मोबाईल और क्रेडिट कार्ड को एक साथ न रखें, वरना लुट जायेंगे

आजकल कई लोग अपने क्रेडिट कार्ड मोबाईल फोन के पीछे लगाते हुए घूमते हैं, मतलब कि मोबाईल और क्रेडिट कार्ड को एक साथ रखते हैं। कई लोग इसे फैशन मानते हैं और कई लोग इसे अपने लिये सुविधाजनक मानते हैं। सुविधाजनक इसलिये मानते हैं क्योंकि उन्हें अपना वैलेट हर जगह लेकर घूमना नहीं होता है, कहीं पर भी कुछ भी भुगतान करना हो तो उसके लिये या तो किसी ऑनलाईन वैलेट से भुगतान कर दिया या फिर क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर दिया।

अभी एक वाकया हुआ कि दोस्त लोग रेस्टोरेंट में खाना खाने गये और एक लड़की, हम नाम रख देते हैं जानकी, अपने फोन के कवर में पीछे की और क्रेडिट कार्ड लगाये हुए थी, ऐसा नहीं कि केवल वही लड़की परंतु कई और दोस्त भी इसी तरह के फोन लेकर चल रहे थे, जिनमें उनके खुद के क्रेडिट कार्ड पारदर्शी कवर में पीछे लगे हुए थे। सभी दोस्त लोगों ने बढ़िया खाना खाया और खूब मस्ती भी की, फिर वापिस अपने अपने घरों की ओर चल दिये।

अब जानकी जब घर पहुँची और घर पहुँचने के बाद किसी और दोस्त को क़ॉल करने के लिये अपना मोबाईल टटोला, तो पता चला कि उसका मोबाईल तो कहीं गुम गया है, जानकी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, क्योंकि केवल मोबाईल ही नहीं घूमा था, ये समझ लीजिये कि उसके क्रेडिट कार्ड की लिमिट पाँच लाख रूपये है तो उसके पाँच लाख रूपये गुम गये हैं, जानकी के साथ अब दिक्कत यह थी कि उसके पास न क्रेडिट कार्ड का नंबर था और न ही अपना रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर, पर तभी ध्यान आया कि क्रेडिट कार्ड जब डिलिवर हुआ था तो उसका कवर लैटर था, जिस पर क्रेडिट कार्ड का पूरा नंबर लिखा होता है, तो वह फोन लगाकर अपने क्रेडिट कार्ड को हॉटलिस्ट करवा सकती है, उसने वह भी ढ़ूँढ़ा परंतु नहीं मिला। जानकी ने अपने दोस्तों को फोन लगाकर बताया कि उसका क्रेडिट कार्ड गुम गया है और वह बहुत चिंतित है। कुछ दोस्तों ने रेस्टोरेंट में भी जाकर देखा, पर मोबाईल नहीं मिला, टैक्सी जिसमें दोस्त लोग गये थे, उसे भी फोन लगाया तो उसके पास भी मोबाईल नहीं था। 

एक दोस्त ने जानकी को बताया कि पहले तो क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करो, अगर कुछ भी नहीं हो रहा है और अगर बैंक एकाऊँट से क्रेडिट कार्ड एक्सेस हो सकता है तो वहीं से हॉटलिस्ट करो, जानकी ने फटाफट नेटबैंकिंग पर लॉगिन किया और क्रेडिट कार्ड हॉटलिस्ट किया। नेटबैंकिंग पर हॉटलिस्ट करने के बाद जब उसने अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट देखी तो वह घबरा गई क्योंकि अब उसकी लिमिट शेष केवल 25 हजार ही बता रहा था, इसका मतलब कि कोई उसके क्रेडिट कार्ड से 4.75 लाख अभी तक या तो निकाल चुका था, या खरीददारी कर चुका था। अब जानकी को अहसास हुआ कि उसके क्रेडिट कार्ड से तो फ्रॉड हुआ है।

बैंक को शिकायत दर्ज की गई तो बैंक ने इन्वेस्टिगेशन के बाद कहा कि कोई फ्रॉड नहीं हुआ है, सारे ट्रांजेक्शन सही तरीके से OTP भेजने के बाद हुए हैं, खरीददारी में कोई फ्रॉड नहीं है, बीच में फोन पर बात करके बैंक ने यह भी सुनिश्चित किया था कि जानकी ही ये सारे ट्रांजेक्शन कर रही है, और फोन पर उन्हें सब कुछ पॉजीटिव ही मिला।

जानकी को 4.75 लाख रूपयों की चपत लग चुकी थी, क्योंकि बैंक का कहना भी एकदम सही है। अब जानकी पुलिस के पास जायेगी और अपनी शिकायत दर्ज करवायेगी, फिर देखते हैं कि क्या होगा?

