मोबाईल और क्रेडिट कार्ड को एक साथ न रखें, वरना लुट जायेंगे

आजकल कई लोग अपने क्रेडिट कार्ड मोबाईल फोन के पीछे लगाते हुए घूमते हैं, मतलब कि मोबाईल और क्रेडिट कार्ड को एक साथ रखते हैं। कई लोग इसे फैशन मानते हैं और कई लोग इसे अपने लिये सुविधाजनक मानते हैं। सुविधाजनक इसलिये मानते हैं क्योंकि उन्हें अपना वैलेट हर जगह लेकर घूमना नहीं होता है, कहीं पर भी कुछ भी भुगतान करना हो तो उसके लिये या तो किसी ऑनलाईन वैलेट से भुगतान कर दिया या फिर क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर दिया।

अभी एक वाकया हुआ कि दोस्त लोग रेस्टोरेंट में खाना खाने गये और एक लड़की, हम नाम रख देते हैं जानकी, अपने फोन के कवर में पीछे की और क्रेडिट कार्ड लगाये हुए थी, ऐसा नहीं कि केवल वही लड़की परंतु कई और दोस्त भी इसी तरह के फोन लेकर चल रहे थे, जिनमें उनके खुद के क्रेडिट कार्ड पारदर्शी कवर में पीछे लगे हुए थे। सभी दोस्त लोगों ने बढ़िया खाना खाया और खूब मस्ती भी की, फिर वापिस अपने अपने घरों की ओर चल दिये।

अब जानकी जब घर पहुँची और घर पहुँचने के बाद किसी और दोस्त को क़ॉल करने के लिये अपना मोबाईल टटोला, तो पता चला कि उसका मोबाईल तो कहीं गुम गया है, जानकी के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, क्योंकि केवल मोबाईल ही नहीं घूमा था, ये समझ लीजिये कि उसके क्रेडिट कार्ड की लिमिट पाँच लाख रूपये है तो उसके पाँच लाख रूपये गुम गये हैं, जानकी के साथ अब दिक्कत यह थी कि उसके पास न क्रेडिट कार्ड का नंबर था और न ही अपना रजिस्टर्ड मोबाईल नंबर, पर तभी ध्यान आया कि क्रेडिट कार्ड जब डिलिवर हुआ था तो उसका कवर लैटर था, जिस पर क्रेडिट कार्ड का पूरा नंबर लिखा होता है, तो वह फोन लगाकर अपने क्रेडिट कार्ड को हॉटलिस्ट करवा सकती है, उसने वह भी ढ़ूँढ़ा परंतु नहीं मिला। जानकी ने अपने दोस्तों को फोन लगाकर बताया कि उसका क्रेडिट कार्ड गुम गया है और वह बहुत चिंतित है। कुछ दोस्तों ने रेस्टोरेंट में भी जाकर देखा, पर मोबाईल नहीं मिला, टैक्सी जिसमें दोस्त लोग गये थे, उसे भी फोन लगाया तो उसके पास भी मोबाईल नहीं था। 

एक दोस्त ने जानकी को बताया कि पहले तो क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करो, अगर कुछ भी नहीं हो रहा है और अगर बैंक एकाऊँट से क्रेडिट कार्ड एक्सेस हो सकता है तो वहीं से हॉटलिस्ट करो, जानकी ने फटाफट नेटबैंकिंग पर लॉगिन किया और क्रेडिट कार्ड हॉटलिस्ट किया। नेटबैंकिंग पर हॉटलिस्ट करने के बाद जब उसने अपने क्रेडिट कार्ड की लिमिट देखी तो वह घबरा गई क्योंकि अब उसकी लिमिट शेष केवल 25 हजार ही बता रहा था, इसका मतलब कि कोई उसके क्रेडिट कार्ड से 4.75 लाख अभी तक या तो निकाल चुका था, या खरीददारी कर चुका था। अब जानकी को अहसास हुआ कि उसके क्रेडिट कार्ड से तो फ्रॉड हुआ है।

बैंक को शिकायत दर्ज की गई तो बैंक ने इन्वेस्टिगेशन के बाद कहा कि कोई फ्रॉड नहीं हुआ है, सारे ट्रांजेक्शन सही तरीके से OTP भेजने के बाद हुए हैं, खरीददारी में कोई फ्रॉड नहीं है, बीच में फोन पर बात करके बैंक ने यह भी सुनिश्चित किया था कि जानकी ही ये सारे ट्रांजेक्शन कर रही है, और फोन पर उन्हें सब कुछ पॉजीटिव ही मिला।

जानकी को 4.75 लाख रूपयों की चपत लग चुकी थी, क्योंकि बैंक का कहना भी एकदम सही है। अब जानकी पुलिस के पास जायेगी और अपनी शिकायत दर्ज करवायेगी, फिर देखते हैं कि क्या होगा?

अब हम समझते हैं कि जानकी की क्या गलती रही –

१. फोन और क्रेडिट कार्ड एक साथ नहीं रखना चाहिये।

२. फोन पर एसएमएस पढ़ने का नोटिफिकेशन ऑन नहीं होना चाहिये, जबकि फोन लॉक हो, यह हमेशा ही छिपा हुआ रहना चाहिये।

यह एक फ्रॉड ही है, परंतु कानूनन तरीके से बैंक इन सारे ट्रांजेक्शनों को फ्रॉड नहीं है कहकर बच सकते हैं, तो हमेशा ही ध्यान रखें कि फोन आजकल बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, और फोन और क्रेडिट कार्ड को एक साथ न रखें। साथ ही क्रेडिट कार्ड का CVV नंबर मिटा दें, उसे हमेशा ही याद रखें। आपको यह छोटी सी युक्ति न केवल लाखों रूपये बचायेगी, बल्कि होने वाली परेशानी से भी छुटकारा दिलवायेगी।

आपको क्या विचार हैं, जरूर बताईयेगा, कि इस तरह की होने वाली घटनाओं से कैसे बचा जाये, जिससे इतनी मानसिक परेशानी का सामना भी न करना पड़े और न ही आपको आर्थिक नुक्सान हो, जिसे फ्रॉड सिद्ध करने में ही आपको महीनों या सालों लग जायें।

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