What is market Capitalization? बाजार में पूँजीकरण क्या है?

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सभी कंपनियाँ अलग अलग संख्या में बाजार में अपने शेयर जारी करती हैं, जब वे बाजार में लिस्ट होती हैं, याने कि आईपीओ के जरिये। हर कंपनी के एक शेयर की कीमत अन्य कंपनी के शेयर से अलग होती है। बाजार के पूँजीकरण का सीधा सा गणित है बाजार में पब्लिक को जारी किये गये शेयरों की संख्या को शेयरों की ताजा कीमत से गुणा कर दिया जाये तो बाजार में कंपनी का कितना पूँजीकरण (Market Capitalization) है पता चल जायेगा। पूँजीकरण की ताजा स्थिति जानने के लिये हमेशा ही शेयर बाजार से उस शेयर का ताजा भाव लेना चाहिये।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी कंपनी के शेयर की कीमत 10 रूपये है और लगभग 5 लाख शेयर बाजार में पब्लिक के पास हैं मतलब कि बाजार के निवेशकों के पास हैं तो उस कंपनी का बाजार में पूँजीकरण 50 लाख रूपये हो गया।

पूँजीकरण का महत्व बहुत होता है जब ढ़ेर सारे शेयर अलग अलग बाजार (Index) में लिस्ट होते हैं। साथ ही जितना ज्यादा किसी शेयर याने कि कंपनी का पूँजीकरण उतना ही ज्यादा उसका बाजार में महत्व भी होता है, जिसे weightage कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह होता है कि जितना ज्यादा कंपनी की बाजार में कीमत होगी, और शेयर की कीमत बाजार में कम या ज्यादा होगी तो सीधे ही Index पर असर पड़ता है, Index गिरना और बढ़ना दोनों ही ज्यादा पूँजीकरण वाले शेयर सीधे प्रभावित करते हैं।

लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियाँ क्या हैं?

हम लोग हमेशा ही सुनते हैं, पढ़ते हैं कि कुछ लार्ज कैप कंपनियाँ है जैसे कि रिलायंस, इन्फोसिस इत्यादि। जबकि अन्य कंपनियाँ मिडकैप या स्मॉल कैप कंपनियाँ हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि ये कैसे वर्गीकृत किया जाता है? हम देखते हैं कि BSE कैसे अपने इन्डेक्स पर शेयर पूँजीकरण का वर्गीकरण करता है।

80-15-5 का तरीका

BSE अपने इन्डेक्स पर लिस्टेड कंपनियों का वर्गीकरण उनके बाजार के पूँजीकरण को 80-15-5 तरीके से करती हैं, देखिये कैसे यह तरीका काम करता है –

  • सभी कंपनियों को अवरोही (descending) क्रम में (अधिक से कम संख्या के क्रम में) कर लें।
  • ऊपर के क्रम याने कि समूह से जो  कंपनियाँ पूरे बाजार के पूँजीकरण का 80% पूँजीकरण रखती हैं वे लार्जकैप कंपनियाँ कहलाती हैं।
  • उसके बाद के कंपनियों के समूह जो कि पूरे बाजार के पूँजीकरण का 15% (80-95%) पूँजीकरण रखती हैं वे मिडकैप कंपनियाँ कहलाती हैं।
  • बाकी की बची हुई कंपनियाँ जो कि बाकी का 5% बाजार के पूँजीकरण का हिस्सा होती हैं वे स्मॉलकैप कंपनयाँ कहलाती हैं।

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि लार्जकैप कंपनियाँ बाजार के पूँजीकरण का 80%, मिडकैप कंपनियाँ 15% और स्मॉलकैप कंपनियाँ 5% होती हैं। अधिकतर कंपनियाँ बाजार में स्मॉलकैप की होती हैं जो कि केवल 5% पूँजीकरण की होती हैं। जबकि 80% वाली पूँजीकरण वाली कुछ ही कंपनियाँ होती हैं जो बाजार याने कि इन्डेक्स को ऊपर या नीचे ले जाती हैं। लार्जकैप कंपनियाँ का पूँजीकरण 10,000 करोड़ या इससे अधिक होता है, मिडकैप कंपनियों का पूँजीकरण 2,000 से 10,000 करोड़ रूपयों का होता है और स्मॉलकैप कंपनियों का पूँजीकरण 2,000 करोड़ रूपयों वाली कंपनियों का होता है। थोड़ा बहुत बाजार ऊपर नीचे होने पर अगर पूँजीकरण कम या ज्यादा होती भी है, तो उसका कोई बहुत बड़ा असर नहीं होता है।

अलग अलग पूँजीकरण वाली कंपनियों का क्या फर्क पड़ता है –

capitalization table

निवेशक को कंपनियों के पूँजीकरण को कैसे देखना चाहिये?

जो लोग बहुत ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते हैं याने कि वे अधिकतर लार्जकैप कंपनियों में निवेश करते हैं, ध्यान रखिये जितना कम जोखिम उतना कम रिटर्न।

जो लोग व्यवहारिक होते हैं और बाजार के जोखिम को समझते हैं साथ ही बाजार के बारे में पढ़ते हैं वे लार्जकैप और मिडकैप कंपनियों में निवेश करते हैं। ये लोग अपने अधिकतम निवेश को लार्जकैप कंपनियों में रखते हैं।

जो साहसी लोग होते हैं या यूँ भी कह सकते हैं कि बाजार के वीर लोग वे ज्यादा लाभ पाने के लिये अधिक जोखिम लेते हैं और वे लार्जकैप, मिडकैप के साथ ही स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी अच्छा खासा निवेश करते हैं। ये लोग लार्जकैप कंपनियों में कम निवेश रखते हैं, क्योंकि ये ज्यादा जोखिम लेकर ज्यादा लाभ कमाने वाले लोग होते हैं।

इन सबसे पहले आप अपनी खुद की जोखिम क्षमता को जरूरी आंक लें और तभी किसी चीज का निर्णय लें। ऐसा न हो कि आप अपनी क्षमता से ज्यादा जोखिम ले लें और खुद के वित्तीय जीवन को नुक्सान पहुँचा लें।

अब आप बताईये कि आप किस प्रकार के निवेशक हैं, कम जोखिम लेने वाले, व्यवहारिक या फिर साहसिक?

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