अब हम समझते हैं कि जानकी की क्या गलती रही –

१. फोन और क्रेडिट कार्ड एक साथ नहीं रखना चाहिये।

२. फोन पर एसएमएस पढ़ने का नोटिफिकेशन ऑन नहीं होना चाहिये, जबकि फोन लॉक हो, यह हमेशा ही छिपा हुआ रहना चाहिये।

यह एक फ्रॉड ही है, परंतु कानूनन तरीके से बैंक इन सारे ट्रांजेक्शनों को फ्रॉड नहीं है कहकर बच सकते हैं, तो हमेशा ही ध्यान रखें कि फोन आजकल बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, और फोन और क्रेडिट कार्ड को एक साथ न रखें। साथ ही क्रेडिट कार्ड का CVV नंबर मिटा दें, उसे हमेशा ही याद रखें। आपको यह छोटी सी युक्ति न केवल लाखों रूपये बचायेगी, बल्कि होने वाली परेशानी से भी छुटकारा दिलवायेगी।

आपको क्या विचार हैं, जरूर बताईयेगा, कि इस तरह की होने वाली घटनाओं से कैसे बचा जाये, जिससे इतनी मानसिक परेशानी का सामना भी न करना पड़े और न ही आपको आर्थिक नुक्सान हो, जिसे फ्रॉड सिद्ध करने में ही आपको महीनों या सालों लग जायें।

 

Paytm Money APP निवेशकों के लिये, जरूर उपयोग करें

मैं कई उत्पादों पर लिखने से बचता हूँ, पर २ दिन पहले ही नित्यानंद शर्मा को सुन रहा था, जो कि पेटीएम मनी Paytm Money App के सीईओ हैं, तो पता चला कि दुनिया में एक से एक अच्छे लोग भी हैं, जो कि निवेशकों के लिये बेहतरीन प्लेटफॉर्म बनाने की सोचते हैं, वरना तो सभी को पता है कि जितनी भी म्यूचुअल फंड एप हैं, सभी कमीशन से चलती हैं, पर पेटीएममनी की खास बात लगी कि आप यहाँ से डायरेक्ट वाले म्यूचुअल फंड भी खरीद सकते हैं।


डायरेक्ट वाले म्यूचुअल फंड बेचने का मतलब है कि पेटीएममनी को इससे कोई कमाई नहीं है, बल्कि जो प्लेटफॉर्म उन्होंने बनाया है, उसकी कीमत भी उनको जेब से ही भरनी होगी। परंतु नित्यानंद शर्मा का मानना है कि निवेश को आसान बनाने की किसी न किसी को तो शुुरूआत करनी ही होगी, तो क्यों न हम ही करें।

म्यूचुअल फंड की इस एप्प और प्लेटफॉर्म बनाने में उन्होंने कई मुश्किलों का सामना किया, पर डिगे नहीं।

म्यूचुअल फंड कंपनियों का काम है कि निवेशक को हमेशा ही याने कि रियल टाईम में या फिर हर सप्ताह बताते रहे कि आपका निवेश कैसा कर रहा है, जरिया ईमेल भी हो सकता है, एसएमएस भी हो सकता है, पर म्यूचुअलफंड कंपनियाँ केवल एक्सपेंस रेशो के ईमेल हर महीने भेजने में मशगूल रहती हैं। उनका काम है कि वे चीजों को जितना साधारण कर सकते हैं करें, परंतु वे लोग कोई इनिशियेटिव ही नहीं लेना चाहते हैं। जैसे कि अगर आपके पास म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट आता है तो वह आपके ईमेल में आता है फिर भी आपको उसमें पासवर्ड डालना होता है, कई लोग पासवर्ड डालने में अभ्यस्त नहीं होते, उन्हें दुनिया में सबसे कठिन काम पासवर्ड डालना ही लगता है।

जब ईमेल में आप स्टेटमेंट भेज रहे हो तो फिर पासवर्ड की जरूरत क्या है, जबकि आजकल डिवाईसें भी पर्सनलाईज्ड हैं, कोई किसी और की डिवाईस का उपयोग नहीं करता है।
सबसे बढ़िया बात यह है कि आप १०० रूपये से निवेश की शुरूआत कर सकते हैं, मैंने भी कल एक एसआईपी पेटीएम मनी के जरिये खलुवाई १०० रूपये की, कि इस बेहतरीन प्लेटफॉर्म का अनुभव ले सकूँ। सभी लोग हमेशा ही मुझसे फंड का नाम पूछते हैं तो बता दूँ कि मैंने ICICI Prudential Nifty Next 50 Index Direct – Growth फंड में निवेश किया है।

निवेश की भाषा भी ऐसी रखी गई है कि आम व्यक्ति भी समझ सके, जैसे कि Better Than Savings Account, Better than Fixed Deposits High Risk for High Returns etc. तो हर किसी का ध्यान रखा गया है और हर जोखिम वाले के लिये उतने जोखिम के फंडों का चुनाव करके दर्शाया गया है। यहाँ आपको म्यूचुअल फंड के बारे में सारी जानकारी भी मिल जायेगी, जैसे कि फंड मैनेजर कौन है, फंड का पिछले वर्षों में प्रदरशन कैसा रहा इत्यादि।

यहाँ आप अपने अन्य निवेश भी पोर्टफोलियो में जोड़ सकते हैं, उसका भी बहुत आसान तरीका है, Paytm money को जरूर उपयोग करके देखिये।

