1980 में HDFC बहुत अच्छा डिविडेंड देता था, परंतु 1991 में गृहऋण कंपनी शुरू करने के बाद इसकी वैल्यू बहुत बढ़ गई। या फिर इन्फोसिस को ही लें, बहुत ही कम लोगों को इस कंपनी पर विश्वास था जब इसका IPO आया था। उस समय तो इन्फोसिस के शेयर खरीदना केवल अँधेरे में तीर मारने जैसा ही था।

1991 में हमारी अर्थव्यवस्था में बदलाव हुए। हम लोग एक नये समृद्ध चक्र की शुरूआत कर रहे थे। वहाँ पर बहुत कार्पोरेट के बड़े बड़े नाम बाजार में सूचिबद्ध हुए। उनसे फायदा लेने के लिये, कम से कम 10 से 20 वर्ष तक निवेश को बनाये रहना चाहिये था। सभी शेयर तो फायदे देने वाले निश्चित ही नहीं थे, इसलिये विविध निवेश करना बहुत जरूरी था। अपने दिमाग और पेट को शांतिपूर्ण तरीके से समझाना था कि आसानी से कोई बरगला न दे। सबसे महत्वपूर्ण बात थी कि हमें याद रखना था कि हमने जो भी शेयर चुने हैं और निवेश किया है वे लंबी अवधि के बाद हमें बेहतरीन फायदा देने वाले थे। तो, अच्छी कंपनी को ढ़ूँढ़ना और जितनी जल्दी हो सके खरीद लेना, बहुत महत्वपूर्ण था। जिन कंपनियों की सफलता की कहानी सबको पता है, उनके शेयर तो हमेशा ही अधिक भाव में मिलते हैं और इस कारण से भविष्य में उसमें होने वाले लाभ कम होते है। आज के भाव में अगर Eicher या Page Industries को खरीदेंगे, तो इन कंपनियों द्वारा पहले ही भव्य प्रदर्शन किया जा चुका है और इनसे मार्केट रिटर्न पाने के लिये हमें कई वर्षों का इंतजार करना होगा। तो पढ़िये, सुनिये, सोचिये, हर समय कोई न कोई कंपनी बाजार में ऐसी होती है जिसमें निवेश के बाद 10 वर्षों में ही चमत्कारपूर्ण परिणाम मिलते हैं। और इसका मतलब है कि जब शेयर की कीमत खरीदने वाले के लिये अनुकूल है और बेचने वाले के लिये नहीं।

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