एक डिस्कलेमर देना चाहूँगा कि यह स्पॉनसर्ड पोस्ट नहीं है।

 

म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशो

म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशो तो सभी ने सुना होगा, पर बहुत ही कम लोग इसका मतलब भी जानते हैं। एक्सपेंस रेशो मतलब कि म्यूचुअल फंड हाऊस द्वारा आपके निवेश किये हुए पैसे को सँभालने का वार्षिक शुल्क है। जिसे कि सीधे ही आपके म्यूचुअल फंड से ले लिया जाता है। इससे सीधे ही आपके निवेश पर असर पड़ता है।

एक्सपेंस रेशो कोई फिक्स शुल्क नहीं होता है, यह आपके निवेश की राशि पर निर्भर करता है और म्यूचुअल फंड हाऊस उसका प्रतिशत में शुल्क लेते हैं। सेबी ने म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशो की अधिकतम लिमिट बनाई हुई है, जो कि म्यूचुअल फंड  हाऊस निवेशक से ले सकते हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में अधिकतम 2.50% और डेब्ट म्यूचुअल फंड 2.25% सेबी ने निर्धारित की हुई है।

एक्सपेंस रेशो में बहुत से शुल्कों का नियोजन रहता है, जो कि म्यूचुअल फंड स्कीम के बेहतर प्रबंधन के लिये बहुत ही जरूरी है। म्यूचुअल फंड प्रबंधन का शुल्क हर दिन निवेशक को लगाता है, परंतु माह में एक बार ही बताता है, एक्सपेंस रेशो के तीन मुख्य कारक हैं –

१. प्रबंधन शुल्क – म्यूचुअल फंड एक ऐसा उत्पाद है जो कि कई बार निवेश नीति में चिंतन और सूक्ष्म अवलोकन करने के बाद निवेशक को निवेश करने की अनुमति देता है।

म्यूचुअल फंड हाऊस इन म्यूचुअल फंड स्कीम को चलाने कि लिये फंड मैनेजर को रखते हैं, उनको निवेश सलाहकार शुल्क या प्रबंधन शुल्क देय होता है, यह फीस पूरे फंड के एसेट का 0.5% से 1.5% तक होती है।

२. प्रबंधन लागत – म्यूचुअल फंड को चलाने के लिये भी लागत लगती है, जैसे कि ग्राहक सेवा केंन्द्र, पत्राचार, ईमेल, जानकारी भेजना, हिसाब रखना ओऱ भी कई कार्य होते हैं। म्यूचुअल फंड में प्रबंधऩ लागत अलग अलग हो सकती है और साथ ही लंबी बहस भी की जा सकती है।

३. डिस्ट्रीब्यूशन फीस – म्यूचुअल फंड हाऊस अपनी स्कीम की मार्केटिंग और विज्ञापन के लिये डिस्ट्रीब्यूशन फीस वसूलते हैं। म्यूचुअल फंड निवेशकों से ही यह फीस वसूल करते हैं, जिससे कि नये निवेशकों को विज्ञापन के जरिये लुभाया जा सके।

एक्सपेंस रेशो से आपके निवेश पर क्या असर पड़ेगा –

म्यूचुअल फंड में एक्सपेंस रेशो से आपके निवेश में लंबी अवधि में बहुत अंतर पड़ेगा, भले ही म्यूचुअल फंड के ये एक्सपेंस रेशो दिखने में छोटे हों परंतु मान लीजिये कि 20 वर्ष की निवेश की अवधि हो तो यह कीमत लाख रूपये तक भी पहुँच सकती है।

एक उदाहरण से देखते हैं –

अगर आप 20 वर्ष के लिये 10,000 रूपयों का निवेश करते हैं, और 2.5% एक्सपेंस रेशो है, आपको निवेश 15% वार्षिक रिटर्न दे रहा है। शुल्क काटने के बाद निवेश 98,639 रूपये होता है जबकि 1,63,655 रूपये होना चाहिये, लगभग एक तिहाई हिस्सा म्यूचुअल फंड के एक्सपेंस रेशो में चला जाता है।

म्यूचुअल फंड के एक्सपेंस रेशो से बचा नहीं जा सकता है, परंतु थोड़ा कम किया जा सकता है, म्यूचुअल फंड में डिस्ट्रीब्यूटर प्लॉन की जगह डाईरेक्ट प्लॉन में निवेश करने की शुरूआत करें। अगर आप किसी डिस्ट्रीब्यूटर से म्यूचुअल फंड नहीं खरीद रहे हैं और ऑनलाईन ही खरीद रहे हैं, तो हमेशा ही बेहतर है कि आप डाईरेक्ट प्लॉन के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश करें, क्योंकि डायरेक्ट प्लॉन का एक्सपेंस रेशो कम होता है औऱ य़ह किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा नहीं दिया जा रहा है तो मिससेलिंग भी नहीं हो सकती है। डिस्ट्रीब्यूशन और डायरेक्ट फंड में एक्सपेंस रेशो में लगभग 0.8% का अंतर होता है, जो कि आपके निवेश को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है।अगर 100 रूपये आज निवेश करते हैं तो 15 वर्ष के बाद डायरेक्ट प्लॉन में निवेशित निवेश की कीमत 609 रूपये होगी और डिस्ट्रीब्यूशन प्लॉन में किये निवेश की कीमत 547 रूपये होगी। तो म्यूचुअल फंड  में अगली बार निवेश करने के पहले एक्सपेंस रेशो का भी ध्यान जरूर रखें।

https://www.youtube.com/watch?v=uLF96RU28UI


 

HIV+ के लिये बीमा कंपनियाँ मना नहीं कर सकतीं।​ Insurance Companies can’t deny cover for HIV+ patients.​

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने HIV+ बीमारी के लिये बीमा कंपनियों को कहा है कि वे इसका इलाज अपनी बीमा पॉलिसी से हटा नहीं सकते हैं, जब तक कि उनके एक्चुयरी की ओर से न कहा जाये। नियामक ने कहा है कि HIV+ और AIDS के लिये बीमा कंपनियाँ कवरेज में पक्षपात न करें।​

प्रिवेंशन एंड कंट्रोल एक्ट २०१७ के तहत बीमा कंपनियाँ अब HIV+ और AIDS के लिये पक्षपात नहीं कर सकतीं, जो कि १० सितंबर से लागू हो गया है। परंतु लगभग सारी बीमा कंपनियाँ इस पर कुछ भी बोलने से बच रही हैं और अपने अभी के उत्पादों में HIV+ और AIDS के लिये कवरेज नहीं दे रही हैं, साथ ही नये उत्पाद बाजार में लाने के लिये अभी तैयार नहीं हैं।​

कारण – ​

HIV+ और AIDS का इलाज बहुत महँगा है। अगर किसी को HIV+ और AIDS है तो उनका शरीर बहुत कमजोर हो जाता है और उनका इलाज का खर्च सामान्य इलाज की तुलना में कई गुना अधिक होता है, इन बीमारियों के टेस्ट भी बहुत महँगे होते हैं और साथ ही अगर अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है तो ज्यादा लंबे समय तक अस्पताल में रहना होता है, जो कि सामान्य बीमारियों की दशा में नहीं होता है। केवल इसलिये कोई भी बीमा कंपनी HIV+ और AIDS को अपनी पॉलिसी के कवरेज में नहीं जोड़ती हैं।​

​बीमा कंपनियों की अपनी समस्याएँ है कि उनके पास HIV+ और AIDS बीमारियों से संबंधित पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध नहीं है और वे लोग कैसे HIV+ और AIDS को अपनी बीमा पॉलिसी में कवरेज दें, निर्णय नहीं ले पा रहे हैं, कुछ बीमा कंपनियाँ HIV+ और AIDS की प्राथमिक अवस्था को अपनी बीमा पॉलिसी में कवर करने की योजना बना रही हैं, पर उसमें भी बहुत से नियम होंगे।​

स्टार हेल्थ बीमा कंपनी ने HIV+ के लिये भारत में पहली बीमा योजना लाई है, यह बीमा योजना समूह बीमा में है। योजना का नाम है स्टॉर नेटप्लस इंश्योरेंस प्लॉन, जो कि HIV+ के मरीजों को भी इलाज के लिये कवर करते हैं।

 

5 चीजें जो आपके रेंट एग्रीमेंट में जरूर होनी चाहिये

बहुत सारे लोग अपना गृहनगर छोड़कर दूसरे शहरों में पढ़ने, काम करने, व्यापार करने या फिर अच्छी जीवनशैली के लिये जाते हैं। नये शहर में जाकर उनके लिये सबसे पहला काम होता है कि रहने की जगह ढ़ूँढ़ना। क्योंकि यह नामुमकिन होता है कि वे नये शहर में जाने से पहले अपना घर खरीद लें, अगर बड़े शहरों में जा रहे हैं तो आजकल सभी लोग फ्लेट ही किराये पर लेना चाहते हैं, परंतु किराये पर घर लेने से पहले अच्छा यह है कि क्या नियम और कानून याने कि टर्मेस एँड कंडीशन्स हैं, जान लेना चाहिये।

रेंट एग्रीमेंट आपके और मकानमालिक के बीच एक कानूनी दस्तावेज है, इसलिये जब भी रेंट एग्रीमेंट करें, अपनी आँख और कान खुले रखें, कोई नियम या कानून समझ नहीं आ रहा है तो मकानमालिक से समझने की कोशिश करें और तब भी संशय हो तो किसी वकील की मदद से समझने की कोशिश कर सकते हैं। यहाँ हम उन जरूरी ५ क्लॉज के बारे में बात कर रहे हैं, जो कि आपको रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) में ध्यान से देखना चाहिये और ये क्लॉज आपके रेंट एग्रीमेंट में जरूर होने चाहिये

. किराये की राशि, जमानत राशि या अन्य भुगतान

रेंट एग्रीमेंट में साफ साफ किराये की राशि लिखी हो व रेंट एग्रीमेंट खत्म होने तक हर महीने की किस तारीख को किराया देना है और किस तारीख तक ही किराया दे सकते हैं, और अगर कोई लेट फीस है तो वह भी एग्रीमेंट में लिखी होनी चाहिये।

अधिकतर २ महीने के किराये के बराबर राशि की जमानत राशि ली जाती है, परंतु मुँबई और बैंगलोर जैसे शहरों में मकानमालिक १० महीने के किराये के बराबर की जमानत राशि लेते हैं, इस बारें में अभी तक सरकार का कोई कानून या नियम नहीं आया है। जमानत राशि रेंट एग्रीमेंट में लिखी हो और रेंट एग्रीमेंट में यह भी साफ लिखा हो कि यह राशि कब लौटा दी जायेगी।

बिजली, पानी, गैस के बिल अगर किराये के अतिरिक्त है तो यह भी रेंट एग्रीमेंट में साफ साफ लिखा होना चाहिये, अगर बिजली का कनेक्शन अलग है या सबमीटर है तो बिजली की कीमत कैसे निकाली जायेगी।

. एग्रीमेंट का समय और नवीनीकरण की शर्तें

साधारणतया: रेंट एग्रीमेंट ११ महीने के होते हैं, पर यह ज्यादा समय के भी हो सकते हैं, परंतु सुनिश्चित कर लें कि एग्रीमेंट की समय सीमा साफ साफ लिखी हो

साथ ही लॉक इन पीरियड, जिसमें कि न तो किरायेदार घर छोड़ सकता है और न ही मकानमालिक घर से जाने को कह सकता है, सुनिश्चित कर लें कि यह भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा हो व यह भी लिखा हो कि अगर लॉकइन अवधि के दौरान अगर किसी के भई द्वारा एग्रीमेंट खत्म करना हुआ तो इसके लिये क्या क्या करना होगा। साधारणतया: अगर किरायेदार ल़ॉकइन अवधि के दौरान घर छोड़ता है तो मकानमालिक के द्वारा उसकी जमानत राशि जब्त कर ली जाती है और अगर मकानमालिक लॉकइन अवधि के दौरान घर छोड़ने को कहता है तो मकानमालिक को किरायेदार को जमानत राशि के बराबर की राशि, जमानत राशि सहित देना होता है।

ध्यान रखिये कि लॉकइन अवधि नोटिस अवधि से अलग होती है, नोटिस अवधि समान्यत: एक या दो महीने होती है, अगर यह अवधि दो महीने की है तो आपको घर खाली करने के पहले मकानमालिक को दो महीने के नोटिस देना होगा। ध्यान रखें कि नोटिस अवधि लॉकइन अवधि में वैध नहीं है।

कब और कैसे रेंट एग्रीमेंट का नवीनीकरण होगा, नवीनीकरण होगा या नहीं, कितना किराया बढ़ेगा, किराये का आपसी सहमति से कम किया जा सकता है या नहीं इत्यादि भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा होना चाहिये। जैसे कि मुँबई में ब्रोकर ही रेंट एग्रीमेंट करवाते हैं और वे नवीनीकरण पर कितना ब्रोकरेज लेंगे, ब्रोकरेज कौन देगा, यह सब बातें भी रेंट एग्रीमेंट में ब्रोकर लिख देते हैं, तो इन शर्तों को ध्यान से पढ़ लें।

३. फिटिंग और समान की सूचि

रेंट एग्रीमेंट में आप जिस फ्लेट को किराये पर ले रहे हैं, उसका नंबर भी होना चाहिये, कौन से फ्लोर पर है यह भी लिखा हो। घर का एरिया कितना है, कितने कमरे हैं, बाथरूम, लिविंग एरिया, किचन इत्यादि। अगर आपने फर्निश्ड घर लिया है तो उसके समान की सूचि जैसे कि सोफा, बिस्तर, कुर्सियाँ, अलमारियाँ, मेज, पंखे, बल्ब, गीजर, ट्यूबलाईट, एयर कंडीशनर इत्यादि। हो सके तो फोटो खींचकर मकानमालिक और ब्रोकर के साथ शेयर कर दें, जिससे जब आप मकान खाली करें तो मकानमालिक की आपत्तियों का निराकरण किया जा सके।

४. रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन

हमें रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन करना चाहिये। अगर रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं है तो कोर्ट के द्वारा एग्रीमेंट को प्राथमिक दस्तावेज नहीं माना जायेगा और जो भी डिस्प्युट है उसको साबित करने के लिये आपको अपने सबूत देने होंगे।

रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर करने के लिये आपको स्टॉम्प डयूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देय होते हैं। ये शुल्क किरायेदार और मकानमालिक दोनों आधा आधा वहन करते हैं, और यह भी रेंट एग्रीमेंट में लिखा होता है। साथ में यह भी लिखा होना चाहिये कि लीगल फीस कौन देगा, ब्रोकरेज कौन देगा, इत्यादि।

५. प्रतिबंध

बहुत सारे मकानमालिक किरायेदार को जानवर पालने की इजाजत नहीं देते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट के पहले ही मकानमालिक से यह पूछ लेना चाहिये, और भी ऐसी बहुत सारी बातें हो कि माँसांहार नहीं करना चाहिये, शराब का सेवन नहीं करना चाहिये, सोसायटी में उपलब्ध अन्य सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं या नहीं, पार्किंग उपलब्ध है या नहीं, बगीचे और छत का उपयोग कर सकते हैं या नहीं।

रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) की ओरिजनल प्रति मकानमालिक रखते हैं, पर ध्यान रखें कि एक प्रति आपके पास भी हो।

 

 

म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश कब करें? When to Invest in Mutual Fund and Equity Market​?

हम निवेश के लिये हमेशा ही उत्साहित रहते हैं और हमेशा ही अपनी जमापूँजी को, मेहनत की गाढ़ी कमाई को किसी और के कहने पर दाँव पर लगाने के लिये तैयार रहते हैं। हम अपनी ही बचत के लिये अपना दिमाग खर्च करने की बिल्कुल कोशिश नहीं करते हैं, बस किसी एक्सपर्ट ने क्या बता दिया, वह पत्थर की लकीर हो गया। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो ठहरिये, सोचिये, समझिये, ये जो पैसा आप किसी और के कहने पर, जो कि टीवी या रेडियो से बोल रहा है, वह तो इतना बोलकर अंतर्ध्यान हो जायेगा, अगर आपको घाटा हुआ तो आप कुछ नहीं कर पायेंगे, केवल अपनी किस्मत को दोष ही देंगे।

ऐसे कभी भी अपने निवेश न करें, निवेश करने के लिये कोई बहुत बड़ी पढ़ाई लिखाई नहीं चाहिये होती है, केवल थोड़ी सी समझ भी बहुत होती है। कुछ बुनियादी बातें मैं यहाँ बताना चाहता हूँ

म्यूचुअल फंड में निवेश जब भी करें, यह नियम जरूर पालें

६ माह से २ साल के लिये डेब्ट फंड में ही निवेश करें

२ साल से अधिक के लिये अपनी रिस्क देख लें और उचित प्रकार से निवेश करें। हमेशा ही लंबी अवधि याने कि १० वर्ष या अधिक के लिये निवेश करें, तभी अच्छा खासा फायदा होगा, कम से कम आप १२% प्रतिवर्ष की ब्याज दर का लाभ मानकर चलें। मेरे खुद के कई निवेश हैं जो कि २०% से ज्यादा के लाभ दे रहे हैं। बस हमें लंबी अवधि के लिये सोचना है और उन निवेशों को हाथ नहीं लगाना है।

शेयर बाजार में निवेश कब करें

शेयर बाजार में भी निवेश कभी भी कर सकते हैं, बस यह ध्यान रखें कि आपको शेयर बाजार के निवेश के बारे में थोड़ा बहुत पता हो, लंबी अवधि के निवेशकों को बहुत ज्यादा एक्सपर्ट होने की भी जरूरत नहीं है। यहाँ भी सबसे बड़ी समस्या यह है कि जो टीवी पर कहा जाता है, लोग उसे ही सुनकर फैसला ले लेते हैं। उस समय वे किसी एक्सपर्ट की सलाह को ही सर्वोपरि मान लेते हैं, हमेशा इस बात का ध्यान रखिये, कि टीवी पर उनको सारी चीजें बेचना पड़ती हैं, मैंने ऐसे बहुत से लोग देखे हैं जो कि एक्सपर्ट के कहे अनुसार खरीद तो लेते हैं, पर उनको घाटा उठाना पड़ता है।

हमेशा ही खुद पढ़ें और समझें तभी निवेश करें, अगर निवेश खुद से करने जा रहे हैं, तो हमेशा ही बड़ी कंपनियों में निवेश करें, न कि छोटी कंपनियों में जिनका नाम आपने न सुना है और न ही आपको उनके व्यापार और प्रबंधन के बारे में पता है, और उन कंपनियों के प्रबंधन और व्यापार की चर्चा कहीं भी नहीं होती है, आपका अपना पैसा है, आपको बहुत सावधानी बरतनी चाहिये। और अगर किसी ऐसी कंपनी में निवेश करना भी चाहते हैं तो पहले खुद उसके बारे में पढ़ लें और फिर निवेश करें। जल्दी पैसा कमाना आपका उद्देश्य नहीं होना चाहिये, आपको हमेशा ही याद रखना चाहिये कि आप यहाँ रातों रात अमीर बनने नहीं आये हैं, बल्कि यहाँ बैंक से ज्यादा ब्याज दर कमाने के लिये आये हैं।

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव आते रहते हैं, और जब ज्यादा कमाना है तो आपको रिस्क भी ज्यादा ही लेनी होगी, इसलिये अपनी निगाहें शेयर बाजार पर सतत रखें, क्योंकि कुछ बड़ी कंपनियाँ भी अच्छा नहीं कर पाती हैं और डूब जाती हैं, तो ऐसा न हो कि आप अच्छी कंपनी में निवेश करके सो जायें, नहीं तो आपकी गाढ़ी कमाई का पैसा डूब जायेगा।

 

नये जमाने के वित्तीय उत्पादों में निवेश करें, परंपरागत निवेश उत्पादों को छोड़ें

परंपरागत निवेश उत्पादों से हटकर आज के वित्तीय उत्पादों में बच्चों के भविष्य के लिये निवेश करना होगा। बच्चे निष्कपट होते हैं, और वे सभी बातों पर यकीन कर लेते हैं जो उनको कही जाती हैं और वही उनके मानस में अंकित हो जाता है। जब आप अपने बच्चों के लिये निवेश करें तो आप ध्यान रखें कि आप ऐसा न करें, आप परंपरागत निवेश के उत्पादों से हटकर आज के वित्तीय उत्पादों में निवेश करें। परंपरागत निवेश से अब आप अपने बच्चों का भला नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनका रिटर्न बहुत ही कम होता है और मुद्रास्फीति उस रिटर्न के बराबर ही होती है।

उदाहरण के लिये आपने १०० रूपये ५ वर्ष पहले निवेश किये थे, जिस पर आपको ८% का ब्याज मिल रहा था, परंतु अगर आप देखें तो मुद्रास्फीति भी लगभग बराबर ही रही, कई बार तो ब्याज दर से भी ज्यादा रही, तो जब आपको आपका १०० रूपया ब्याज के साथ मिलेगा, वह आज के १०० रूपये के बराबर नहीं, बल्कि बहुत कम होगा, आपने ५ वर्ष अपने रूपयों को निवेश भी किया, परंतु उसका कोई फायदा भी नहीं हुआ, तो ऐसे परंपरागत निवेशों से हमें बचने की आवश्यकता है, जहाँ कोई फायदा ही नहीं है, वे दिन गये जब बैंकों में ब्याजदर १० से १५% होती थी, अब तो अधिकतम ब्याजदर ही 7% है।

परंपरागत निवेशों में भरोसा हमें आज के नये वित्तीय उत्पादों में निवेश करने से रोकता है, क्योंकि हमें इसके बारे में सिखाया ही नहीं गया, और न ही हमारे अंदर जोखिम लेने की भावना को लाया गया, हमेशा ही हमें सिखाया गया कि शेयर बाजार में, म्यूचुअल फंड में पैसा डूब जाता है, पर फिक्सड डिपॉजिट सुरक्षित है। फिक्सड डिप़ॉजिट भी सुरक्षित नहीं है, अगर आपको इसके बारे में भी पता चल जाये तो फिर आप क्या करेंगे, ऐसे बहुत से बैंक रहे जो डूब गये और उनमें निवेश किये गये फिक्सड डिपॉजिट का पैसा भी निवेशकों को मिल नहीं पाया। खैर हम सरकारी बैंकों में निवेश कर रहे हैं, तो उनकी हालत भी बहुत अच्छी नहीं है। तो विश्वास किसी पर नहीं किया जा सकता है। मेरी राय में तो आज बैंकों में निवेश शेयर बाजार में निवेश से ज्यादा जोखिम भरा है। कब कौन से बैंक अचानक से बंद हो जायेगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है

आज के वित्तीय उत्पादों और निवेश पर हमारी मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी है और हमें समझना होगा कि निवेश करना कोई बहुत बड़ा रॉकेट साईंस नहीं है, निवेश आप अपने लिये भी और अपने बच्चों के भविष्य के लिये अच्छी तरीके से कर सकते हैं। कुछ और भ्रांतियाँ भी हैं

. जवान लोग निवेश नहीं कर सकते हैं, इसलिये वे अपने अभिभावकों से निवेश में मदद लेते हैं।

. निवेश अमीर लोगों का खेल है, कम रूपयों से निवेश नहीं किया जा सकता है।

. निवेश शुरू करने के लिये आपके पास बहुत सारा पैसा होना चाहिये, म्यूचुआल फंड की SIP ५०० रूपयों से और शेयर बाजार में १ शेयर भी खरीदा जा सकता है, भला उसकी कीमत कुछ हो।

. आपके पास बहुत सारी वित्तीय जानकारी होनी चाहिये, तभी आप एक सफल निवेशक बन सकते हैं।

निवेश जब समझ आ जाये, तब शुरू कर देना चाहिये, इसमें कभी देर नहीं होती। आज समझ आ जाये तो आज से ही निवेश शुरू कर दें।

आप उपरोक्त बातों पर गौर करिये और खुद की तुलना करके देखिये, आपको थोड़ा बहुत तो समझ आ ही जायेगा, आप अपने विचार और सवाल कमेंट करके छोड़ सकते हैं।

 

अपने बच्चों के लिये जल्दी निवेश करना शुरू करते हैं तो कितना फायदा होता है?​

बच्चे का जन्म किसी भी अभिभावक के लिये एक सुखद क्षण होता है, हमेशा ही हमारे ख्वाब बच्चों के भविष्य के लिये रहते हैं, और अगर उनके लिये स्कूल, कॉलेज या कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग सब बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, हमें पैसों की चिंता सताने लगती है, परंतु अगर आप पहले से ही बच्चों के लिये थोड़ा थोड़ा धन जोड़ रहे होते हैं और आपको पास पैसा है तो आप बच्चों के लिये बहुत कुछ कर सकते हैं। बच्चों के लिये उनके जन्म से ही बचत, बच्चे को सुरक्षित भविष्य देता है।

समय आपको जोखिम लेने देता है

आप अपने बच्चों को परीक्षा के एक सप्ताह पहले कुछ समय खेलने के लिये जरूर देंगे, परंतु जब केवल एक ही दिन बचा हो तो आप अपने बच्चों को समझायेंगे कि इस समय कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता है और केवल पढ़ाई में ध्यान लगाओ, इससे आप अच्छे नंबर ला सकते हो। वैसे ही जब आपके पास समुचित समय है तो आपके पास जोखिम लेने के लिये भी बहुत समय है, जल्दी निवेश शुरू करके आप अपनी जोखिम को समझ सकते हैं और ज्यादा लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

चक्रवृद्धि का फायदा

आपका बच्चा और आपका पैसा समय के साथ साथ बड़ता जायेगा। लंबी अवधि में निवेश में चक्रवृद्धि का फायदा आपको दिखेगा, आपके द्वारा किया गया छोटा निवेश लंबी अवधि में एक बड़ी रकम होकर आपके पास होगा। जितनी जल्दी आप निवेश की शुरूआत करेंगे, उतनी ही ज्यादा रकम आप अपने बच्चे के लिये जोड़ पायेंगे।

आयकर में बचत

अपने बच्चों के भविष्य के निवेश से ही आप अपने आयकर में भी बचत कर सकते हैं, आप अपनी करयोग्य आय में कमी कर सकते हैं, अगर आप ELSS में २ लाख रूपये अपने बच्चों के उच्च शिक्षा के लिये ५ वर्ष तक निवेश करते हैं, तो आप १.५ लाख रूपयों का निवेश अपने आयकर में दिखा सकते हैं।

समय के साथ अपनी खर्च करने की आदतें बदलें

जैसे हम अपने बच्चों को सुबह जल्दी उठने की आदत डालते है, जिससे हम यह सुनिश्चित कर पायें कि वे अनुशासन में रहें और स्वस्थ जीवन जी सकें। उसी तरह से हमें जल्दी से जल्दी निवेश करने की शुरूआत करें और अनुशासित तरीके से निवेश करें, जिससे कि आप भी अनुशासित होकर स्वस्थ वित्तीय जीवन जी पायें। एक बार आप निवेशक बन जायें तो आपको अपने खर्चों को ध्यान से करना होगा, जिससे कि आप अपनी बचत को प्राथमिकता दे पायें।

लंबी अवधि के निवेश मुद्रास्फीति से लड़ने में सहायता करते हैं

मुद्रास्फीति याने कि इन्फलेशन बढ़ती ही जा रही है, और मुद्रास्फीति से लड़ने का एकमात्र तरीका है कि हम किसी ऐसे उत्पाद में निवेश करें जो कि हमें ज्यादा लाभ या रिटर्न देते हैं। लंबी अवधि के निवेश सही निवेश के उत्पादों में करने से यह संभव है। अगर आप जल्दी निवेश करते हैं तो आपको बस लंबी अवधि तक निवेशित रहना है।

अगर आपको २०३८ में बच्चों के लिये अच्छी रकम चाहिये तो आज ही निवेश करना शुरू करें, यहाँ तक कि ५ वर्ष भी बहुत बड़ा अंतर कर देते हैं।

अगर आप १ लाख रूपये एक साथ आज २०१८ में निवेश करते हैं तो २०३८ में वे १२% की गणना से लगभग ९.६५ लाख रूपये होते हैं, अगर २०२३ में १ लाख रूपये निवेश करते हैं तो २०३८ में १२% की गणना से लगभग ५.४७ लाख रूपये होते हैं, जो कि लगभग ४.१८ रूपये कम होते हैं।

वैसे ही अगर १० हजार रूपये हर महीने SIPकरते हैं और आज २०१८ से निवेश शुरू करते हैं तो १२% की गणना से लगभग ९९.९ लाख रूपये होते हैं और अगर २०२३ से शुरू करते हैं तो लगभग ५०.५ लाख रूपये होते हैं, जो कि लगभग ४९.४ लाख रूपये कम होते हैं।

 

अपने बच्चों के भविष्य के लिए म्यूचल फंड में निवेश करें

अपने बच्चों के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से आप उनकी शिक्षा और भविष्य के लिए एक बड़ी रकम जोड़ पायेंगे।

बच्चों के भविष्य के लिए बचत करना हर अभिभावक की प्राथमिकता होती है और शिक्षा दिलवाना बहुत महँगा हो गया है, अच्छा यही है कि अभिभावक अपने बच्चों के लिए बचत बच्चे की जन्म से ही Continue reading…

 

इक्विटी म्यूचुअल फंड और एसआईपी में आप अपने बच्चे के लिये निवेश करिये

भारत में अभिभावकों के लिये बच्चों की पढ़ाई और विवाह हमेशा ही प्राथमिकता में होते हैं।आज की दुनिया में बहुत से विविध कैरियर के ऑप्शन भी हैं जैसे खेल, गायन, नृत्य इत्यादि, तथा साथ ही पढ़ाई का खर्च बढ़ता ही जा रहा है। Continue reading…